रूमेटाइड आर्थराइटिस क्या है?

नवम्बर 19, 2018

हमारे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली का कार्य होता है शरीर की सुरक्षा करना लेकिन जब ये प्रतिरक्षा प्रणाली ही शरीर पर हमला बोल दे तो क्या हो? ऐसा ही होता है रूमेटाइड आर्थराइटिस में, जब इम्यून सिस्टम शरीर के टिश्यूज को नुकसान पहुंचाने लगता है। रूमेटाइड आर्थराइटिस में जोड़ों की परतें प्रभावित होती हैं जिससे जॉइन्ट्स में दर्द और सूजन रहना शुरू हो जाता है जिसका परिणाम हड्डियों का घिसना और जोड़ों में ख़राबी होने के रूप में सामने आता है और जॉइंट्स से शुरू हुयी ये सूजन शरीर के बाकी अंगों को भी प्रभावित कर सकती है।

इतना ही नहीं, अगर गंभीर रूमेटाइड आर्थराइटिस हो जाए तो शरीर विकलांग भी हो सकता है। रूमेटाइड आर्थराइटिस दोनों तरफ के जॉइंट्स को एकसाथ प्रभावित करता है जैसे दोनों हाथ, दोनों कलाई या दोनों घुटने।

वृद्धावस्था में रूमेटाइड आर्थराइटिस होना आम बात है और इसकी शुरुआत मध्यम आयु वर्ग में शुरू हो जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलायें इससे ज्यादा प्रभावित होती हैं।

रूमेटाइड आर्थराइटिस होने का कारण – हमारे शरीर में जोड़ों के चारों ओर एक परत होती है जिसे साइनोवियम कहते हैं। इस परत पर जब प्रतिरक्षा प्रणाली हमला करती है तो सायनोवियम में सूजन आ जाती है जिससे कार्टिलेज और जॉइंट्स के बीच की हड्डी नष्ट हो जाती है। टेंडेंट्स और लिगामेंट्स में भी तनाव आ जाता है जिससे वो कमजोर हो जाते हैं। ऐसा होने पर जोड़ों का आकार और लचीलापन समाप्त होने लगता है।

रूमेटाइड ऑर्थराइटिस के लक्षण-

दर्द – जोड़ों में दर्द होना, जो सुबह के समय और लम्बे समय तक आराम करने के बाद ज्यादा बढ़ जाता है।

जोड़ों का अकड़ना – जोड़ों में अकड़न और कठोरता आ जाती है जो सुबह के समय बहुत अधिक बढ़ जाती है और सामान्य होने में भी ज्यादा समय लेती है।

सूजन – जोड़ों में सूजन आ जाती है।

त्वचा का लाल होना – जोड़ों में आयी सूजन से त्वचा लाल दिखाई देने लगती है और हाथ लगाने पर दर्द महसूस होता है।

अगर जोड़ों में ऐसा दर्द और सूजन 6 महीने से ज्यादा रहे तो तुरंत एक रूमेटोलॉजिस्ट से मिलें ताकि उपचार जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।

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