फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम क्या है?

आज की दुनिया को अगर मोबाइल की दुनिया कहे तो शायद ग़लत नहीं होगा क्योंकि आज हर किसी के हाथ में मोबाइल का होना ज्यादा जरुरी है, भले ही वो अपनी कोई ख़ास और कीमती चीज़ ही भूल जाए। एक से बढ़कर एक मोबाइल खरीदने की इस होड़ ने लोगों को, खासकर यूथ को टेक्नो फ्रेंडली तो बना दिया है लेकिन अनजाने में इस टेक्नोलॉजी ने लोगों की सूझबूझ और दिमाग पर ऐसा कण्ट्रोल किया है कि आज मोबाइल आसपास हो तो हम खुश होते हैं और अगर मोबाइल हमसे दूर हो तो तनाव में चले जाते हैं। ऐसे में हमारी मनःस्थिति पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है और कई मनोवैज्ञानिक समस्याएं पैदा हो गयी है। ऐसी ही एक हैरान कर देने वाली समस्या है मोबाइल से उपजा एक सिंड्रोम, जिसका नाम है फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम।

ऐसे में आपको भी इस सिंड्रोम के बारे में जरूर और जल्द से जल्द जान लेना चाहिए ताकि आप अपनी मनःस्थिति को जांच सके और अगर आप भी इस सिंड्रोम के शिकार हुए हैं तो तुरंत इससे बाहर निकल सके। तो चलिए, आज जानते हैं फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम के बारे में।

इस सिंड्रोम से ग्रस्त लोगों को बार-बार लगता है कि उनके फोन की घंटी बज रही है जबकि असल में फोन नहीं बज रहा होता है। 10 में से 9 लोग फैंटम वाइब्रेशन सिंड्रोम से ग्रस्त होते हैं।

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले 70 प्रतिशत लोग इस सिंड्रोम के शिकार होते हैं और उन्हें हमेशा लगता रहता है कि उनका फोन बज रहा है। ऐसे लोग पर्स या जेब में रखा फोन बार-बार निकालकर देखते हैं कि कहीं फोन बज तो नहीं रहा है।

इस सिंड्रोम पर अभी ज्यादा शोध नहीं हुए हैं। ये कोई बीमारी नहीं है लेकिन अगर समय रहते इस पर गौर ना किया जाए तो इसके गंभीर परिणाम मिल सकते हैं इसलिए तुरंत इस भ्रम से निकल जाना ही बेहतर होगा कि “कहीं मेरा फोन बज तो नहीं रहा?”

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