रिटायरमेंट प्लान में निवेश के सबसे बेहतर तरीके

पिछले अंक में हमने जाना कि रिटायरमेंट प्लानिंग क्यों ज़रूरी होती है और क्यों करनी चाहिये। आज हम जानने की कोशिश करेंगें कि रिटायरमेंट प्लानिंग के लिये निवेश कहाँ पर किया जाये। रिटायरमेंट प्लानिंग के लिये निवेश के कई सारे विकल्प हैं। जैसे किसी भी इंश्योरेंस कंपनी से पेंशन या रिटायरमेंट प्लान ले लेना, म्यूच्यूअल फंड्स में रिटायरमेंट स्कीम में पैसा लगाना, एनपीएस में पैसा लगाना, प्रॉपर्टी खरीद कर किराये पर चढ़ा देना, बैंक – पोस्ट ऑफिस में आरडी आदि कर देना।

किसी भी इंश्योरेंस कंपनी के रिटायरमेंट प्लान या पेंशन प्लान का सबसे बड़ा नुकसान ये है कि इसमें जो भी पेंशन मिलेगी वो पूरी की पूरी टैक्सेबल होगी यानि कि आपकी इनकम में जुड़ेगी व दूसरा नुकसान ये है कि किसी भी परिस्थिति में मैच्यूरिटी पर निवेशक 33.33% से ज्यादा लम्पसम विड्रॉल नहीं कर सकते।

मतलब सीधा सा यह है कि निवेशक अपनी टैक्स चुकाकर बचायी गयी रकम इंश्योरेंस कंपनी में पेंशन या रिटायरमेंट प्लान में लगायेगा तो सारी ग्रोथ (33.3% के अलावा) पर जो पेंशन मिलेगी उस पर दुबारा टैक्स देगा। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि ये बहुत ही बेवकूफी भरा प्लान है। निवेशकों को किसी भी हालत में किसी भी इंश्योरेंस कंपनी में रिटायरमेंट प्लान में पैसा नहीं लगाना चाहिये। टैक्स के अलावा इसमें रिटर्न्स भी बहुत कम आते हैं। ट्रेडिशनल पेंशन प्लान में 4-5.5% व यूएलईपी में 7-10% रिटर्न आता है। सो इससे बचना चाहिये।

यही हालत एनपीएस की है। इसमें 40% (33.3% की जगह) ही पैसा एक साथ निकाल सकते हैं, बाकी पैसों की पेंशन ही लेनी होगी वो भी टैक्सेबल। हाँ इसमें इनकम टैक्स की 50,000/- की एक्स्ट्रा सेविंग है और रिटर्न भी इंश्योरेंस कंपनी के मुकाबले कुछ बेहतर – (8-12%) आने की संभावना रहती है। बुद्धिमान व एक्सपर्ट निवेशक को इससे भी बचना चाहिये।

बाकी पीपीएफ – आरडी वगैरह में भी काफी नुकसान है। पीपीएफ में इंटरेस्ट रेट धीरे धीरे कम होती जा रही है। आरडी में ब्याज बहुत ही कम रह गया है।

कुछ निवेशक रेंटल इनकम को भी रिटायरमेंट का विकल्प सोचते हैं। मेरी नज़र में यह फुलप्रूफ तरीका नहीं है। किसी भी वजह से मकान मालिक व किरायेदार का झगड़ा होने की स्थिती में अगर किराया नहीं आ रहा है तो सारी प्लानिंग खराब हो जाती है।

उपर्युक्त सारे विकल्पों पर विचार करने के बाद मेरा यह स्पष्ट मानना है कि रिटायरमेंट प्लानिंग का बेस्ट तरीका केवल म्यूच्यूअल फण्ड है। 2 – 3 कंपनी में बहुत अच्छे रिटायरमेंट प्लान्स आये हैं जिसमें निवेशक पिछले 5 साल की रकम को छोड़कर (चूंकि 5 ईयर लॉक-इन होता है) पूरी रकम एक साथ निकाल सकता है। इस बजट से पहले सारी पेंशन 100% टैक्स फ्री थी, अब 1,00,000 तक प्रति वर्ष टैक्स फ्री है। उसके बाद निवेशक किसी भी स्लैब में हो केवल 10% टैक्स देना होगा। रिटर्न भी बहुत अच्छे आने की पूरी संभावनी रहती है। निवेशक के पास निवेश के 2-3 विकल्प चुनने की स्वतंत्रता रहती है। निवेशक चाहे तो 25% इक्विटी व 75% डेब्ट या 65% इक्विटी व 35% डेब्ट कोई भी विकल्प चुन सकता है और समय समय पर अपने फाइनेंशियल डॉक्टर की राय से विकल्प बदल भी सकता है।

मेरा मानना है कि म्यूच्यूअल फंड्स में 65% इक्विटी 35% डेब्ट फंड्स में निवेशक बहुत आसानी से 12% – 15% रिटर्न कमा सकता है। यह बहुत ही लचीला प्लान है। मेरी राय में निवेशक को जितना जल्दी हो रिटायरमेंट प्लान में एसआईपी शुरू कर देनी चाहिये। खास बात यह है कि निवेशक कभी भी अपनी एसआईपी की रकम कम-ज्यादा कर सकता है। अच्छे रिटर्न्स के लिये निवेशक को हर वर्ष (बर्थडे, मैरिज एनिवर्सरी आदि पर) टॉप-अप ज़रूर करना चाहिये। हर व्यक्ति को अपना व अपने जीवनसाथी का रिटायरमेंट प्लान अवश्य हर हालत में लेना चाहिये तभी बुढ़ापे में फाइनेंशियल सेफ्टी व सिक्योरिटी बनी रहेगी। अगले अंक में हम बच्चों के उच्च शिक्षा की प्लानिंग के बारे में विस्तार से जानेंगें।

ये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

“रिटायरमेंट प्लानिंग क्या है और क्यों जरूरी है?”

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