सेंधा नमक क्या है?

आइये जानते हैं सेंधा नमक क्या है। यह नमक सबसे शुद्ध और प्राकृतिक नमक है। प्राकृतिक होने के कारण इसमें ना तो कोई मिलावट होती है और ना ही कोई रसायन का इस्तेमाल। इसका रसायनिक नाम हैलाईट सोडियम क्लोराइड है। यह दिखने में चिकने खनिज क्रिस्टल पत्थर की तरह होता है बिल्कुल पारदर्शी।

इसमें कई पोषक तत्व पाए जाते है जो शरीर की अनिवार्यता है जैसे लोहा, कैल्शियम, पोटेशियम, जिन्क, फास्फोरस, कैल्शियम, मैग्नीशियम, जस्ता, सेलेनियम, तांबा, ब्रोमिन, ज़िरकोनीयम और आयोडीन की उच्च मात्रा इसमें पाई जाती है इसके अलावा और भी कई पोष्टिक गुण इस नमक में छिपे है।

इसे सिन्धलुन, लाहोरी नमक जैसे कई अलग-अलग नामों से जाना जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दे 1930 से पहले भारत में सिर्फ प्राकृतिक नमक का ही भोजन में प्रयोग होता था।

सेंधा नमक की क्या पहचान है?

आमतौर पर सफेद या हल्का गुलाबी रंग ही इसकी सही पहचान है। कभी-कभी अन्य पदार्थो की मौजूदगी में इसका रंग बैगनी, गहरा लाल, गहरा नीला, भूरा, गहरा काला, पीला या नारंगी आदि रंगो का हो जाता है लेकिन इन रंगों को खराब तरह का सेंधा नमक माना जाता है।

सोडियम क्लोराइड इसका मुख्य घटक है। आयुर्वेद की माने तो सफेद सेंधा नमक का कोई तोड़ नहीं। कहने का अर्थ यह है इस नमक को स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे उत्तम माना गया है।

सेंधा नमक के प्रकार

यह मुख्यता दो तरह का होता है। एक सफेद सैंधवा और दूसरा रक्त सैंधवा यानी हल्के लाल रंग का। यह दोनों ही सेंधा नमक की श्रेणी में आते है। आयुर्वेद में इनका प्रयोग दवा के रूप में होता है। इसलिए स्वास्थ्य के लिए भी यह बहुत फायदेमंद है।

हमारी प्राचीन चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के अनुसार काला नमक भी सेंधा नमक का ही एक प्रकार है। जिसे सफेद सेंधा नमक के बाद सबसे उत्तम माना जाता है। इसलिए आप कोई भी नमक का चयन कर सकते है।

सेंधा नमक कैसे बनता है और कहाँ पाया जाता है?

सेंधा नमक बनाया नहीं जाता बल्कि यह प्राकृतिक रूप से पहले से ही बना बनाया पाया जाता है। यह एक तरह का खनिज है जो उच्चकोटी के नेचुरल खनिज से निकाला जाता है। इस नमक की कटाई पहाड़ों और सुरंगों से होती है। इसके छोटे और मध्यम आकार के टुकड़े काटकर निकाले जाते है फिर इन्हें कुचलकर बारीक या दानेदार बनाया जाता है।

जिसे हम अपनी रसोई में व्रत-उपवास के दिन उपयोग में लाते है। जबकि आयुर्वेद की सलाह अनुसार इस नमक को दैनिक उपयोग में लाने की आदत डालनी चाहिए। क्योंकि सभी नमक से सेंधा नमक सबसे अच्छा और सेहतमंद माना जाता है।

समस्त उत्तर भारत के उपमहाद्वीपों में सेंधा नमक पाया जाता है। यह नमक सिंध, पश्चिमी पंजाब के सिन्धु नदी से सटे हुए हिस्सों और ख़ैबर-पख़्तूनख़्वा के कोहाट ज़िले से आता है जो अब पाकिस्तान का हिस्सा हैं। वहाँ यह नमक जमीन में मिलता हैं।

सेंधा नमक और सैन्धव नमक का अर्थ है सिंध या सिन्धु के क्षेत्र से आया हुआ। पश्चिमोत्तरी पंजाब में नमक कोह (यानि नमक का पहाड़) नाम की मशहूर पहाड़ी श्रृंखला है जहाँ से यह नमक मिलता है और इसी जगह पर प्रसिद्ध खेवड़ा नामक नमक की खान है। इसे लाहौरी नमक इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह अक्सर लाहौर से होता हुआ पूरे उत्तर भारत में बेचा जाता था।

सेंधा नमक का ही उपयोग क्यों करे?

1960 तक हमारे देश में सेंधा नमक पर्याप्त मात्रा में मिलता था। क्योंकि स्वाद के साथ-साथ यह नमक सेहत की दृष्टि से भी उत्तम था। हजारों वर्ष पुरातन आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में भी सेंधा नमक खाने की सलाह दी गई है। क्या आप जानते है पूरी दुनिया में भोजन के अंदर मसालों और नमक का प्रयोग पाकिस्तान, चीन, भारत, बांग्ला देश, नेपाल सबसे अधिक करते है।

हमारे पूर्वज हमसे अधिक स्वस्थ होते थे क्योंकि वे प्राकृतिक मसालों व नमक का उपयोग अधिक करते थे। लेकिन आज सेंधा नमक का स्थान समुन्द्री नमक ने ले लिया। आयोडीन के नाम पर समुन्द्री नमक खुलेआम बेचा जा रहा है जबकि हकीकत यह है इस नमक को बनाते वक्त सभी जरूरी तत्व नष्ट हो जाते है और आयोडीन के स्थान पर हम कैमिकल युक्त सोडियम नमक ही खाते है।

रिफाइण्ड नमक में 98% सोडियम ही होता है और जो कैमिकल मिलाया जाता है वो सीमेंट बनाने में लिया जाता है इसलिए यह नमक शरीर में घुलता नहीं है और शरीर बीमारी का घर बन जाता है। जबकि आयोडीन नमक की एक ग्राम की मात्रा अपने से 23 गुणा अधिक पानी माँगता है।

सिर्फ अतिरिक्त आयोडीन के झाँसे में समुद्री नमक को छोड़िए और सेंधा नमक खाइए क्योंकि आयोडीन तो सभी नमक में होता है। अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी, डेनमार्क जैसे 60 से अधिक देशों ने आज से 40 वर्ष पूर्व ही अतिरिक्त आयोडीन नमक को बैन कर दिया था।

सेंधा नमक को दैनिक भोजन में लाने की एक अहम जरूरत यह भी है की इस नमक के क्षारीय गुण से शरीर बीमारियों से लड़ पाने की क्षमता को मजबूत बना पाता है। इस नमक के सेवन से खराब पाचन में सुधार आता है।

इतना ही नहीं गैस, कब्ज, रक्त के पीएच लेबल और रक्तचाप को नियंत्रित करता है, गठिया, मोटापा, पेट के कीड़े, दिल की समस्या, जोड़ों में दर्द, उल्टी की समस्या, दमा, सुखी खाँसी, पथरी, टॉन्सिल, दाँतों व हड्डियों की मजबूती में, त्वचा की सुंदरता में, मांसपेशियों की ऐंठन जैसी अनगिनत समस्याओं का खात्मा करने में सक्षम है।

भारत में इस नमक का सबसे अधिक उपयोग व्रत-उपवास में किया जाता है। अब आप ही सोचिए यह कितना शुद्ध और गुणकारी है तभी तो इसकी छवि धार्मिक तौर पर रखी गई है क्योंकि व्रत आदि में शुद्धता का बड़ा ख्याल रखा जाता है इसलिए इस शुद्धता को रोजाना चलन में लाइए।

सावधानी और सलाह – अगर आपकी दैनिक खुराक में सोडियम की मात्रा अधिक है तो यह नमक आपको क्षति पहुँचा सकता है जैसे हाई बीपी, हृदय रोग, ऑस्टियोपोरोसिस, गुर्दे की समस्या जैसी कई समस्या का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप लंबे समय से समुन्द्री नमक का सेवन करते आ रहे है तो नमक बदलने से पहले अपने आहार चिकित्सक से सलाह जरूर ले।

सेंधा नमक क्षारीय तासीर का होता है और समुन्द्री नमक अम्लीय। जबकि हमारा शरीर 80% की मात्रा में क्षारीय भोजन की माँग करता है। इसलिए सेंधा नमक की शुरुआत कैसे करे इसके बारे में अपने डॉक्टर से सलाह जरूर ले। किसी भी परिस्थिति में डॉक्टर से अच्छा कोई मार्गदर्शक नहीं होता।

उम्मीद है जागरूक पर सेंधा नमक क्या है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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