राजस्थान के धार्मिक स्थल

आइये जानते हैं राजस्थान के धार्मिक स्थल के बारे में। रंगों की धरती राजस्थान अपनी सुनहरी रेत, समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विविधता के कारण अपनी विशेष पहचान रखती है। भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित ये राज्य अपने महल, किले, रेगिस्तान, प्राचीन लोक परम्पराओं और धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता है।

यहाँ देश-विदेश से बड़ी तादाद में पर्यटक हर साल आते हैं और इस राज्य के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्त्व के मंदिरों के दर्शन करने के लिए यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बहुत ज्यादा होती है।

यहाँ ऐसे बहुत से मंदिर हैं, जहाँ दर्शन करने का आनंद आपको भी जरूर उठाना चाहिए इसलिए क्यों ना आज, इसी बारे में जानें। तो चलिए, आज आपको बताते हैं राजस्थान के धार्मिक स्थलों के बारे में।

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राजस्थान के धार्मिक स्थल

गोविंद देव जी मंदिर, जयपुर – गोविंद देव जी जयपुर के आराध्य देव हैं। भगवान कृष्ण को समर्पित इस मंदिर में श्रीकृष्ण की मूर्ति उनके पोते बज्रनाभ द्वारा स्थापित की गयी थी।

ये मूर्ति पहले वृन्दावन के मंदिर में स्थापित थी जिसे सवाई जयसिंह द्वितीय ने जयपुर स्थित मंदिर में स्थापित किया था।

अचलनाथ मंदिर, जोधपुर – ये मंदिर एक प्रसिद्ध शिव मंदिर है जिसका निर्माण 1531 में राव गंगा की रानी नानक देवी ने करवाया था। इस मंदिर में गंगा बावड़ी नामक जलाशय भी है।

अढ़ाई दिन का झोपड़ा, अजमेर – राजस्थान के अजमेर शहर में स्थित अढ़ाई दिन का झोपड़ा, भारत की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है। इसकी वास्तुकला प्राचीन भारत-इस्लामी संरचना से प्रेरित है।

इस मस्जिद का निर्माण एक संस्कृत विश्वविद्यालय के अवशेषों पर हुआ। इसे अजमेर में सबसे पुराने मौजूदा स्मारक के रुप में भी जाना जाता है।

ख़्वाजा गरीब नवाज़ दरगाह, अजमेर – राजस्थान का सबसे लोकप्रिय मुस्लिम स्थल ख़्वाजा गरीब नवाज़ की दरगाह है जहाँ हर समुदाय के लोग दर्शन करने आते हैं और माना जाता है कि यहाँ सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

ये दरगाह हज़रत ख़्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की कब्र है, जो भारत में इस्लाम के संस्थापक थे।

एकलिंगजी मंदिर, उदयपुर – उदयपुर से 22 किमी. की दूरी पर स्थित एकलिंगजी मंदिर का निर्माण उदयपुर के राजा बप्पा रावल द्वारा करवाया गया था। प्राचीन महत्त्व वाला ये मंदिर मेवाड़ कबीले के संरक्षक देवता भगवान एकलिंगजी को समर्पित है।

करनी माता मंदिर, बीकानेर – बीकानेर शहर से 30 किमी. दूरी पर स्थित करनी माता का प्रसिद्ध मंदिर है, जहाँ करणी माता की मूर्ति स्थापित है और उन्हें माता जगदम्बा के अवतार के रुप में पूजा जाता है।

इसे चूहों का मंदिर भी कहा जाता है। यहाँ चूहों को माता के पुत्र के रुप में पूजा जाता है। इन चूहों को काबा कहा जाता है। काले चूहों के बीच अगर सफेद चूहा किसी श्रद्धालु को दिखाई दे जाये तो इसे बहुत ही शुभ माना जाता है।

मंदिर के मुख्य द्वार पर संगमरमर पर की गयी नक्काशी, चांदी के किवाड़, सोने के छत्र और काबा के प्रसाद के लिए रखी गयी चांदी की बड़ी परात देखने लायक है।

कैला देवी मंदिर, करौली – कैला देवी मंदिर हिन्दुओं का धार्मिक स्थल है जिसे देवी दुर्गा के 9 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। इस मंदिर में हर साल लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं।

त्रिकूट पर्वत की सुरम्य घाटी में बना ये मंदिर अपने शिल्प और स्थापत्य के कारण भी विशेष महत्त्व रखता है। कहा जाता है कि यहाँ डकैत भी माता की पूजा करने आते हैं।

चारभुजा मंदिर, नाथद्वारा – नाथद्वारा में स्थित चारभुजा मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। 5000 साल पुराना ये मंदिर अपनी उत्तम वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्ध है।

जगदीश मंदिर, उदयपुर – उदयपुर के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है जगदीश मंदिर, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इसका निर्माण 1651 में महाराणा जगत सिंह ने करवाया था। ये मंदिर अपनी उत्कृष्ट वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है।

किराडू मंदिर, बाड़मेर – किराडू मंदिर कई मंदिरों का समूह है जिसे राजस्थान के खजुराहो के नाम से भी जाना जाता है। ये मंदिर अपनी प्राचीन भूतिया कथाओं के लिए भी प्रसिद्ध है।

दिलवाड़ा जैन मंदिर, माउन्ट आबू – जैन समुदाय का पवित्र मंदिर माउन्ट आबू में स्थित दिलवाड़ा जैन मंदिर है। ये मंदिर अपनी उत्कृष्ट वास्तुकला और संगमरमर नक्काशियों के लिए प्रसिद्ध है।

दिलवाड़ा मंदिर परिसर में पाँच अलग-अलग मंदिर है जो महावीर स्वामी, श्री आदिनाथ, श्री परशनाथ, श्री ऋषभदेव और श्री नेमी नाथ जी को समर्पित है।

देव सोमनाथ मंदिर, डूंगरपुर – डूंगरपुर में सोम नदी के तट पर स्थित ये मंदिर भगवान शिव का मंदिर है। ये गुजरात के सोमनाथ मंदिर की प्रतिकृति है और मध्यप्रदेश के खजुराहो मंदिरों में से एक भी है।

सफेद संगमरमर से बने इस खूबसूरत मंदिर की दीवारों पर कई शिलालेख भी हैं।

ब्रह्मा मंदिर, पुष्कर – राजस्थान के पुष्कर शहर में भगवान ब्रह्मा को समर्पित सबसे प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है ब्रह्मा मंदिर। भगवान ब्रह्मा को समर्पित ये दुनिया का एकमात्र मंदिर है। माना जाता है कि ये मंदिर लगभग 2000 साल पुराना है।

मीरा बाई मंदिर, चित्तौड़गढ़ – मीरा बाई मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित कुम्भ श्याम मंदिर के परिसर में है। इसका निर्माण उत्तर भारतीय वास्तुकला में किया गया है।

सूर्य नारायण मंदिर, पाली – भगवान सूर्य को समर्पित ये मंदिर अपनी अनूठी स्थापत्य कला के लिए जाना जाता है। इसका निर्माण 15 वीं सदी में हुआ था।

त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, बांसवाड़ा – बांसवाड़ा से 20 किमी. दूर स्थित ये मंदिर त्रिपुरा सुंदरी देवी को समर्पित है। बांसवाड़ा के इस प्रसिद्ध मंदिर में 18 भुजाओं वाली काले पत्थर से बनी मूर्ति स्थापित है जिसमें देवी की प्रत्येक भुजा का अलग प्रतीक चिन्ह है।

सालासर बालाजी मंदिर, चूरू – इसे सालासर धाम भी कहा जाता है। भगवान हनुमान को समर्पित इस मंदिर में हर साल लाखों भक्त दर्शन के लिए आते हैं। इसे शक्ति स्थल माना जाता है। यहाँ चैत्र पूर्णिमा और अश्विन पूर्णिमा के दौरान त्यौहार का आयोजन भी किया जाता है।

हर्षनाथ मंदिर, सीकर – भगवान शिव को समर्पित हर्षनाथ मंदिर सीकर जिले में स्थित है। अरावली की पहाड़ियों पर बना ये ऐतिहासिक मंदिर लगभग 200 साल पुराना है। ये मंदिर अपनी अद्भुत बनावट और नक्काशी के लिए भी जाना जाता है।

वास्तविक मंदिर को मुग़ल सम्राट औरंगजेब द्वारा नष्ट कर दिया गया था लेकिन राओ शिवसिंह द्वारा इस मंदिर के पुराने अवशेषों से नव निर्माण करवाया गया।

राजस्थान को अगर धार्मिक स्थलों वाला राज्य कहा जाये तो सही ही होगा। इस राज्य में बहुत से ऐतिहासिक और प्राचीन धार्मिक स्थल मौजूद हैं जिनमें से कुछ धार्मिक स्थलों की जानकारी आज आपको मिली है।

उम्मीद है जागरूक पर राजस्थान के धार्मिक स्थल कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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