सिम स्वैपिंग क्या है?

जैसे-जैसे कैशलेस ट्रांजेक्शन बढ़ता जा रहा है वैसे ही सिम स्वैपिंग भी जोर पकड़ती जा रही है। ऐसे में सिम स्वैपिंग से जुड़ी जानकारी लेना बहुत जरुरी है इसलिए आज बात करते हैं सिम स्वैपिंग की। सिम स्वैपिंग के जरिये हैकर पहचान को चोरी करते हैं और बैंक अकाउंट से जुड़े मोबाइल नंबर को बंद कर देते हैं। उसके बाद फर्जी आईडी के जरिये उसी मोबाइल नंबर का डुप्लीकेट सिम अपने लिए एक्टिवेट करा लेते हैं।

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सिम स्वैपिंग के नए तरीकों से भी सावधान होने की जरुरत है जिसमें हैकर अपने टारगेट व्यक्ति को फोन करके उसके सिम को अपग्रेड करने या उसकी वैलिडिटी बढ़ाने का झांसा देते हैं और बहुत से लोग इस झांसे में फंस भी जाते हैं और हैकर के निर्देशों का पालन करने लगते हैं।

हैकर उस व्यक्ति से कहता है कि वो अपने सिम कार्ड पर लिखा हुआ 20 अंकों का नंबर अपने कस्टमर केयर नंबर 121 पर SMS कर दें। हैकर के पास उस व्यक्ति का नया डुप्लीकेट 4G या 3G सिम रहता है और वो व्यक्ति जैसे ही 121 पर सिम का नम्बर मैसेज करता है तो थोड़ी सी देर में उसका सिम नंबर बंद हो जाता है और हैकर के पास मौजूद डुप्लीकेट सिम शुरू हो जाता है।

हैकर के पास सिम शुरू होने के बाद वो इंटरनेट बैंकिग पर लॉग इन करता है और पासवर्ड को रीसेट करके आपके बैंक अकाउंट में पहुँच जाता है।

डुप्लीकेट सिम कैसे मिल जाता है – सोशल मीडिया पर सम्बंधित व्यक्ति की जानकारी जुटाने के बाद एक फर्जी पहचान पत्र बना लिया जाता है जिससे डुप्लीकेट सिम मिलना आसान हो जाता है।

सिम स्वैपिंग से बचने के लिए-

  • सोशल मीडिया पर अपनी पूरी जानकारी शेयर ना करें
  • मोबाइल बैंकिंग के लिए भरोसेमंद मोबाइल ऐप का ही इस्तेमाल करें
  • भरोसेमंद वेबसाइट से ही शॉपिंग करें
  • ई-वॉलेट में सीमित रकम ही रखें
  • फोन या ईमेल पर किसी को अपने अकाउंट की डिटेल, एटीएम कार्ड और क्रेडिट कार्ड की जानकारी ना दें
  • आधार कार्ड नंबर को स्वयं बैंक में रजिस्टर करवाएं
  • धोखाधड़ी होने की सूरत में तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें
  • सिम स्वैपिंग के प्रति अपने परिवार को भी जागरूक करें

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