जानिए सावन माह में क्यों मना है शराब और मांस का सेवन

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सावन का महीना साल का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। सावन के महीने में कुछ ख़ास नियमों का पालन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। ऐसे ही कुछ नियमों में से हैं की इस महीने में मांस और शराब का सेवन नहीं करना चाहिए। यूँ तो शराब का सेवन करना किसी भी समय उचित नहीं है लेकिन खासतौर पर सावन के महीने में ऐसे नशीले पदार्थ और मांसाहार का सेवन निषेध माना गया है। लेकिन क्या आपको इसके पीछे के असली कारणों का पता है ? आइये आज आपको इसके पीछे के धार्मिक और वैज्ञानिक कारणों के बारे में बताते हैं की आखिर क्यों इस महीने में शराब और मांसाहार का सेवन उचित नहीं माना गया है।

धार्मिक कारण
यूँ तो हिन्दू धर्म में शराब और मांसाहार का सेवन निषेध माना गया है और सावन के महीने को सबसे पवित्र महीना माना गया है ऐसे में इस महीने में शराब और मांसाहार का सेवन धर्म भ्रष्ट करने के बराबर माना जाता है। इसके अलावा सावन के महीने में हर दिन किसी ना किसी देवी-देवता की आराधना करने के लिए ख़ास होता है और ऐसे में मांस और शराब आदि का सेवन धार्मिक रूप से उचित नहीं माना जाता।

इसके अलावा मांसाहार के लिए जीव की हत्या की जाती है जो कि हिन्दू धर्म में पाप माना जाता है और यही कारण है की ऐसा माना जाता है की इस महीने में मांसाहार को छोड़कर पाप से बचना चाहिए। इसका दूसरा तर्क ये भी है की सावन का मौसम कई जानवरों के प्रजनन का समय होता है और गर्भित पशु को मारना एक पाप है इसलिए मांसाहार का सेवन कर इस पाप का भागीदार नहीं बनना चाहिए।

वैज्ञानिक कारण
अगर शराब के सेवन ना करने के वैज्ञानिक कारण की बात की जाये तो शराब का सेवन स्वस्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। वहीँ अगर मांसाहार के सेवन ना करने के पीछे के वैज्ञानिक कारणों के बारे में बात करें तो सावन का महीना बारिश का महीना होता है और ऐसे में ज्यादातर समय आसमान में बादल छाए रहते हैं और इस कारण हमे पूरी तरह सूर्य की रौशनी नहीं मिलती जिससे हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसे में अगर मांसाहार का सेवन किया जाये तो उसे पचाने में हमारे पेट को काफी समय लगता और और आसानी से नहीं पचता जिससे कई तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियां हो सकती है। इसके अलावा बारिश के मौसम में जानवरों में कई तरह के संक्रामक रोग लग जाते हैं और ऐसे जीवों का मांस खाने से हम बीमार पड़ सकते हैं।

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