पुरी के पर्यटन स्थल

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आइये जानते हैं पुरी के पर्यटन स्थल के बारे में। ओडिशा राज्य का पुरी जिला नीलगिरी, नीलाद्रि, नीलाचल, पुरुषोत्तम, श्रीक्षेत्र और जगन्नाथ धाम जैसे नामों से जाना जाता है। ये स्थान भारत के चार पवित्रतम स्थानों में से एक है।

कहते हैं कि समुद्र इस शहर के पांव धोता है। पुरी भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की पवित्र नगरी है जहाँ धार्मिक स्थलों के दर्शन के साथ समुद्र का आनंद भी मिलता है इसलिए पर्यटक और श्रद्धालु यहाँ बड़ी तादाद में आते हैं।

ऐसे में आपको भी पुरी भ्रमण का आनंद जरूर लेना चाहिए। तो चलिए, जागरूक पर आज आपको पुरी के पर्यटन स्थल पर ले चलते हैं।

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पुरी के पर्यटन स्थल

जगन्नाथ मंदिर – पुरी जगन्नाथ मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। ये मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ विराजमान हैं। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है इसलिए इस नगर को जगन्नाथपुरी कहा जाता है।

ये मुख्य मंदिर करीब 30 छोटे-बड़े मंदिरों से घिरा हुआ है। यहाँ की रसोई भारत की सबसे बड़ी रसोई के रुप में जानी जाती है जिसमें श्रद्धालुओं को भोजन के रूप में प्रसाद मिलता है और यहाँ अलग- अलग जाति धर्म के लोग एकसाथ बैठकर भोजन करते हैं।

पुरी का सबसे प्रसिद्ध त्यौहार जगन्नाथ यात्रा है जिसे देखने के लिए देश भर से श्रद्धालु यहाँ आते हैं। इस रथयात्रा में सबसे आगे बलरामजी का रथ, उसके बाद देवी सुभद्रा का रथ और सबसे पीछे भगवान जगन्नाथ श्रीकृष्ण का रथ होता है। इन रथों के नाम और रंग अलग-अलग होते हैं।

बलराम जी के रथ को तालध्वज कहा जाता है जिसका रंग लाल और हरा होता है। देवी सुभद्रा का रथ दर्पदलन या पद्म रथ कहलाता है जिसके रंग काला, नीला और लाल होते हैं। भगवान जगन्नाथ के रथ को नंदीघोष या गरुड़ध्वज कहा जाता है जिसका रंग लाल और पीला होता है।

ये महोत्सव 10 दिन तक चलता है। इस रथ यात्रा का हिस्सा बनकर आपका मन सुखद आनंद से भर जाएगा इसलिए पुरी की जगन्नाथ यात्रा का हिस्सा जरूर बनिए।

पुरी बीच – इस धार्मिक नगरी के समुद्री नज़ारें भी आपको आकर्षित कर ही लेंगे। बंगाल की खाड़ी पर स्थित पुरी बीच पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय समुद्र का खूबसूरत नज़ारा देखकर पर्यटक आनंदित हो जाते हैं।

चिल्का वन्यजीव अभयारण्य – पुरी से 50 किलोमीटर दूर चिल्का झील और चिल्का वन्यजीव अभयारण्य भी स्थित है। इन दोनों ही स्थानों को देखने के लिए बड़ी तादाद में पर्यटक हर साल आते हैं और चिल्का झील के सौन्दर्य को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और वन्यजीव अभयारण्य के दुर्लभ जीवों को देखकर हैरान हुए बिना नहीं रह पाते हैं।

अथरनाला ब्रिज – 13वीं शताब्दी में निर्मित ये ब्रिज मांडूपुर नदी पर बना है। ये ब्रिज पुरी नगर के प्रवेश द्वार पर बना है और 85 मीटर लम्बा और 11 मीटर चौड़ा है। सर्दी के दिनों में यहाँ घूमना बहुत अच्छा लगता है।

गुंडिचा मंदिर – पुरी का खूबसूरत गुंडिचा मंदिर गुंडिचा घर के नाम से भी जाना जाता है। कलिंग वास्तुकला से निर्मित ये मंदिर जगन्नाथ मंदिर से सिर्फ 3 किलोमीटर की दूरी पर है। जगन्नाथ जी की रथयात्रा इस मंदिर तक पहुंचकर पूरी होती है।

साक्षी गोपाल मंदिर – जगन्नाथ पुरी से 20 किलोमीटर दूर पुरी-भुवनेश्वर हाईवे पर साक्षी गोपाल मंदिर स्थित है जो देखने में जगन्नाथ मंदिर का छोटा रुप ही है। यहाँ भगवान गोपाल की जो मूर्ति स्थापित है उसे भगवान कृष्ण के पोते राजा वज्र ने सालों पहले वृंदावन में रखा था।

मान्यता है कि भगवान खुद चलकर वृन्दावन से यहाँ आ गए क्योंकि वे 2 ब्राह्मणों के बीच हुए मतभेद में साक्षी बनना चाहते थे इसलिए यहाँ स्थापित भगवान गोपाल को साक्षी गोपाल कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में अनाला नवमी के दिन राधा जी के पवित्र पैरों के दर्शन किये जा सकते हैं।

दोस्तों, पुरी के प्राचीन धार्मिक मंदिरों और समुद्री तटों को आपका इंतजार है इसलिए पुरी की सैर का प्लान बना ही लीजिये और वहां ऐसे समय जाइये जब आप रथयात्रा महोत्सव के उत्सव में शामिल हो सके।

उम्मीद है पुरी के पर्यटन स्थल कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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