-50 डिग्री तापमान में भी यहां काम करते हैं वर्कर्स

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दिसंबर माह के आगाज़ होते ही सर्दी का माहौल शुरु हो जाता है। लेकिन अगर हम आपसे कहें कि आप को माइनस 50 डिग्री में काम करना पड़े तो आप आपको कैसा लगेगा। लेकिन रूस के साइबेरिया मैं कुपोल नामक एक माइन है जिसमें मजदूर -50 डिग्री तापमान में भी काम करते हैं। यह दुनिया की सबसे मुश्किल जगहों में से एक है यहां का सामान्यतः तापमान माइनस 35 डिग्री सेल्सियस रहता है। इस माइन में करीबन 1200 वर्कर काम करते हैं तो चलिए इसके बारे में विस्तारपूर्वक जानते हैं।

आपको बता दें कि यह एक सोने की माइन है और 1940 में पहली बार यहां से सोना निकाला गया था। लेकिन पूर्ण रुप से इस माइन को क्रियान्वित 2008 में किया गया। इस माइन से गोल्ड और सिल्वर जैसे कई कीमती मेटल निकाले जाते हैं। यहां पर करीबन 12 लोगों का स्टाफ है जो लगातार 12 – 12 घंटे की शिफ्ट से काम करते हैं।

काम का यह सिलसिला 2 महीने के लिए ही चलता है इसके बाद इन सभी वर्कर्स को रेस्ट के लिए 2 महीने की छुट्टी मिलती है और उसके बाद फिर इन्हें 2 महीने के लिए काम पर लौटना पड़ता है। लेकिन आश्चर्यचकित कर देने वाली बात यह है कि भले ही माइनस में कम टेंपरेचर में काम करवाया जा रहा हो लेकिन इन सभी वर्कर्स के पास सारी फर्टिलिटी मौजूद है। यहां पर इन लोगों को कैफ़े, इंटरनेट, जिम जैसी कई लग्जरी सुविधाएं दी जाती है। इसके अलावा परसनल इंजॉयमेंट के लिए टीवी के साथ टेबल टेनिस बिलियर्ड्स जैसे गेम खेलने का भी मजा दिया जाता है।

इस जगह पर काम करने वाले 1200 वर्कर्स को खाने का इंतजाम करवाना बहुत ही बड़ा चैलेंज है इसके लिए पूरी प्लानिंग दो साल पहले ही की जाती है और करीबन 200 मील दूर से या खाना इस जगह पर पहुंचाया जाता है।

खराब मौसम के चलते सिर्फ जनवरी और अप्रैल में ही यहां पर खाना पहुंचाने के लिए इस रस्ते का इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से यहां पर फूड सप्लाई एडवांस में रखी जाती है यहां पर एक हाइड्रोपोनिक ग्रीनहाउस भी है जिसके जरिए वर्कर्स हेल्दी बैलेंस डाइट फूड का लुत्फ उठाते हैं।

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