राजा विक्रमादित्य कौन थे?

बेताल पच्चीसी की कहानियां तो आपने भी सुनी होगी जिसमें बेताल, राजा विक्रम के कंधे पर लटके-लटके 25 कहानियां सुना देता है और हर कहानी में एक रहस्य होता है जिसे सुलझा कर राजा विक्रम उस बेताल से मुक्ति पाते हैं। इस रोचक कहानी के राजा विक्रम भारत के एक महान शासक राजा विक्रमादित्य थे जो लोकप्रिय और शक्तिशाली होने के साथ-साथ अपनी उदारता के लिए भी जाने जाते रहे। ऐसे में आप भी इतिहास के इस अमर राजा के जीवन से जुड़ी कुछ विशेष बातें जरूर जानना चाहेंगे। तो चलिए, आज आपको बताते हैं राजा विक्रमादित्य से जुड़ी कुछ ख़ास बातें।

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विद्या और संस्कृति के संरक्षक रहे राजा विक्रमादित्य अपनी न्याय व्यवस्था के लिए मशहूर थे। राज्य व्यवस्था की पड़ताल करने और अपनी जनता के कष्टों को जानने के लिए राजा विक्रमादित्य रात के समय नकली वेश धारण करके राज्य का दौरा किया करते थे ताकि उनके राज्य में सब जगह सुख-शान्ति बनी रहे और प्रजा के साथ होने वाले किसी भी तरह के अन्याय को न्याय में बदला जा सके।

विक्रम सम्वत से शुरू होने वाले हिन्दू नववर्ष के लिए भी यही माना जाता है कि ये नाम राजा विक्रमादित्य के नाम पर ही पड़ा है। हालाँकि इस पर विद्वानों की अलग-अलग राय है। कुछ विद्वानों के अनुसार विक्रमादित्य कोई व्यक्ति विशेष का नाम नहीं है बल्कि एक उपाधि है जबकि कुछ विद्वानों के अनुसार राजा विक्रमदित्य की महानता के कारण आगे आने वाले राजाओं ने उनके नाम को उपाधि के रूप में धारण करना शुरू कर दिया।

माना जाता है कि राजा विक्रमादित्य के पास 32 पुतलियां हुआ करती थी जो न्यायप्रिय शासन करने में उनकी मदद किया करती थी। ‘सिंहासन बत्तीसी’ में 32 कहानियां है जिनमें से हर कहानी राजा के गुणों का वर्णन करती थी और इस कहानी संग्रह में इन 32 पुतलियों और राजा विक्रमादित्य के न्याय से जुड़े प्रसंग मौजूद हैं।

महान सम्राट विक्रमादित्य की सेना भी बहुत विशाल थी। उन्होंने मालवा, उज्जैन और भारतभूमि को शकों के चंगुल से मुक्त करवाया था और स्वतंत्रता संग्राम का आगाज़ किया था। उनकी विशाल सेना में 3 करोड़ पैदल सैनिक, 10 करोड़ अश्व, 24600 हाथी और 4 लाख नौकाएं थी।

राजा विक्रमादित्य की केवल सेना ही विशाल नहीं थी बल्कि उनका दरबार भी विद्या और कौशल के नवरत्नों से सुसज्जित था जिनमें धन्वन्तरि, क्षपणक, अमरसिंह, शंकु, वेताल भट्ट, घटकर्पर, कालिदास, वराहमिहिर और वररुचि जैसे महान विद्वान उपस्थित थे।

दोस्तों, राजा विक्रमदित्य ने अपने न्याय, कौशल, उदारता, वीरता और बुद्धिमत्ता से स्वयं को एक आदर्श राजा के रूप में स्थापित किया और आज भी उनका नाम उतने ही सम्मान और आदर के साथ याद किया जाता है। बहुत सी प्राचीन कहानियों का ताना-बाना राजा विक्रमादित्य के जीवन के इर्द-गिर्द ही बुना गया जिसे देखकर आज भी  सही और ग़लत के बीच के  फर्क को आसानी से समझा जा सकता है। इसी को तो कहते हैं धरोहर, जो हर दौर में अपना अस्तित्व बनाये रखती है और सही दिशा दिखाने में सहयोग भी करती है जैसे राजा विक्रमादित्य का आदर्श जीवन हमें प्रेरित करता है।

उम्मीद है कि भारत के महान राजा विक्रमादित्य के जीवन की कुछ ख़ास बातें जानकर आपको अच्छा लगा होगा और अगर मौका मिला तो आप बैताल पच्चीसी और सिंहासन बत्तीसी जैसे महान कहानी संग्रहों के जरिये राजा विक्रमादित्य के जीवन को करीब से जानने का प्रयास जरूर करेंगे।

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