समानांतर ब्रह्माण्ड क्या है?

सदियों से मानव जाति में ये धारणा बनी रही कि इस विशाल और विस्तृत ब्रह्माण्ड में केवल पृथ्वी ही ऐसा ग्रह है जिस पर जीवन संभव है लेकिन बीते कुछ सालों में अंतरिक्ष के रहस्यों से जुड़ी जो खोजें हुयी हैं उन्होंने इस धारणा को बदल कर रख दिया कि सिर्फ पृथ्वी पर ही जीवन संभव हो सकता है। समानांतर ब्रह्माण्ड के सिद्धांत ने इस बात की ओर ध्यान आकर्षित किया है कि पृथ्वी जैसे कई ग्रह इस ब्रह्माण्ड में मौजूद हैं जहाँ पृथ्वी की ही तरह समुद्र है, जीव जंतु हैं और हमारे जैसे इंसान भी मौजूद हैं जो हमारे हूबहू प्रतिरूप होते हैं। अब सवाल ये उठता है कि ये समानांतर ब्रह्माण्ड कहाँ है?

मल्टीवर्स सिद्धांत के अनुसार हमारे ब्रह्माण्ड जैसे कई ब्रह्माण्ड मौजूद हैं लेकिन बहुत दूरी पर होने के कारण हम उन्हें देख नहीं पाते हैं। इन ब्रह्माण्डों को समानांतर ब्रह्माण्ड कहा जाता है। इस समानांतर ब्रह्माण्ड का विचार सिर्फ एक कल्पना नहीं है बल्कि वैज्ञानिकों द्वारा बहुत से सिद्धांतों के गहन अध्ययन के बाद ये सम्भावना व्यक्त की है कि समानांतर ब्रह्माण्ड हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों ने इस ब्रह्माण्ड के 4 लेवल बताये हैं-

पहला लेवल – अभी तक ये बात स्पष्ट नहीं है कि स्पेस टाइम का आकार कैसा है लेकिन एक थ्योरी के अनुसार इसका आकार चपटा है और ये अनंत है और हो सकता है कि ये कहीं ना कहीं खुद का दोहराव भी कर रहा हो। अगर वाकई ऐसा है तो समानांतर ब्रह्माण्ड के विचार को ग़लत नहीं कहा जा सकता और इस बात की सम्भावना भी बनी रहती है कि हमारे ब्रह्माण्ड की बहुत सी चीज़ों जैसे आकाशगंगा, सूर्य और शायद मानव के प्रतिरूप भी उन दूसरे ब्रह्माण्डों में मौजूद हों।

दूसरा लेवल – Eternal Inflation theory के अनुसार, सभी ब्रह्माण्ड एक बुलबुले के अंदर हैं और ये आपस में जुड़कर या अलग होकर एक नए ब्रह्माण्ड का निर्माण करते हैं।

तीसरा लेवल – Quantum Physics की थ्योरी के अनुसार, समानांतर ब्रह्माण्ड हमारी दुनिया में ही मौजूद हैं लेकिन हम उसे देख नहीं पाते क्योंकि वो दूसरे आयाम में मौजूद है।

चौथा लेवल – Mathematical Democracy Principle के अनुसार, हर ब्रह्माण्ड के अलग-अलग गणित हो सकते हैं लेकिन गणित के अस्तित्व के लिए ये जरुरी नहीं है कि मानव का अस्तित्व भी मौजूद हो।

भले ही अभी तक समानांतर ब्रह्माण्ड से जुड़े कोई ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं लेकिन वैज्ञानिकों के प्रयास लगातार जारी हैं और उम्मीद है कि बहुत जल्द हमें ऐसे समानांतर ब्रह्माण्डों के बारे में जानकारी मिल जाएगी जिनमें हमारे प्रतिरूप भी मौजूद हों।

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