पोरस और सिकंदर की दिलचस्प कहानी

जनवरी 1, 2018

विश्व को जीतने का अरमान रखने वाले सिकंदर को इतिहास में ‘सिकंदर महान’ कहा गया है। सिकंदर को पूरी दुनिया जीतने का सपना महान दार्शनिक अरस्तू ने दिखाया था जो सिकंदर के गुरु थे। सिकंदर का जन्म 356 ईस्वी पूर्व में ग्रीक के मकदूनिया में हुआ था और अपने चचेरे और सौतेले भाईयों का कत्ल करके सिकंदर ने राजगद्दी हासिल की थी। सिकंदर की युद्ध रणनीतियां इतनी बेहतर और प्रभावशाली हुआ करती थी, जिनके दम पर सिकंदर की छोटी सी सेना भी बड़ी-बड़ी सेनाओं को मात दे दिया करती थी। अपने विश्व विजेता बनने के सपने को पूरा करने के लिए सिकंदर ग्रीस से मिस्र, सीरिया, बॅक्ट्रिया, ईरान, अफगानिस्तान और वर्तमान पाकिस्तान को जीतता हुआ व्यास नदी तक पहुंच गया । भारत पर सिकंदर के आक्रमण के बाद, कुछ राजाओं ने सिकंदर की अधीनता स्वीकार कर ली लेकिन जब सिकंदर का सामना राजा पोरस से हुआ तो सिकंदर का विश्व विजेता बनने का सपना अधूरा रह गया।

राजा पोरस को भारतीय इतिहासकार पुरु भी कहते हैं। वे एक महान राजा थे जिनका राज्य झेलम नदी से चिनाब नदी तक फैला हुआ था। 340 ईसापूर्व से 315 ईसापूर्व तक का समय राजा पोरस का माना जाता है। जब राजा पोरस ने सिकंदर की अधीनता स्वीकारने से इंकार कर दिया तो युद्ध तो होना ही था। ये विश्वप्रसिद्ध युद्ध था ‘पितस्ता का युद्ध’, जिसे ‘हाइडेस्पेस का युद्ध’ भी कहा जाता है। ‘हाइडेस्पेस’ झेलम नदी का ग्रीक नाम है। सिकंदर को झेलम नदी पार करके पोरस से युद्ध करना था लेकिन नदी में बाढ़ आ जाने के कारण ऐसा कर पाना आसान नहीं था। लेकिन यवन सेना नदी के पार पहुँचने में सफल हो गयी। सिकंदर ने राजा पोरस के पास संधि – प्रस्ताव भेजा जिसे ठुकराए जाने के बाद दोनों में भयंकर युद्ध हुआ।

युद्ध के पहले ही दिन सिकंदर की सेना को राजा पुरु की सेना से भयंकर टक्कर मिली जिसके चलते सिकंदर की सेना का मनोबल टूटने लगा। कई ऐतिहासिक स्रोत बताते हैं कि इस युद्ध के दौरान होने वाली बारिश ने इस युद्ध को और भी अधिक भयंकर रूप दे दिया। सिकंदर ये समझ चुका था कि इस युद्ध को आगे बढ़ाने से उसे सिर्फ हार ही मिलेगी इसलिए उसने राजा पोरस के पास युद्ध रोकने का प्रस्ताव भेजा, जिसे पोरस ने भी स्वीकार कर लिया और इस तरह सिकंदर और पोरस के बीच संधि हो गयी और सिकंदर के विश्व विजेता बनने का सपना अधूरा ही रह गया।

इतिहास में ऐसे कई सन्दर्भ मिलते हैं जिनमें से कुछ सिकंदर की उदारता का विवरण करते हैं कि किस प्रकार पोरस के पराजित होने के बावजूद, सिकंदर ने पोरस की बहादुरी से खुश होकर, पोरस को माफ कर दिया था और राज्य भी लौटा दिया था। जबकि इतिहास के कुछ साक्ष्य बताते हैं कि सिकंदर ने अपनी पराजय का आभास होने के बाद संधि-प्रस्ताव भेजा था।

कुछ साक्ष्य सिकंदर को महान और उदार राजा बताते हैं जबकि कुछ तथ्यों के अनुसार वो एक क्रूर राजा था। राजा पोरस को एक वीर और साहसी राजा बताया गया है लेकिन कहीं-कहीं इस बात का भी ज़िक्र है कि अगर राजा पोरस चाहते तो संधि प्रस्ताव स्वीकारने की बजाए देशभक्त की तरह लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त करने का विकल्प भी चुन सकते थे।

इन सभी तथ्यों में कितनी वास्तविकता है, ये तो इतिहास के गर्भ में छुपा है लेकिन हम ये ज़रूर कह सकते हैं कि सिकंदर और पोरस दोनों ही बहादुर योद्धा थे। मात्र 33 वर्ष की अल्पायु में, बीमारी के कारण सिकंदर की मृत्यु हो गयी थी और राजा पोरस की मृत्यु के सन्दर्भ में ये माना जाता है कि किसी साजिश के तहत उनकी हत्या करवा दी गयी थी।

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“सिकंदर महान से जुड़े रोचक तथ्य जो आपको इतिहास में ले जाएंगे”

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