अपेक्षाओँ के बोझ तले दब न जाएँ रिश्ते

जब दो लोग परिणय सूत्र मेँ बन्धते हैँ तो उन्हेँ कुछ जिम्मेदारियाँ व अपेक्षाएँ भी सौगात मेँ मिलती हैँ। किसी भी रिश्ते मेँ अपेक्षाएँ रखना गलत नहीँ है, लेकिन जब हमारी अपेक्षाएँ बहुत बडी हो जाती है तो उनके सामने रिश्तोँ की अहमियत कम होने लगती है। कहा भी जाता है कि हमारे दुख का वास्तविक कारण हम ही हैँ। जब हम किसी से बहुत अधिक अपेक्षाएँ रखने लगते हैँ और अगर वह पूरी नहीँ होती तो इससे हमेँ दुख होता है। कभी-कभी तो यही अपेक्षाएँ रिश्ते मेँ तनाव व लडाई का कारण बनती हैँ। इसलिए अपने जीवनसाथी से अपेक्षाएँ रखेँ लेकिन ध्यान रखेँ कि आपकी अपेक्षाओँ का बोझ इतना न हो कि आपके रिश्ते मेँ घुटन उत्पन्न हो जाए-

टटोलेँ खुद को

अपने जीवनसाथी से उम्मीदेँ करना गलत नहीँ है लेकिन आपको यह भी पता लगाना होगा कि कहीँ आपकी उम्मीदेँ इतनी बडी तो नहीँ हैँ जिसे पूरा करने मेँ आपका पार्टनर समर्थ नहीँ है। इसके लिए आपको खुद को टटोलना होगा। अगर आपकी उम्मीदेँ रिश्ते मेँ तनाव का कारण बन रही हैँ तो समझ लीजिए कि अब सम्भलने का वक्त आ गया है।

उठाएँ कदम

बदलाव की शुरूआत हमेशा खुद से ही करनी चाहिए। आपको यह समझना चाहिए कि अगर आप चाहते हैँ कि आपका जीवनसाथी आपकी इच्छाओँ की कद्र करे तो इसके लिए आपको सबसे पहले उनकी अपेक्षाओँ पर खरा उतरना होगा। किसी से उम्मीद करना बेहद आसान है लेकिन किसी की उम्मीदोँ को पूरा करने के लिए दृढ निश्चय, मेहनत व लगन की आवश्यकता होती है। यकीन मानिए जब आप अपने पार्टनर की इच्छाओँ की कद्र करने लगेंगे तो आपके रिश्ते मेँ केवल प्रेम ही प्रेम रह जाएगा। जिन्दगी की गुल्लक मेँ खुशियाँ बटोरने के लिए कुछ कदम खुद भी उठाने पडते हैँ।

न देँ ताने

अक्सर आपने पति-पत्नी को एक-दूसरे को ताने देते हुए अवश्य सुना होगा। अगर जिम्मेदारी नहीँ उठा सकते तो शादी ही क्योँ की थी या तुम्हेँ तो हमेशा अपने मायके वालोँ की ही फिक्र रहती है, कभी मेरा भी ख्याल कर लिया करो। इस प्रकार के जुमले हर कपल कभी न कभी जरूर इस्तेमाल करता है। यह ताने साफ जाहिर करते हैँ कि आप अपने पार्टनर से अपेक्षाएँ तो करते हैँ लेकिन उनकी अपेक्षाओँ पर ध्यान देना जरूरी नहीँ समझते। रिलेशनशिप मेँ ताने देने से सिर्फ तनाव ही उत्पन्न होता है। रिश्तोँ मेँ ताने नहीँ, भरपूर प्यार दीजिए।

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