संघर्ष ही सफलता की कुंजी है

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संघर्ष! यह एक ऐसा अनुभव है जिससे शायद ही दुनिया का कोई व्यक्ति वंचित हो। हमें बचपन से सिखाया जाता हैं कुछ भी पाने के लिए संघर्ष करना ही पड़ता है। बिना संघर्ष के कभी कुछ हासिल नहीं होता। समाज में प्रतिष्ठा, नाम-शोहरत, रुपया-पैसा, तरक्की या फिर पढ़ाई में अव्वल होना हो, चाहे जो भी लक्ष्य हो उसे प्राप्त करना बिना संघर्ष के संभव नहीं। इसमें कोई दोराह नहीं की संघर्ष जीवन को तराशता है, निखारता है, सँवारता है और फिर हमें ऐसे साँचे में गढ़ता है जिसकी प्रसिद्धि दुनिया करते नहीं थकती। शायद यही वो मुकाम होता है जिसके लिए मनुष्य अथक प्रयास करते जाता है जिसे हम संघर्ष कहते हैं। संघर्ष के पश्चात जो सफलता प्राप्त होती है निसंदेह वो अतुलनीय होती हैं। संघर्ष जीवन के उतार-चढ़ाव का अनुभव कराता है, अच्छे-बुरे का ज्ञान करवाता हैं, सतत सक्रिय रहना सिखाता है, समय की कीमत सिखाता है जिससे प्रेरित होकर हम सशक्तिकरण के साथ फिर से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित होते है और जीवन जीने के सही तरीके को सीखते हैं।

दुनिया का हर व्यक्ति जीवन में सफलता की उम्मीद करता हैं जिसके लिए वो अथक प्रयास भी करता है। कई बार कुछ अलग करने की चाह और प्रबल प्रेरणा से व्यक्ति अपने मुकाम के करीब पहुँच भी जाता है लेकिन कुछ कठिन संघर्ष को सामने देख सफलता से वंचित हो जाता है। वे नहीं जान पाते की उनके साथ ऐसा क्यों होता है जिस कारण उनके सपने अधूरे रह जाते है और जीवन के अंतिम पलों तक उनकी इच्छाएँ आधी-अधूरी रह जाती है। ऐसी इच्छाएँ उन्हें अपने जीवन से निराश करती है क्योंकि अधिकांश लोग अपने संपूर्ण जीवन में यह जान ही नहीं पाते की सफलता कैसे हासिल हो।

दोस्तो! जीवन ‘संघर्ष’ का दूसरा नाम हैं। एक बात हमेशा याद रखिए, अपनी मंजिल का आधा रास्ता तय करने के बाद पीछे ना देखे बल्कि पूरे जुनून और विश्वास के साथ बाकी की आधी दूरी तय करे, बीच रास्ते से लौटने का कोई फायदा नहीं क्योंकि लौटने पर आपको उतनी ही दूरी तय करनी पड़ेगी जितनी दूरी तय करने पर आप लक्ष्य तक पहुँच सकते है। आगे बढ़कर भी अगर सफलता ना मिल पाई तो भी कोई बात नहीं कम से कम अनुभव तो नया होगा। बार-बार हार के भी हिम्मत के साथ अपने टारगेट की तरफ कदम बढ़ाना ही संघर्ष है। अपनी हर असफलता से कुछ सीखिए और निडरता के साथ संघर्ष का दामन थाम के मंजिल की ओर आगे बढ़िए। जब तक जीवन में संघर्ष नहीं होता तब तक जीवन जीने के अंदाज को, सच्ची खुशी को, आनंद को, सफलता को अनुभव भी नहीं कर सकते। जिस तरह बिना चोट के पत्थर भी भगवान नहीं होता। ठीक उसी तरह मनुष्य का जीवन भी संघर्ष की तपिश के बिना ना तो निखार सकता है, ना शिखर तक पहुँच सकता है और ना ही मनोवांछित सफलता पा सकता है।

क्योंकि ”संघर्ष हमारे जीवन का सबसे बड़ा वरदान है और वो हमें सहनशील, संवेदनशील और देवतुल्य बनाता हैं।”
संघर्ष के इस सूत्र को समझिए और उसपर चलने की कोशिश कीजिए। यकीन मानिए आप जीवन को एक अलग रूप से देखने लगेंगे।
”इच्छाशक्ति + स्थिरता = संकल्प, संकल्प + कड़ी मेहनत (संघर्ष) = सफलता”

आप सोच रहे होंगे यह सब पढ़ना या लिखना बहुत आसान है लेकिन करना बहुत ही मुश्किल!! दोस्तों, जीवन कभी भी आसान नहीं होता। सरलता व सहजता से कभी किसी को कुछ हासिल नहीं हुआ। इतिहास गवाह है इस बात का आज भी लोग महान और सफल लोगों को उनके संघर्ष से उन्हें याद करते है। संघर्ष से डर के जीवन में अपने कदमों को पीछे मत कीजिए। आज का संघर्ष आपके कल को सुरक्षित करता है। आप जिस तरह का संघर्ष करते है भाग्य भी उसी के अनुरूप फल देता है। यह सत्य है जीवन में कई बार बुनियादी, सामाजिक, पारिवारिक आदि समस्याएँ आ जाती है तब लक्ष्य के प्रति संघर्ष की इच्छाशक्ति को बनाए रखना मुश्किल हो जाता है क्योंकि ऐसी परिस्थिति में जीवन का संघर्ष कई गुणा बढ़ जाता है। लेकिन ऐसी स्थिति में भी सकारात्मक सोच वाला व्यक्ति अपनी आंतरिक इच्छाशक्ति की ताकत और शारीरिक व मानसिक क्षमता के बल पर किसी भी संघर्ष से जूझ सकता है बस उसमें अपने लक्ष्य के प्रति ललक होनी चाहिए। क्योंकि ”जितना कठिन संघर्ष होगा, जीत भी उतनी ही शानदार होगी।”

दोस्तों, इन लघु कथा से यह समझने की कोशिश करे की संघर्ष के रूप में ईश्वर हमें किस तरह से चमकाता है।

संघर्ष ही प्रकृति का नियम है –

एक छोटा बच्चा पेड़ पर एक तितली के खोल को देखता है। बच्चे को तितली पर दया आ रही थी क्योंकि तितली खोल से बाहर आने के लिए बार-बार संघर्ष कर रही थी। बच्चे ने तितली की मदद करने की सोचकर उस खोल को तोड़ दिया और तितली को बाहर निकाल दिया। लेकिन तितली कुछ देर में ही मर गयी।

बच्चा उदास हो गया और समझ नहीं पा रहा था कि तितली कैसे मर गयी और उसने अपनी माँ को सारी बात बताई। माँ ने कहा – “संघर्ष ही प्रकृति का नियम है और कोकून से निकलने के लिए तितली को जो संघर्ष करना पड़ता है उससे उसके पंखों और शरीर को मजबूती मिलती है। बेटा तुमने तितली की मदद करके उसे संघर्ष करने का मौका नहीं दिया जिससे उसकी मृत्यु हो गई।”

संघर्ष ही जीवन है –

जिराफ के बच्चे का जब जन्म होता है तो वह माँ के गर्भ से 10 फीट की ऊंचाई से पीठ के बल गिरता है। उँचाई से गिरने के कारण उसमें उठकर खड़े होने की शक्ति लुप्त हो जाती है। लेकिन उसकी माँ उसे बार-बार जोर-जोर से लातें मारती है और वह बच्चा तब तक लातें खाता रहता है जब तक कि वह उठकर खड़ा नहीं हो जाता और इतने संघर्ष के बाद कुछ देर में वह बच्चा लड़खड़ाते हुए उठ कर खड़ा हो जाता है।

अगर जिराफ़ के बच्चे को अपनी माँ की लाते खाने को न मिले तो वह खड़े होने से पहले ही किसी शिकारी जानवर के पेट में पहुँच जाता।

तितली और जिराफ की तरह संसार के हर प्राणी को संघर्षो का सामना करना पड़ता है। जो व्यक्ति प्रकृति के इस नियम को समझ जाता है वह जीवन में सफल हो जाता है, क्योंकि सफलता का सफर असफलता से शुरू होता है। इसलिए असफलता को चुनौती समझकर स्वीकार करे और दुगनी ताकत के साथ असफलता को सफलता में बदलने का अथक प्रयास करते रहे। जो असफलता से डर जाता है वह कभी संघर्ष नहीं कर सकता।

प्रकृति ने संघर्ष की प्रक्रिया को इसलिए ही इतना कठिन बनाया है क्योंकि बिना कठिन परिश्रम और संघर्ष के हम उतने मजबूत कभी नहीं बन सकते जितनी हमारी क्षमता है। अगर बिना जतन और संघर्ष के ही सब कुछ मिल जाए तो क्या हम अपंग का जीवन जीना पसंद करेंगे? शायद नहीं!! जिन लोगों को विरासत में सब कुछ मिलता है उन लोगों को भी इस विरासत को सहेज कर रखने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। विरासत बनाने के लिए किसी पीढ़ी ने तो संघर्ष किया होता है। हमने यह बात आगे भी कही है आपका आज का संघर्ष आपके कल को यानी आपके बाद की पीढ़ी को सुरक्षित करता है। इसलिए जीवन के कठिन पलों को सकारात्मक दृष्टिकोण से देखिए, फिर आपको जीवन की उड़ान कितनी सरल, सफल व सहज नजर आएगी। आप कुछ ऐसा सीख जाएँगे की दुनिया को मिसाल की तौर पर सिखा जाएँगे।

दोस्तों, जीवन हमारा है तो निश्चित तौर पर संघर्ष भी हमारा ही होगा इसलिए कोशिश करे संघर्ष से हारकर कभी किसी की मदद ना लेनी पड़े। मदद इंसान को दूसरों पर आश्रित कर देती है। स्वयं की सोच और विश्वास पर अंकुश का ताला लगा देती है। आश्रित व्यक्ति का कोई अपना वजूद नहीं होता। स्वयं के प्रयासों से सफलता को प्राप्त कीजिए फिर महसूस कीजिए संघर्ष क्यों जरूरी था। अगर एक बार संघर्ष के दौरान सहायता की लत लग गई तो आप हमेशा सहारा ही खोजेंगे। यह कभी ना भूले सफलता की सीढ़ी संघर्ष से होकर गुजरती है सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मदद इतनी ही जरूरी है तो फिर तितली क्यों मर गई? जिराफ के बच्चे को उसकी माँ मदद करने की बजाय क्यों मारती है? अगर तितली और जिराफ की मदद की जाती है तो वो जीवन भर के लिए अपंग हो जाएँगे या मर जाएँगे। ठीक इसी तरह अन्य की सहायता से हम भी अपाहिज महसूस करने लग जाते है। यह कहावत गलत नहीं की संघर्ष के बाद मिली सफलता अधिक टिकाऊ होती है। कही आप अपनों को अपाहिज तो नहीं कर रहे उनके संघर्ष में उनकी मदद करके। मदद कीजिए अपना साथ देके, अपना विश्वास दिखा के, उनका हौसला बढ़ा के और जब सही समय आए तब अपने तरीके से उनकी मदद कीजिए। आप देखेंगे इस दौरान आपके अपने भी उतनी ही मजबूती से खड़े है जीतने की आप। संघर्ष आपको और आपके अपनों को जीना सिखाता है, जीवन के कई रंग दिखाता है, कठिनाइयों से पार पाना सिखाता है, अनुभवी बनाता है और सबसे जरूरी जमीन से जुड़े रहना सिखाता है।

दोस्तों, जीवन में कुछ ठान लो तो जीत है और मान लो तो हार है। अगर आप चाहते है की समाज आपको एक आदर्श उदाहरण के रूप में याद रखे तो आपको आज और अभी से यह अमल करना होगा की सफलता की इमारत संघर्ष की नींव पर टिकी होती है। महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण अगर पांडवों की मदद करते तो क्या आज हम पांडवों को याद रखते, शायद नहीं!! जबकि श्री कृष्ण चाहते तो पांडवों की मदद कर उन्हें जीवन में कोई संघर्ष करने ही नहीं देते। जीवन में सफलता उसी को मिलती है जिसने संघर्षो से जूझना सीखा है। भगवान श्री कृष्ण ने भी गीता में कहा है – “जीवन एक संघर्ष है एंव इसका सामना प्रत्येक व्यक्ति को करना पड़ता है। ”

दोस्तों, जीवन एक बार मिलता है बार-बार नहीं। कई लोग अपने इस जीवन में सफलता के झंडे गाड़ देते है तो कइयों का अपना कोई वजूद ही नहीं होता। आप स्वयं तय कीजिए आपको कैसा जीवन जीना है एक सफल और संघर्षशील व्यक्ति की तरह का या एक चलती भीड़ का हिस्सा बनना है। मंजिल आपकी है तो चुनाव भी आपका ही होगा। एक सलाह है – कुएं के मेढक की तरह का जीवन कभी ना चुने जो पूरी जिंदगी कुएं में बिना उफ के गुजार देता है और इस दुनिया से चला जाता है। आपका जीवन आपका है सपने देखिए, स्वयं की परवाह करे और दृढ़ संकल्प व संघर्ष के साथ अपने सपनों को साकार कीजिए। आपकी खुशी ही संघर्ष की जीत है। अगर आपके जीवन में कोई संघर्ष नहीं है तो समझ लीजिए की कोई प्रगती भी नहीं हैं।

“अधिकतर लोग ठीक उसी समय हार मान लेते है, जब सफलता उन्हें मिलने वाली होती है। विजय रेखा बस एक कदम दूर होती है, तभी वे कोशिश करना बंद कर देते है। वे खेल के मैदान से अंतिम मिनट में हट जाते है, जबकि उस समय जीत का निशान उनसे केवल एक फुट के फासले पर होता है।” क्योंकि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती। – एच रोस पेरोट

”जिस संघर्ष में आज आप हैं वो आपके कल के लिए ताकत विकसित कर रहा है।” – रॉबर्ट टयू

जीवन – यह एक विकल्प है यह आपका जीवन है। बुद्धिमानी से चुनिए, सोच समझकर और ईमानदारी से चुने। अपनी खुशियों का भी चयन करे। आपको हमारा आर्टिकल कैसा लगा? अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें। आशा करते है यह लेख आपका मार्गदर्शन करेगा। इसी विचार के साथ हमारी शुभकामनाए आपके साथ है। स्वस्थ रहे, खुश रहे।

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