सालूमरदा थिमक्का ने अकेले ही लगा दिए 384 पेड़

वो कहते है ना की अगर इंसान ठान ले तो वो पर्वत भी हिला सकता है कुछ ऐसा ही कर दिखाया है सालूमरदा थिमक्का ने। रामनगर जिले में हुलुकल और कुडूर के बीच की दूरी में सालूमरदा थिमक्का ने करीब 384 पेड़ बो दिए है इतना ही नहीं वो इन पेड़ों को अपने बच्चों की तरह प्यार भी करती है।

मज़दूरी कर अपना घर चलाने वाली सालूमरदा थिमक्का ने बरगद के पेड़ लगाने की शुरुआत अपना अकेलापन दूर करने के लिए की थी मगर धीरे धीरे यह एक जूनून में परिवर्तित हो गया जिसका परिणाम आप सभी के सामने है।

यह सभी पेड़ मानसून के समय में बोये गए थे ताकि पानी की ज़्यादा किल्लत का सामना ना करना पड़े। अब इन सभी पेड़ों की देखभाल कर्नाटक सरकार कर रही है। प्रकृती के प्रति उनका यह प्रेम देख कर उनका नाम सालूमरदा रख दिया गया जिसका कन्नड़ भाषा में अर्थ होता है वृक्षों की पंक्ति।

उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया है उनके जज़्बे से हम सभी को सीख लेनी चाहिए क्योँकि प्रकर्ति से ही हम अपने भविष्य को सुरक्षित रख सकते है।