बाज़ार मे ज़रा सी मंदी – निवेशकों की मानसिकता

शेयर्स मार्केट हमेशा बहुत उतार-चढ़ाव वाला होता है। उतार-चढ़ाव की वजह से ही अच्छा फण्ड मैनेजर / Advisor अपने निवेशकों को ज्यादा कमा कर दे पाता है। लेकिन बाज़ार मे ज़रा सी मंदी आते ही कई Long Term निवेशक बहुत ज्यादा घबरा जाते हैं और Panic होकर बाहर निकल जाते हैं।

मेरी समस्त निवेशकों को बार-बार सलाह रहती है कि उनको सबसे पहला अपना Time Horizon, Risk Taking Capacity व स्वयं का Nature देखकर ही Invest करना चाहिये।

Equity Funds में निवेशक को कम से कम 5-7 वर्षों तक निवेशित रहना चाहिये तभी वह Guaranteed काफी अच्छा Return कमा पायेगा। मतलब साफ है आप अपनी Capacity से चाहे कम निवेश करें लेकिन जो भी निवेश करें वो कम से कम 5-7 वर्षों के लिये हो। S.I.P किसी भी हालत में 5-7 वर्षों से पहले बन्द नहीं होनी चाहिये। बहुत ही विशेष विपरीत परिस्थिती में निवेशक 3-6 माह के लिये Pause कर ले लेकिन बन्द नहीं करे। विशेष ध्यान रखें कि ज्यादा विपरीत स्थिती हो तो ही बन्द करें लेकिन पैसा किसी भी हालत में 5-7 वर्षों से पहले नहीं निकालना वरना S.I.P का Purpose Wealth Creation नहीं हो पायेगा।

मेरा शेयर्स / Mutual Funds में 26 वर्षों का अनुभव है। निवेशकों को तेजी में बहुत तेजी व मंदी में बहुत मंदी दिखायी देती है। Wealth Creation में Patience का बहुत बड़ा Role है। सो निवेशकों को चाहिये कि शांति से अच्छे Financial Advisor की राय से अच्छी स्कीमों में निवेश करके बैठ जायें। खूब मोटा फायदा रहेगा। सो बाज़ार में ज़रा सी मंदी से नहीं घबराना चाहिये अपितु मंदी में S.I.P में ज्यादा Units मिलती हैं। सो निवेशक अपनी पुरानी मानसिकता को खत्म करके Long Term Time के साथ निवेश करे।

sodhani-1 बाज़ार मे ज़रा सी मंदी - निवेशकों की मानसिकताये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

“रिटायरमेंट प्लानिंग क्या है और क्यों जरूरी है?”

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