शुद्ध पारद शिवलिंग की पहचान

धर्मशास्त्रों के अनुसार पारद शिवलिंग साक्षात् भगवान शिव का ही रुप होता है इसलिए विधि विधान से इसकी पूजा करने से कई गुना फल प्राप्त होता है। पारद शिवलिंग शांति, सुख, सौभाग्य और स्वास्थ्य लेकर आता है। पारद (पारा) को रसराज कहा जाता है और इससे बने शिवलिंग की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। ऐसे में ये जानना बेहतर होगा कि पारद शिवलिंग की शुद्धता का पता कैसे लगाया जाता है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं शुद्ध पारद शिवलिंग की पहचान का तरीका।

आजकल बाजार में पारद शिवलिंग तैयार मिलते हैं जिनकी शुद्धता का अंदाज़ा लगाना मुश्किल होता है क्योंकि सुहागा और जस्ता मिलाकर बनाये गए शिवलिंग भी पारद शिवलिंग जैसे ही लगते हैं। इसी तरह एल्युमिनियम से बना शिवलिंग भी पारद शिवलिंग जैसा दिखाई देता है लेकिन इस तरह के शिवलिंग को घर में रखने से रक्त सम्बन्धी, सांस सम्बन्धी रोग हो सकते हैं और मानसिक विकृति भी उत्पन्न हो सकती है।

शुद्ध पारद शिवलिंग तीन धातुओं के रासायनिक संयोग से बनता है जिसमें कम से कम 70% पारा, 15% मनीफेन या मैग्नेशियम और 10% कार्बन और पांच प्रतिशत अंग मेवा या पोटैशियम कार्बोनेट होना चाहिए। इस तरह निर्मित शुद्ध पारद शिवलिंग को बिना पूजा किये भी घर में रखा जा सकता है और इसकी पूजा भी की जा सकती है।

पारद शिवलिंग की शुद्धता के परीक्षण–

  • पारद की शुद्धता की पहचान करने के लिए इसका संपर्क सोने से करवाना चाहिए और अगर सोने की मात्रा कम होने लगे तो पारद शिवलिंग की शुद्धता का प्रमाण मिल जाएगा क्योंकि सोने की मात्रा भले ही कम होने लगे लेकिन पारद शिवलिंग के वजन में बिलकुल भी बढ़ोतरी नहीं होगी।
  • पारद शिवलिंग को हथेली पर घिसने पर अगर हाथ पर काली लकीर बन जाए तो पारद शिवलिंग शुद्ध नहीं है।
  • पारद शिवलिंग को जल में रखकर धूप में रखने पर, कुछ समय बाद शुद्ध पारद शिवलिंग पर सोने जैसी आभा दिखाई देने लगती है।
  • लैब टेस्ट करवाने पर अगर रिपोर्ट में जिंक, लेड और टिन धातुएं आएं तो पारद शिवलिंग अशुद्ध होता है।

इस तरह शुद्ध पारद की पहचान करने के बाद ही उसे घर लाना चाहिए और उसकी पूजा अर्चना करनी चाहिए।

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