शादी का बड़ा निर्णय लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

जीवन के सबसे अहम निर्णयों में से एक होता है शादी का निर्णय लेना। शादी जीवन के किसी पर्व से कम नहीं होता और इस पर्व की तैयारियां करने में भी आप कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। शादी से जुड़ा हर काम आप परफेक्शन के साथ पूरा करना चाहते हैं ताकि इस ख़ुशी के अवसर पर सबकुछ बेहतरीन हो, किसी तरह की कोई कमी ना रह जाए। लेकिन क्या शादी का निर्णय लेते समय भी आप ऐसा ही सोचते हैं? जिस जीवनसाथी के साथ आपको अपना पूरा जीवन बिताना है, उसे जानने-समझने के बाद ही ये निर्णय लिया जाना चाहिए और कुछ बेहद ज़रूरी बातों का ध्यान रखते हुए ही इस फैसले की तरफ बढ़ना चाहिए। तो चलिए, आज इसी बारे में बात करते हैं कि शादी का निर्णय लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखा जाना ज़रूरी है –

क्या आप दोनों मानसिक रूप से तैयार हैं ?
शादी का निर्णय लेने के लिए मानसिक रूप से तैयार होना बेहद ज़रूरी है। ये फैसला एक बार लिया जाता है और ज़िंदगीभर इसे निभाया जाता है। ऐसे में जीवन के इस नए सफर पर चलने के लिए दोनों पार्टनर्स का पूरी तरह तैयार होना ज़रूरी है। ये शादी किसी दबाव या मज़बूरी में तो नहीं हो रही है, ये जानना आपकी जिम्मेदारी है। दोनों की मानसिक परिपक्वता और खुशी ही इस रिश्ते में मिठास ला सकेगी।

क्या आप एकदूसरे की भावनाओं का सम्मान करते हैं ?
शादी करने के लिए दो लोगों की सोच का मिलना ज़रूरी होता है लेकिन उससे भी ज़रूरी होता है एकदूसरे की भावनाओं का सम्मान करना। भले ही आपके विचार आपस में मेल ना खाते हों लेकिन अगर इसके बावजूद आप एकदूजे की भावनाओं का सम्मान करते हैं और एकदूजे को समझते हैं तो ये आपके खुशनुमा जीवन का संकेत है इसलिए अपने पार्टनर के विचारों और उनकी भावनाओं के बारे में ज़रूर जानें और ये भी समझने का प्रयास करें कि उनके लिए ज़्यादा महत्वपूर्ण क्या है – सोच का मिलना या विचारों का सम्मान करना ?

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परिवार के बारे में आप क्या सोचते हैं ?
कई बार ऐसा होता है कि एक साथी परिवार को बहुत ज़्यादा महत्व देता है जबकि दूसरे साथी के लिए परिवार का कोई विशेष महत्व नहीं होता। ऐसे में आगे चलकर रिश्ते में तनाव आ सकता है इसलिए शादी से पहले इस बारे में एक दूसरे के विचारों को जानें। अगर आप दोनों अपने-अपने नज़रिये में थोड़ा-थोड़ा बदलाव करने को तैयार हो जाते हैं तो इसका अर्थ है कि आप एकदूसरे के साथ के लिए समायोजन करने को तैयार हैं और ये खबर आपकी शादी के लिए किसी तोहफे से कम नहीं होगी।

जीवन की प्राथमिकताओं पर बात करें –
ये ज़रूरी नहीं है कि जो प्राथमिकताएं आपके जीवन की हैं, आपके साथी के जीवन में भी उन्हीं चीज़ों का महत्व हो। दो अलग लोग जीवन के प्रति अलग नजरिया रखते हैं। ऐसे में अपने साथी से ज़्यादा अपेक्षा रखना या दबाव बनाना आपके रिश्ते को मुश्किल में डाल सकता है। इससे बेहतर यही होगा कि शादी से पहले आप इस बारे में खुलकर बात करें और अगर आप दोनों अपनी प्राथमिकताओं में थोड़ा लचीलापन लाने को तैयार हो जाते हैं तो समझिये कि आप एकदूसरे से शादी के लिए तैयार हैं।

करियर पर बात करना भी ज़रूरी है –
घर-परिवार की बातों के अलावा करियर के बारे में एकदूसरे के नज़रिये, सपने और सोच को जानना भी आवश्यक है। शादी के बाद करियर से जुड़े निर्णयों में आप एकदूसरे का कितना साथ दे पाएंगे और आपके लिए खुद के करियर के साथ-साथ अपने साथी के करियर का कितना महत्व है, ये बताना और जानना बेहद ज़रूरी है।

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प्यार और पैसे में से आप किसे चुनते हैं –
हो सकता है कि ये सवाल पूछने में झिझक हो लेकिन आपके लिए ये जानना ज़रूरी है कि प्यार और पैसे में से आप किसे ज़्यादा महत्व देते हैं और आपके साथी का इस बारे में क्या विचार है इसलिए बातों-बातों में ये ज़रूर बताइये कि आपकी लाइफ में पैसे और प्यार की क्या जगह है और अपने पार्टनर से भी ये जानने की कोशिश कीजिये क्योंकि अगर आप दोनों की प्राथमिकता मिल जाती है तो आप साथ में बड़ी आसानी से खुश रह सकेंगे और अगर आपके चुनाव नहीं मिलने के बावजूद आप एकदूसरे के विचारों से सहमति जताते हैं तो आप एक बेहतरीन कपल बनने वाले हैं।

फैमिली प्लानिंग पर भी बात करें –
फैमिली प्लानिंग पर ज़रूर बात करें। इस बारे में आपका क्या सोचना है और आपके साथी के क्या विचार हैं, ये जानना और बताना ज़रूरी होता है। ऐसा करके आप अपने फ्यूचर की एक साफ झलक देख सकते हैं।

अपने बारे में सब सच बताये –
सामने वाले से सच्चाई की अपेक्षा करने से पहले स्वयं ऐसा उदहारण पेश करें जिससे आपका साथी प्रभावित हो और खुद के जीवन के बारे में बताना चाहे। अपनी लाइफ के अच्छे-बुरे अनुभव साझा करिये और फिर देखिये कि सामने वाला आपको उसी रूप में अपनाता है या नहीं। हर शख्स में अच्छी और बुरी आदतें होती हैं। ऐसे में अच्छी बातें बताकर प्रभाव जमाना और बुरी बातों को छिपाना आपके रिश्ते को कमज़ोर कर सकता है इसलिए अपने बारे में सब सच बताइये और इसके बाद अगर वो आपको अपनाते हैं तो समझ लीजिये कि ये रिश्ता बहुत मजबूत रिश्ता है।

शादी के निर्णय में उत्साह से ज़्यादा संयम और समझ की ज़रूरत पड़ती है। अपने साथी को परखने के अलावा खुद का आंकलन करना भी अहम है। जिस व्यक्ति के साथ पूरा जीवन बिताना है उसे अच्छे से जानना और अपने बारे में बताते समय पारदर्शिता रखना ही एक नए और मजबूत रिश्ते की नींव रख सकता है। ऐसे में आप भी शादी का निर्णय लेते समय विवेक से काम लें और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही शादी के लिए कहे – हाँ !!

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