शून्य का आविष्कार किसने और कब किया?

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आइये जानते हैं शून्य का आविष्कार किसने और कब किया। दुनिया की महान खोजों में से एक है शून्य का आविष्कार, जिसने गणित के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। ये खोज इतनी बड़ी थी कि कहा जा सकता है कि जीरो के आविष्कार ने गणित की दुनिया में तहलका मचा दिया लेकिन क्या आप जानते हैं कि जीरो को किसने खोजा?

ऐसे में क्यों ना, आज जीरो के आविष्कार से जुड़ी जानकारी ली जाये। तो चलिए, आज बात करते हैं जीरो यानि शून्य के आविष्कार की।

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शून्य का आविष्कार किसने और कब किया?

भारत में शून्य कहा जाने वाला ये अंक अरब जगत में सिफर नाम से जाना गया और लैटिन, इटैलियन, फ्रेंच से होते हुए अंग्रेजी में जीरो कहलाया।

हालाँकि शून्य का आविष्कार करने का श्रेय प्राचीन भारत के महान ज्योतिषविद् और गणितज्ञ आर्यभट्ट को जाता है लेकिन बीते कुछ समय में हुयी रिसर्च में शून्य के आविष्कार से जुड़े कई तथ्य सामने आये हैं।

तथ्यों के अनुसार, आर्यभट्ट को शून्य का आविष्कारक नहीं माना जा सकता। उन्होंने एक नई अक्षरांश पद्धति को खोजा था और इसी पद्धति में आर्यभट्ट ने अपने ग्रन्थ आर्यभटीय में कार्य किया है।

आर्यभट्ट को शून्य का आविष्कारक इसलिए माना जाता रहा है क्योंकि उन्होंने अपने ग्रन्थ आर्यभटीय में एक से अरब तक की संख्याएं बताकर लिखा है कि ‘प्रत्येक अगली संख्या पिछली संख्या से दस गुना है।’ उनके इस वर्णन से ये स्पष्ट होता है कि शून्य का आविष्कार आर्यभट्ट के काल से पहले हो चुका था।

अमेरिकी गणितज्ञ आमिर एक्जेल के अनुसार, शून्य की उत्पत्ति भारत में नहीं बल्कि कम्बोडिया में हुयी है और उन्होंने अपनी किताब ‘फाइंडिंग जीरो: ए मैथिमैटिशियंस ओडिसी टू अनकवर द ओरिजिन ऑफ नंबर’ में इसका दावा किया है कि उन्हें सबसे पुराना शून्य कम्बोडिया में मिला है।

अब बात करते हैं बख्शाली पाण्डुलिपि की, गणित के इस महान ग्रन्थ के कुछ पन्ने 1881 में बख्शाली गांव के पास प्राप्त हुए। ये गांव वर्तमान में पाकिस्तान में है लेकिन उस समय भारत में शामिल था। बख्शाली ग्रन्थ वैदिक गणित के ईसा पूर्व 800 से लेकर ईसा पूर्व 500 के काल के बाद के गणितीय रुप को दर्शाता है।

साल 1902 से ये पाण्डुलिपि ब्रिटेन की बोडलियन लाइब्रेरी में रखी हुयी है। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अनुसंधानकर्ताओं ने कार्बन डेटिंग के जरिये इस पाण्डुलिपि में शून्य के आविष्कार का पता लगाया है।

इस पाण्डुलिपी में सैंकड़ों शून्य मिले हैं जो ये स्पष्ट करता है कि शून्य के आविष्कार का जो समय बताया जाता है उससे 500 साल पहले ही शून्य खोजा जा चुका था।

शून्य के आविष्कार की ये गुत्थी सुलझने तक यही कहा जा सकता है कि शून्य का आविष्कार आर्यभट्ट ने किया था।

उम्मीद है जागरूक पर शून्य का आविष्कार किसने और कब किया कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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