पब्लिक और प्राइवेट कंपनी में क्या अंतर होता हैं?

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आइये जानते हैं पब्लिक और प्राइवेट कंपनी में क्या अंतर होता हैं। ये तो आप जानते हैं कि हमारे देश और दुनिया में बहुत सारी कम्पनियाँ मौजूद हैं जो अलग-अलग तरह के व्यवसाय से सम्बंधित हैं। उनमें से कुछ प्राइवेट कम्पनियाँ हैं तो कुछ पब्लिक।

लेकिन क्या आप जानते हैं कि पब्लिक और प्राइवेट कंपनी एक-दूसरे से काफी अलग होती हैं। ऐसे में क्यों ना, आज इनके बीच के अंतर को समझा जाए। तो चलिए, आज बात करते हैं पब्लिक और प्राइवेट कंपनी के बारे में।

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पब्लिक और प्राइवेट कंपनी में क्या अंतर होता हैं?

  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होती है और सार्वजनिक रुप से बिजनेस करती है जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध नहीं होती है और इसका मालिकाना हक इसके मालिकों के पास रहता है।
  • एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी शुरू करने के लिए कम से कम सात मेंबर होने जरुरी है जबकि एक प्राइवेट कंपनी की शुरुआत दो मेंबर्स से की जा सकती है।
  • पब्लिक लिमिटेड कम्पनी में सदस्यों की अधिकतम कितनी भी संख्या हो सकती है जबकि प्राइवेट कंपनी में अधिकतम 200 सदस्य हो सकते हैं।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी के पास कम से कम 3 निदेशक होने चाहिए जबकि प्राइवेट कंपनी के लिए कम से कम 2 निदेशक होने जरुरी होते हैं।
  • पब्लिक कंपनी की तुलना में, एक प्राइवेट कंपनी का आकार छोटा होता है और वित्तीय स्रोत भी कम होते हैं।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी में, वार्षिक आम बैठक (एजीएम) का कोरम पूरा करने के लिए बैठक में कम से कम पांच सदस्यों का व्यक्तिगत रुप से उपस्थित होना जरुरी होता है जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लिए इन सदस्यों की संख्या 2 होती है।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी के मामले में सदस्यों की एक जनरल मीटिंग बुलाना जरुरी होता है जबकि प्राइवेट कंपनी के मामले में ऐसी कोई अनिवार्यता नहीं है।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयर होल्डर अपने शेयरों को स्वतंत्र रुप से ट्रांसफर या बेच सकते हैं जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ऐसा नहीं कर सकती है।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी के लिए प्रॉस्पेक्टस जारी करना या उसके स्थान पर बयान देना अनिवार्य होता है जबकि प्राइवेट कंपनी के सन्दर्भ में ऐसा प्रावधान नहीं होता है।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी से मिलने वाला प्रॉफिट सरकार और उस कंपनी के शेयर होल्डर्स को मिलता है जबकि प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से मिलने वाला प्रॉफिट उस कंपनी के मालिकों के पास जाता है।
  • पब्लिक लिमिटेड कंपनी को स्थापना के बाद, बिजनेस शुरू करने के सर्टिफिकेट की आवश्यकता होती है जबकि प्राइवेट कंपनी स्थापना प्रमाण पत्र प्राप्त करने के तुरंत बाद अपना बिजनेस शुरु कर सकती है।

दोस्तों, उम्मीद है कि अब आप पब्लिक और प्राइवेट कंपनियों के बीच का अंतर समझ गए होंगे और ये जानकारी आपके लिए फायदेमंद होने के साथ-साथ आपको पसंद भी आयी होगी।

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