अब सफर में पानी की बोतल नहीं ये पानी का बुलबुला बुझायेगा आपकी प्यास

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यूँ तो प्लास्टिक हमारे पर्यावरण के लिए काफी नुकसानदायक है लेकिन सफर में पानी पीने के लिए प्लास्टिक की बोतल ही हमारे लिए प्यास बुझाने का एक जरिया होता है। लेकिन अब आने वाले समय में इसका एक बेहतरीन विकल्प आने वाला है। दरअसल अब प्लास्टिक की पानी की बोतल की जगह लेने वाला है पानी का बुलबुला जो ना तो पर्यावरण के लिए नुकसानदायक है और हमारी प्यास बुझाने के लिए भी सहायक है।

दरअसल लंदन के एक स्टार्टअप स्किपिंग रॉक्स लैब ने एक ऐसे पदार्थ का निर्माण किया है जिसके जरिये पानी को एक बुलबुले का आकार दिया जा सकता है। इसका फायदा ये है की एक तो पीने के पानी के लिए प्लास्टिक की बोतल से छुटकारा मिलेगा और जब भी प्यास लगे इस पानी के बुलबुले में भरे पानी को पी कर अपनी प्यास भी बुझाई जा सकती है।

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असल में इस बुलबुले के निर्माण में समुद्री शैवाल का इस्तेमाल किया जाता है और ये बुलबुला एक परत जैसा होता है जिसके अंदर पानी भरा जा सकता है। इस बुलबुले के अंदर पीने का पानी भरा जा सकता है और पानी पीने के बाद चाहे तो आप इसे फेंक दें जो 4 से 6 सप्ताह में खुद ही नष्ट हो जाता है और चाहें तो इसे कैप्सूल की तरह पूरा भी निगल सकते हैं। इस लेब ने इस बुलबुले को ओहो (Ooho) नाम दिया है।

इस लेब ने इस बुलबुले का निर्माण करने से पहले 2013 में इस प्रोटोटाइप विकसित किया था जो सफल रहा था इसके बाद इसे सही रूप देते हुए इस बुलबुले का निर्माण किया गया। अब इसके विस्तृत निर्माण के लिए इसकी रिटेल मशीनें भी तैयार की जा रही हैं। हालाँकि अभी यह नहीं बताया गया है की ओहो बुलबुलों का आकार क्या होगा।
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लेकिन ये कहना गलत नहीं होगा की ये निर्माण प्लास्टिक की बोतलों से निजात दिलाने में एक अहम भूमिका निभाएगा। फिलहाल पानी की प्लास्टिक बोतल का अभी तक कोई सही विकल्प नहीं मिला है और लोग प्लास्टिक की बोतलों को पानी पीने के बाद यहाँ वहां फेंक देते है जो हमारे पर्यावरण के लिए भी बहुत नुकसानदायक है।

आपको जानकर आश्चर्य होगा की एक आंकड़े के अनुसार प्रतिवर्ष समुद्र में करीब 1 अरब बोतलें फेंकी जाती हैं जो ना सिर्फ पर्यावरण को नुक्सान पहुंचती है बल्कि जीव जंतुओं के लिए भी जान लेवा साबित होती हैं। लेकिन अगर ओहो बुलबुलों का निर्माण सफल रहा और अगर ये कीमत में सस्ती हुई तो दुनिया को प्लास्टिक की बोतलों से छुटकारा मिलेगा और ये जीव जंतुओं और पर्यावरण के लिए भी काफी फायदेमंद साबित होगा।

3 साल की मेहनत के बाद इस ओहो बुलबुले को बनाने वाले अन्वेषकों ने एक जन-सहयोग अभियान के जरिये करीब 1 मिलियन अमरीकी डॉलर इकट्ठे किये और अब ये मदद मिलने के बाद इन ओहो बुलबुले को बाजार में लाने के लिए तैयार हैं।

ऐसे तैयार किये ओहो बुलबुले
सबसे पहले पानी को एक गोलाकार आकृति में जमाया जाता है फिर पानी की जमी हुई इस बॉल को कैल्शियम क्लोराइड सोल्युशन में डुबोया जाता है इससे इस पानी की बॉल पर एक जिलेटिनीस परत बन जाती है। फिर इस बॉल को भूरे शैवाल से निकालने वाले एक सोल्युशन में भिगोया जाता है इससे इस बॉल पर एक दूसरी परत बन जाती है जो इसे थोड़ा ठोस बनाती है ताकि इसमें से पानी रिस कर के आसानी से बाहर ना निकले। इस प्रक्रिया से तैयार हुए ये ओहो बुलबुले कीमत में पानी की प्लास्टिक बोतल से भी सस्ते होंगे।

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