पीतल के बर्तन के फायदे जानकर आप दंग रह जायेंगे

पुराने ज़माने में घरों में पीतल के बर्तन ज़रूर मिला करते थे। इन्हीं बर्तनों में खाना पकाया जाता था और पूजन विधियों में भी इन्हीं का इस्तेमाल किया जाता था। धीरे-धीरे समय में आये बदलाव के साथ कई धातुओं के बर्तन बाजार में आने लगे जिसके चलते पीतल के बर्तन घरों से लुप्त होने लग गए।

लेकिन आजकल इन बर्तनों का महत्व फिर से बढ़ने लगा है क्योंकि जैसे-जैसे पीतल के बर्तनों से मिलने वाले फायदों को नयी पीढ़ियों ने समझा है, वैसे-वैसे ये पीतल के बर्तन फिर से बाज़ारों में और घरों में जगह बनाने लगे हैं।

ऐसे में पीतल के बर्तनों से होने वाले फायदों को जानना आपके लिए भी बेहतर साबित हो सकता है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं पीतल के बर्तन से होने वाले ढ़ेरों फायदों के बारे में –

* पीतल एक पीले रंग की धातु है जो ताम्बा और जस्ता धातुओं को मिलाकर बनाई जाती है। इस धातु का पीला रंग हमारी आँखों के लिए टॉनिक का कार्य करता है।

* धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो पीला रंग भगवान विष्णु को सम्बोधित करता है इसलिए सनातन धर्म में पूजा-पाठ व धार्मिक कर्म हेतु पीतल के बर्तन ही उपयोग में लिए जाते हैं।

* महाभारत का एक वृत्तांत भी पीतल के बर्तनों से जुड़ा है जिसके अनुसार, सूर्यदेव ने द्रौपदी को वरदान में पीतल का ऐसा अक्षय पात्र दिया था, जिसकी खासियत ये थी कि उस पीतल के पात्र में द्रौपदी चाहे कितने भी लोगों को भोजन कराये, उस पात्र का भोजन कम नहीं होता था।

* आयुर्वेद में भी पीतल का विशेष महत्व बताया गया है क्योंकि पीतल के पात्रों को भगवान धन्वं‍तरि का विशेष रूप से प्रिय पात्र बताया गया है।

* सेहत की दृष्टि से देखें तो पीतल के बर्तन में पकाया गया खाना शरीर को आरोग्य और तेज़ प्रदान करता है और पीतल के बर्तनों में पके खाने को, अगर पीतल के बर्तनों में ही खाया जाए तो इससे कृमि रोग, वायुदोष और कफ जैसी समस्याएं नहीं होती है।

* पीतल के कलश में रखा जल बहुत अधिक ऊर्जा प्रदान करने वाला होता है। साथ ही पीतल के बर्तन में पके भोजन में से केवल 7% पोषक तत्व ही नष्ट होते हैं यानी भोजन का अधिकांश पोषण उसमें बना रहता है।

* पीतल के बर्तन मजबूत होते हैं और इनमें भोजन पकाने पर ये बर्तन जल्दी गरम हो जाते हैं जिसके कारण गैस और अन्य प्रकार की ऊर्जा की बचत भी होती है।

* देवताओं की मूर्तियां और सिंहासन बनाने में पीतल का प्रयोग होता है वहीँ विभिन्न प्रकार के बर्तन, वाद्ययंत्र और गरीबों के गहने बनाने में भी ये धातु उपयोग में ली जाती है।

अवसर चाहे बृहस्पति ग्रह की शांति का हो या विवाह में कन्यादान का, बालक जन्म का अवसर हो या फिर पितृ जलांजलि देने का, सुख-दुःख से जुड़े इन सभी महत्वपूर्ण कार्यों में पीतल के पात्रों का ही प्रयोग किया जाता है क्योंकि धार्मिक दृष्टि से इनका विशेष महत्व होता है और सेहत की दृष्टि से पीतल के बर्तनों से होने वाले फायदे भी अब आप जान चुके हैं इसलिए इस बदलते दौर में, उस पुराने दौर के पीतल के बर्तनों को एकबार फिर से अपने घर ले आइये ताकि आपकी सेहत और सुख-समृद्धि बरकरार रहे।

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