मिठाई के ऊपर लगा वर्क हो सकता है घातक जानिए क्यों ?

जैसा कि हम सब जानते हैं त्योहारों का सीजन अब शुरु हो चुका है और इस में मिठाइयों की खपत बढ़ जाना एक आम बात है। लेकिन हम जो मिठाईयां खा रहे हैं उन पर लगा चांदी का वर्क आपको घातक रूप से बीमार कर सकता है। सुनने में यह बात थोड़ी सी अजीब लगेगी लेकिन आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि चांदी का वर्क बनाने में जानवरों की आंत का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने ऐसे चांदी के वर्क पर रोक लगा रखी है लेकिन इसके बाद भी यह आसानी से मार्केट में बिक रहे हैं। बात यहीं खत्म नहीं होती चांदी के असली वर्क के नाम पर बाजार में अल्मुनियम के वर्ग भी बिक रहे हैं जिससे कैंसर फेफड़े और दिमाग की बीमारियां हो सकती है।

पूरे देश में परंपरागत रुप से बनाए जाने वाला चांदी का वर्क मुख्य तौर से जानवरों की खालो, आंतों से ही बनाया जाता है।

दरअसल वर्क बनाने के लिए चांदी को जानवरों की आंतों से पीटा जाता है इस से बिल्कुल पतले वर्क बनते हैं इसे सामान पर लपेटने में आसानी होती है।

लेकिन कमाल की बात यह है कि वर्क के पैकेट पर कोई भी सिंबल नहीं होता जिससे यह पता चल सके कि ए वेजिटेरियन प्रोडक्ट है या नॉन वेजिटेरियन।

चांदी के वर्क में काफी घातक पदार्थ होते हैं जैसे निकल लेड क्रोमियम और कैडमियम इसमें मेटल सहित कई भारी पदार्थ होते हैं।

भारत मैं चांदी के वर्क का इस्तेमाल मिठाई पान-सुपारी यहां तक की फलों तक पर किया जाता है।

चांदी का वर्क बनाने के लिए कई जगह मशीनों का उपयोग भी होने लगा है इसमें स्पेशल पेपर और पॉलिएस्टर कोटेड शीट के बीच में चांदी को रखकर वर्क बनाया जाता है।

ऐसे करें असली नकली की पहचान। चांदी के वर्क की असली नकली की पहचान के लिए आप उसे हाथ में ले और मसलें अगर गोली बन जाती है तो यह वर्क नकली है।

अगर चांदी के वर्क को सामान्य तौर पर जलाया जाए तो वह एक छोटी सी गेंद के रूप में बदल जाएगा लेकिन अगर इसमें अल्मुनियम की मिलावट है तो यह ग्रे रंग का हो जाएगा।

मिठाई पर चुपके हुए चांदी के वर्क को अपनी उंगलियों से हल्के हाथ से पकड़ें अगर यह उंगलियों में चिपक कर अलग हो जाता है तो समझ लीजिए इसमें एलुमिनियम फाइल का इस्तेमाल किया गया है।

चांदी का वर्क अगर कुछ ही दिनों में काला पड़ने लगे तो यह समझ लीजिए कि इस में मिलावट की गई है।

इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टोक्सीलॉजी के अनुसार बाजार में उपलब्ध चांदी के वर्क निकल क्रोमियम और केडमियम प्रचुर रूप से संपन्न है इन्हें खाने से केंसर का रोग हो सकता है।

आपको बता दें कि धातु चाहे किसी भी रुप में हो नुकसानदेह होती है। इसके सेवन से लीवर किडनी गले को सबसे अधिक नुकसान होता है। इस में बच्चों की याददाश्त कमजोर होती है उनका आईक्यू लेवल भी कम हो जाता है और फेफड़ों को भी नुकसान पहुंचता है। कुछ सालों पहले इंडियन एयरलाइंस ने चांदी के वर्क को मांसाहारी मानते हुए इसके इस्तेमाल पर रोक लगा दी थी।

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