फोटोनिक प्रोपल्शन क्या है?

नवम्बर 29, 2018

ब्रह्माण्ड बहुत विस्तृत और विशाल है जिसके बहुत बड़े भाग से हम अभी तक अनजान है। अभी तक ब्रह्माण्ड के रहस्यों को उजागर करने के लिए हमारे द्वारा बहुत से प्रयास किए गए हैं जो लगातार जारी है लेकिन अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले सभी उपकरण बहुत ज्यादा समय लिया करते हैं। इस समस्या को दूर करने के लिए नासा के एक वैज्ञानिक फिलिप लुबिन ने एक ऐसे सिस्टम का प्रस्ताव पेश किया है जिसके जरिये बहुत ही कम समय में मंगल ग्रह की यात्रा करना सम्भव हो सकता है। नासा के आकलन के अनुसार, अभी तक मंगल ग्रह पर पहुँचने में पांच महीने का समय लग सकता है जो बहुत ज्यादा है। फिलिप लुबिन द्वारा प्रस्तावित सिस्टम का नाम है फोटोनिक प्रोपल्शन, जिसके बारे में जानना आपके लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है इसलिए आइये, इस सिस्टम के बारे में जानते हैं।

फोटोनिक प्रोपल्शन एक सैद्धांतिक व्यवस्था है जिसमें अंतरिक्ष में वस्तुओं को भेजने के लिए प्रकाश के कणों का इस्तेमाल किया जायेगा। प्रकाश के कणों का चुनाव करने का कारण ये है कि इनमें कोई भार नहीं होता है बल्कि सिर्फ ऊर्जा और गति होती है।

प्रकाश के कणों की ऊर्जा को जब किसी वस्तु से परावर्तित किया जाएगा तो ये कण उस वस्तु को आगे की ओर धकेलेंगे। लुबिन का कहना है कि अगर प्रकाश कणों की ऊर्जा को बड़े स्तर पर परावर्तित किया जाए तो ये संभव है कि इतनी अधिक मात्रा में ऊर्जा और गति प्राप्त हो जाए कि एक 100 किलोग्राम के रोबोटिक अंतरिक्ष यान को 3 दिनों में ही मंगल ग्रह पर पहुँचाया जा सके।

फोटोनिक प्रोपल्शन में सोलर सेल का इस्तेमाल होता है जो काफी हद तक नाव की पाल से समानता रखती है। जिस तरह नाव की पाल हवा को पकड़ने का काम करती है वैसे ही फोटोनिक प्रोपल्शन सिस्टम में लाइट को पकड़ने के लिए एक सोलर सेल (sail) इस्तेमाल होती है जो आकार में बहुत बड़ी होती हैं।

उम्मीद है कि बहुत जल्द इस सिस्टम के जरिये मंगल ग्रह पर केवल 3 ही दिन में पंहुचा जा सकेगा और उसके साथ-साथ अंतरिक्ष के अनसुलझे रहस्यों की वास्तविकता भी हमारे सामने बहुत जल्द आने लगेगी।

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