सम्मोहन क्या होता है और इससे दूसरों को अपने वश में कैसे किया जाता है?

सम्मोहन का नाम सुनते ही आपके मन में भी रोमांच और रहस्य जैसे भाव आये होंगे। हो सकता है कि आपने इसका अनुभव कभी किया हो या फिर किसी और को ऐसा करते हुए देखा हो। आपने फिल्मों के ज़रिये भी सम्मोहन को जाना होगा लेकिन अभी तक ये जानना बाकी है कि ये सम्मोहन होता क्या है? ऐसे में क्यों ना आज, इस सम्मोहन के बारे में बात की जाये। तो चलिए, आज जानते हैं सम्मोहन के बारे में –

Hypnosis/Hypnotism एक ग्रीक शब्द है जिसका अर्थ है सोना। जेम्स ब्रैड नामक वैज्ञानिक ने 1840 में इस शब्द का प्रयोग करके समझाया कि कैसे कुछ समय के लिए हम नेचुरल तरीके से अपने अवचेतन मन को खोल सकते हैं।

हिप्नॉटिज़्म हमारी चेतना की ऐसी अवस्था है जिसमें सम्मोहित व्यक्ति का पूरा ध्यान एक जगह पर केंद्रित हो जाता है और अपने आसपास की गतिविधियों के प्रति उसकी जागरूकता कम हो जाती है। इस समय सम्मोहित व्यक्ति सम्मोहनकर्ता के प्रभाव में आ जाता है और उसके दिए निर्देशों का पालन करने लगता है।

ये कहा जा सकता है कि इसके द्वारा एक इंसान दूसरे इंसान को नियंत्रित कर लेता है। सम्मोहन में दो दिमागों के विचार आपस में जुड़ते हैं।

हिप्नॉटिज़्म का अपना विज्ञान भी है जिसके अनुसार हर इंसान की अपनी माइंड फ्रीक्वेंसी होती है और जब ये किसी दूसरे व्यक्ति की माइंड फ्रीक्वेंसी से मिलती है तो हम दूसरे व्यक्ति के मन के विचार पढ़ सकते हैं। इस विधा में सबसे पहले शांत दिमाग द्वारा सामने वाले व्यक्ति की फ्रीक्वेंसी को पढ़ा जाता है। उसके बाद विशेष भावनाओं द्वारा उस व्यक्ति को अपने कण्ट्रोल में किया जाता है।

एक सफल सम्मोहन के लिए सम्मोहनकर्ता और सम्मोहित व्यक्ति के बीच संबंधों में विश्वास होना ज़रूरी है तभी सम्मोहन संभव हो सकेगा।

आइये अब जानते हैं सम्मोहन के स्तर –

साधारण सम्मोहन – इस तरह के सम्मोहन में व्यक्ति सामान्य स्तर पर ही प्रभाव में आता है। इसमें वह उन्हीं बातों को मानता है जो उसके अनुकूल होती है। उसके विचारों और मान्यतों के विपरीत कही गयी बात को सम्मोहित व्यक्ति नहीं मानता है।

दूसरे स्तर का सम्मोहन – सम्मोहन के इस स्तर पर, सम्मोहित व्यक्ति बताये अनुसार काम करने लगता है लेकिन इस स्तर पर भी सम्मोहित व्यक्ति सारी बातें नहीं मानता है।

तीसरे स्तर का सम्मोहन – इस अवस्था में सम्मोहित व्यक्ति पूरी तरह से सम्मोहनकर्ता के वश में आ जाता है और इस समय दिया गया हर निर्देश सम्मोहित व्यक्ति द्वारा स्वीकारा जाता है। इस स्तर पर सम्मोहित व्यक्ति के मन में बहुत सी बातों को डाला जा सकता है।

प्राचीन समय में हिप्नॉटिज़्म का प्रयोग दर्द को दूर करने में किया जाता था। युद्ध के दौरान सैनिकों के ज़ख़्मी हाथ-पैर काटने से पहले सर्जन उन्हें सम्मोहित किया करते थे ताकि उन्हें दर्द का अहसास ना हो।

हिप्नॉटिज़्म के उपयोग –

  • इसके ज़रिये मानव मस्तिष्क की अनंत क्षमताओं को बाहर लाया जा सकता है।
  • मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में मनचाहा बदलाव किया जा सकता है।
  • याद्दाश्त चले जाने की स्थिति में, हमारी मेमोरी अवचेतन मस्तिष्क के किसी कोने में रहती है। इसे वापिस लाने के लिए सम्मोहन की मदद ली जा सकती है।
  • जटिल ऑपरेशन को सरल बनाया जा सकता है।
  • व्यक्तित्व में बेहतर बदलाव और सुधार किये जा सकते हैं।
  • अच्छी आदतें अपनायी जा सकती हैं।
  • आजकल सम्मोहन का इस्तेमाल सायकोलॉजिस्ट्स द्वारा किया जाता है। ऐसा करके मरीज के दिमाग से डर और घबराहट को दूर किया जाता है।

दोस्तों, हिप्नॉटिज़्म एक विद्या है जिसका सही तरीके से, सही जगह पर इस्तेमाल किया जाए तो बहुत सी तकलीफें दूर की जा सकती है लेकिन इसका दुरुपयोग करने पर सम्मोहित व्यक्ति को हानि भी पहुंचाई जा सकती है।

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