PSU बैंकों का भविष्य

सितम्बर 21, 2018

पंजाब नेशनल बैंक के 12,000 करोड़ रूपये घोटाले के उजागर के बाद से आम आदमी आशंकित है। सरकारी बैंकों की Financial Position भी बहुत ज्यादा अच्छी नहीं है। NPAबढ़ता जा रहा है। कई छोटे बैंकों में तो NPA का स्तर 15%-20% तक हो गया है। सरकार को Loans के लिये दीर्घकालीन स्पष्ट नीति बनानी चाहिये। सरकारी हस्तक्षेप बिल्कुल खत्म होना चाहिये।

आज सारे सरकारी बैंकों (एक-दो को छोड़कर) को Capital की बहुत ज्यादा ज़रूरत है। सरकार को बैंकों में एक मुश्त राशि Capital Infuse करने से ही सरकारी बैंको की दशा सुधर सकती है। लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है।

समस्या का स्थायी समाधान PSU बैंकों को मिलाकर 4-5 बड़े PSU बैंक बनाना व Loan में सरकारी हस्तक्षेप को कम से कम करना है। छोटे-छोटे बैंक को मिलाकर बड़ा बैंक बनाने से खर्चे में कमी के साथ-साथ गुणवत्ता में सुधार होगा। कम्पटीशन भी आपस में कम होगा।

आज प्राइवेट बैंक डबल डिजीट (Double Digit) में कम से कम Growth कर रहे हैं। NPA का स्तर बहुत सीमा तक Control में है। वहीं PSU बैंक NPA की बढ़ती प्रोविज़निंग के कारण Loss में आते जा रहे हैं। अब समय आ गया है कि सरकार ज़रूरतमंद को Loan आसानी से दे लेकिन घोटाला नहीं हो, ऐसी दीर्घकालीन नीति बनाये तभी देश में PSU बैंकों का भविष्य उज्जवल होगा। PSU बैंकों को मर्जर से बैंकों को सुदूर दूर क्षेत्र में भी Expansion करने में आसानी व सुविधा रहेगी। देखते हैं कि आगे क्या होता है। सरकार की मंशा-नीयत व बैंकों के विकल्प पर ही PSU बैंकों का भविष्य निर्भर है।

sodhani-1 PSU बैंकों का भविष्यये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

“S.I.P में देरी की लागत”

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