आइये जानते हैं मधुमक्खी शहद किस तरह बनाती है। शहद का स्वाद तो आपको भी पसंद होगा और इसके औषधीय गुणों से आप भी परिचित होंगे। विटामिन-बी, खनिजों और एंटी ऑक्सीडेंट्स का भंडार शहद में मौजूद होता है और इसे ऐसी पुरानी दवाओं में गिना जाता है जिन्हें आज भी इलाज करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

आप ये भी जानते हैं कि शहद मधुमक्खियों से प्राप्त होता है लेकिन शायद आप भी इस प्रक्रिया को करीब से जानना चाहते होंगे कि मधुमक्खी शहद कैसे बनाती है।

ऐसे में क्यों ना आज, हम इसी बारे में जानें कि शहद कैसे बनता है। तो चलिए, आज जानते हैं मधुमक्खियों के शहद बनाने के तरीके के बारे में।

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मधुमक्खी शहद किस तरह बनाती है?

शहद मधुमक्खियों का भोजन होता है। एक सामान्य आकार के छत्ते में रहने वाली मधुमक्खियों को सर्दियों में भोजन के लिए 10 से 15 किलो शहद की जरुरत होती है लेकिन मौसम अच्छा होने पर करीब 25 किलो शहद एक छत्ते में तैयार हो सकता है और इस तरह जरुरत से ज्यादा तैयार हुआ शहद इंसानों द्वारा इकट्ठा कर लिया जाता है।

खाने की तलाश में मधुमक्खियां फूलों पर मंडराती रहती है और अपनी नली जैसी जीभ से फूलों का रस चूसकर इसे अपने पेट में जमा करती जाती हैं। एक मधुमक्खी इतना मकरंद पी सकती है कि उसका वजन मधुमक्खी के वजन का एक तिहाई तक होता है।

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भरपेट मकरंद पीने के बाद मधुमक्खी का पेट सामान्य से ज़्यादा लम्बा हो जाता है। फूलों की मकरंद ग्रंथियों में पाया जाने वाला ये मकरंद शक्कर का घोल होता है जिसमें लगभग 25 से 50 प्रतिशत तक शक्कर होती है।

मकरंद को पेट में जमा करके मधुमक्खियां छत्ते पर जाती हैं जहाँ ये रस बाकी मधुमक्खियों को दिया जाता है। ये मधुमक्खियां इस मकरंद को करीब आधे घंटे तक चबाती हैं और इसमें अपने मुँह की ग्रंथियों से निकलने वाले एंजाइम मिलाती हैं।

अध्ययन बताते हैं कि इस एंजाइम में कुछ एंटी-बैक्टीरियल और एंटीबायोटिक तत्व मौजूद होते हैं और ये एंजाइम शहद में हाइड्रोजन परॉक्साइड पैदा कर देता है जो नुकसान पहुँचाने वाले जीवाणुओं को ख़त्म कर देता है।

इसके बाद इस मकरंद को छत्ते के खानों (चैम्बर्स) में रखा जाता है। इस रस में से पानी को सुखाने के लिए मधुमक्खियां अपने पंख फड़फड़ाकर हवा करती हैं और जब इसमें पानी की मात्रा 18 प्रतिशत से भी कम रह जाती है तब इस रस से भरे खानों को मोम की एक पतली परत से ढ़क दिया जाता है।

ये ढ़का हुआ शहद बिना ख़राब हुए हमेशा तक रखा जा सकता है इसलिए कहा भी जाता है कि शहद जितना पुराना होता है उतना ही फायदेमंद रहता है।

अब आप जान चुके हैं कि मधुमक्खी शहद किस तरह बनाती है और उनका बनाया शहद उनका भोजन होने के साथ-साथ हमारे लिए किसी चमत्कारिक औषधि से कम नहीं होता है।

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