खून का निर्माण कैसे होता है हमारे शरीर में

दिसम्बर 1, 2017

हमारे शरीर के लिए खून का महत्व इतना अधिक होता है कि रक्त को जीवन धारा कहा जाता है। शरीर के लिए आवश्यक ये लाल रंग का तरल पदार्थ प्लाज्मा और रक्त कणों से मिलकर बनता है। ऊतकों तक ऑक्सीजन पहुँचाना, शरीर का ताप नियंत्रित रखना, पोषक तत्वों और जल का वितरण करने जैसे अति महत्व के कार्यों के साथ-साथ प्रतिरक्षात्मक कार्य भी रक्त के द्वारा किये जाते हैं। हमारे शरीर के इतने महत्वपूर्ण कार्य करने वाले रक्त के बारे में आपको ज़रूर जानना चाहिए। तो चलिए, आज बात करते हैं खून का निर्माण करने वाले पदार्थों के बारे में–

प्लाज्मा – इसे रक्त रस भी कहा जाता है। इस हल्के पीले रंग के तरल पदार्थ में 90% जल होता है और शेष 10% में प्रोटीन, फाइब्रिन तंतु, चर्बी और मैग्नीशिया जैसे आवश्यक तत्वों के अलावा लवण, ऑक्सीजन, कार्बन डाइ ऑक्साइड, नाइट्रोजन और यूरिक एसिड भी मौजूद होते हैं। प्लाज्मा या रक्त रस को खून का मूल आधार कहा जा सकता है। इसी में लाल और श्वेत रक्त कण तैरते रहते हैं।

रक्ताणु – रक्त में मौजूद गोल, लम्बे कण रक्ताणु कहलाते हैं। जब ये कण एक-दूसरे से अलग रहते हैं तो इनका रंग पीला दिखाई देता है लेकिन साथ रहने पर ये कण लाल दिखाई देते हैं। एक सामान्य व्यक्ति के खून की एक बूँद में ऐसे 50 लाख कण एक-दूसरे से चिपके रहते हैं। इन कणों में हीमोग्लोबिन होने के कारण ही इनका रंग लाल दिखाई देता है। इन कणों का महत्वपूर्ण कार्य होता है वायु की ऑक्सीजन को आकर्षित करना। अपने इसी गुण के कारण रक्ताणु रक्त रस में ऑक्सीजन को मिला पाते हैं और कार्बन डाइ ऑक्साइड और जल की अवांछित मात्रा को रक्त से अलग करते हैं।

श्वेताणु – खून में रक्ताणु के अलावा कई आकारों में मिलने वाले बड़े और सफेद कण भी मौजूद होते हैं जिन्हें श्वेताणु कहते हैं। संख्या में ये कण रक्ताणुओं से कम होते हैं। खून की एक बूँद में इनकी संख्या आठ से दस हज़ार तक होती है। इनका प्रमुख कार्य बीमारियों से शरीर की रक्षा करना होता है इसलिए बीमारी की अवस्था में इनकी संख्या बढ़ जाती है और ये कण रोगाणुओं को नष्ट करने लगते हैं। श्वेताणुओं का निश्चित संख्या से अधिक होने पर शरीर पीला और कमज़ोर होने लगता है और इनकी संख्या में कमी आने से शरीर पर बाहरी रोगाणुओं के आक्रमण बढ़ जाते हैं और जल्दी-जल्दी बीमार होने की समस्या भी इन्हीं श्वेताणुओं की कमी होने पर होती है क्योंकि श्वेताणुओं की कमी होने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है।

अब आप जान गए हैं कि खून केवल अपने लाल रंग के लिए ही नहीं जाना जाता है बल्कि शरीर को चलाने के लिए एक बेहद ज़रूरी तत्व है रक्त और खून का निर्माण कई तत्वों से मिलकर होता है यानि रक्ताणु, श्वेताणु और प्लाज्मा से मिलकर बना रक्त हमारे शरीर की सुरक्षा भी करता है और अवशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने का कार्य करने के अलावा शरीर को पोषण दिलाने में भी सहायक होता है।

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