pH क्या होता है और कितना होना चाहिए इसका स्तर?

मार्च 22, 2018

ये तो आप जानते ही हैं कि हमारे शरीर में असंख्य कोशिकाएं मौजूद होती हैं और ये कोशिकाएं और शरीर का हर अंग सही तरीके से अपना कार्य करता रहे इसके लिए शरीर में अम्ल और क्षार का संतुलन बनाये रखा जाता है ताकि हर प्रक्रिया संतुलित तरीके से पूरी होती रहे। इस संतुलन को सामन्य रूप से pH (पीएच) कहा जाता है लेकिन अभी ये जानना बाकी है कि ये pH क्या है, ये किस तरह कार्य करता है और इसका संतुलन इतना आवश्यक क्यों हैं?

तो चलिए, आज आपको बताते हैं pH से जुड़ी कुछ जरुरी और ख़ास बातें-

‘पावर ऑफ हाइड्रोजन’ या pH हाइड्रोजन की क्षमता को बताता है। इसकी अवधारणा सबसे पहले 1909 में सामने आयी जब कार्ल्सबर्ग लेबोरेट्री के रसायनशास्त्री सॉरेन पेडर लॉरिट्ज़ सॉरेनसेन ने इसे प्रस्तुत किया। हाइड्रोजन आयन के गतिविधि गुणांक को प्रयोगात्मक रूप से मापा नहीं जा सकता इसलिए सैद्धांतिक रूप से इसकी गणना की जाती है।

पीएच किसी विलयन की अम्लता या क्षारकता का एक माप है यानी किसी सोल्यूशन में कितना एसिड है और कितना बेस, ये जानने के लिए पीएच स्केल काम में लिया जाता है। रक्त की तरह एक विशेष सोल्यूशन में हाइड्रोजन आयनों की राशि को पीएच कहा जाता है। विलयन में जितने कम हाइड्रोजन आयन होंगे उस विलयन की PH वैल्यू उतनी ज़्यादा होगी। इसे पीएच स्केल पर 0 से 14 तक के पैमाने पर मापा जाता है जिसमें 7 का पीएच न्यूट्रल माना जाता है।

शुद्ध जल को न्यूट्रल माना जाता है और 25 °से. पर शुद्ध जल का पीएच 7 होता है। पीएच स्केल पर किसी सॉल्यूशन का pH मान अगर 7 से कम आता है तो वो सोल्यूशन अम्लीय होता है और 7 से ज़्यादा pH वाले सोल्यूशन को क्षारीय कहा जाता है यानी pH का मान जितना कम होगा, शरीर उतना ही एसिडिक होगा और pH का मान जितना ज़्यादा होगा, शरीर उतना ही एल्कलाइन होगा।

जैसे-जैसे pH का मान 7 से कम होता जाएगा, सॉल्यूशन की अम्लीय प्रकृति बढ़ती जाएगी जबकि pH का मान अगर 7 से 14 की तरफ बढ़ता जाएगा तो सॉल्यूशन की क्षारीय प्रकृति ज़्यादा होती जाएगी।

शरीर में जब ज़्यादा अम्लीय स्थिति बन जाती है तो कोशिकीय स्तर पर ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। रक्त द्वारा ऑक्सीजन का शरीर में संचार 7.4 pH पर किया जाता है लेकिन जब शरीर में pH लेवल 7.4 (एल्कलाइन) से नीचे गिर जाता है तो रक्त के लिए ऑक्सीजन का सही तरीके से संचार कर पाना संभव नहीं हो पाता जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और शरीर में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस इन्फेक्शन होने लगते हैं।

जब कभी रक्त का pH असंतुलित होकर एसिडिक हो जाता है यानी pH मान 7.4 से बहुत नीचे गिर जाता है तो शरीर में कई तरह के असंतुलन होने शुरू हो जाते हैं जैसे-

डॉक्टरों के अनुसार, ज़्यादा एसिडिक शरीर में ही बीमारियां विकसित होती हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी एसिडिक शरीर पर ही हमला करती हैं।

रक्त का पीएच संतुलन कितना ज़रूरी होता है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि रक्त के पीएच मान में 0.2 मान तक परिवर्तन होने की स्थिति में मृत्यु तक हो जाती है।

आपका शरीर एसिडिक है या नहीं, ये जानने के लिए सबसे बेहतरीन तरीका होता है यूरिन टेस्ट करना। हमारे शरीर के संतुलन को जानने में किडनी हमारी मदद कर सकती है क्योंकि शरीर जब ज़्यादा एसिडिक हो जाता है तो किडनी यूरिन के ज़रिये ज़्यादा एसिड को बाहर निकाल देती है जिससे रक्त के लिए एल्कलाइन बने रहना आसान हो जाता है और सभी क्रियाएं सही तरीके से चलती रहती हैं इसलिए यूरिन टेस्ट के माध्यम से ये जाना जा सकता है कि हमारे शरीर का पीएच संतुलित है या ज़्यादा एसिडिक है।

यूरिन का मान पीएच स्केल पर 6 से 7 के बीच होता है। अगर इसका मान 6 से कम आता है तो शरीर ज़्यादा एसिडिक है और अगर ये मान 7 से ज़्यादा है तो शरीर एल्कलाइन है। दोनों ही स्थितियों में पीएच को संतुलित किये जाने की जरुरत होती है जिसके लिए आहार और जीवनशैली में सुधार करने की जरुरत होती है।

आइये, अब जानते हैं कुछ जरुरी पीएच मान-

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि पीएच क्या होता है और इसका संतुलित रहना शरीर की सभी क्रियाओं के सामान्य रूप से चलते रहने के लिए कितना ज़रूरी होता है। इसके साथ ही आपको अपने शरीर के पीएच लेवल को मापने का तरीका भी पता चल चुका है इसलिए अपने शरीर के पीएच को संतुलित बनाये रखिये ताकि शरीर को स्वस्थ और सेहतमंद बने रहने में किसी तरह की कोई तकलीफ ना उठानी पड़े।

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