सिंधु लाएगी भारत के लिए एक और मैडल

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इस रियो ओलंपिक में अभी तक भारत के हाथ एक भी गोल्ड मैडल नहीं लगा है। पहले कई खिलाडियों से आस थी लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन भारत की एक और आस जगी है बेडमिंटन खिलाडी पी वी सिंधु से। सिंधु जापान की नोजोमी ओकुहारा को सेमि फाइनल में हराकर फाइनल में पहुँच चुकी हैं और आज वो स्पेन की कैरोलिना मारिन से टक्कर लेंगी। अगर सिंधु आज फाइनल जीत जाती है तो वो भारत के लिए इस ओलंपिक में पहली खिलाडी बन जाएंगी जो गोल्ड मैडल जीतेंगी।

5 जुलाई 1995 में हैदराबाद में जन्मी पी वी सिंधु की सबसे बड़ी प्रेरणा रहे हैं उनके माता पिता जो दोनों ही अपने समय में वॉलीबॉल खिलाड़ी रह चुके हैं। पी वी सिंधु के पिता पी वी रमन्ना वालीबॉल में अर्जुन अवार्ड से भी नवाजे जा चुके हैं।

हालांकि सिंधु का बैडमिंटन में अपना करियर बनाने की सबसे ख़ास वजह है पुलेला गोपीचंद। सिंधु, पुलेला गोपीचंद की बहुत बड़ी फैन हैं और इन्हीं से प्रेरित होकर सिंधु ने बैडमिंटन खेल चुना।

10 अगस्त 2013 को वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मैडल जीतने वाली सिंधु भारत की पहली महिला एकल बैडमिंटन खिलाड़ी बनी। 30 मार्च 2015 को इन्हें पद्मश्री अवार्ड से भी नवाजा जा चुका है।

श्री वेंकटेश्वर बाला कुटीर, गुंटूर से शिक्षा हासिल करने वाली सिंधु ने महज 8 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। सिंधु ने कड़ी मेहनत कर इस मुकाम को हासिल किया है। सिंधु रोज 27 किमी का सफर कर बैडमिंटन की प्रेक्टिस करने जाती थी।

गोपीचंद अकेडमी में जाने के बाद सिंधु ने कई खिताब जीते हैं। गोपीचंद के अनुसार हार मानना सिंधु की आदत में नहीं है।

2013 में सिंधु मलेशिया ओपन में भी जीत दर्ज कर चुकी हैं और ओलंपिक में उनकी रैंक 9 है।

सिंधु का ये पहला ओलंपिक है और पहले ही ओलंपिक में सिंधु कमाल का प्रदर्शन कर फाइनल में पहुँच गई हैं। अब पूरे भारत को सिंधु से गोल्ड मैडल की आस है और यही प्रदर्शन जारी रहा तो सिंधु आज होने वाले फाइनल में भारत को इस ओलंपिक का पहला गोल्ड मैडल दिला सकती है।

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