सिंगल फेज और थ्री फेज कनेक्शन क्या होते हैं?

आप जानते हैं कि एक सिंगल लेन की सड़क पर कुछ वाहन ही चल पाते हैं जबकि तीन लेन की सड़क पर बहुत सारे वाहन एक साथ चल पाते हैं। कुछ ऐसा ही होता है सिंगल फेज और थ्री फेज का कनेक्शन, जिसके बारे में जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है इसलिए आज इसी बारे में बात करते हैं।

हमारे घरों और व्यवसायों में इस्तेमाल होने वाली बिजली से ही सारे उपकरण चलते हैं। बिजली ग्रिड से जो करंट भेजा जाता है वो अल्टरनेटिव करंट (AC) होता है। एक सिंगल फेज कनेक्शन में एक तार से ही करंट भेजा जाता है जबकि थ्री फेज कनेक्शन में तीन तार से करंट भेजा जाता है। थ्री फेज कनेक्शन हैवी लोड वहन कर सकता है जबकि सिंगल फेज हैवी लोड वहन नहीं कर सकता।

अक्सर हमें ऐसा लगता है कि घरेलू उपयोग के लिए तो सिंगल फेज ही पर्याप्त होना चाहिए और थ्री फेज का इस्तेमाल कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूज में ही होना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं होता है। घरों में अगर 3 एसी और कुछ हीटर हैं तो भारत में थ्री फेज वाला कनेक्शन ही दिया जाएगा।

थ्री फेज कनेक्शन का फायदा ये होता है कि बिजली का भार तीन फेज में बंट जाता है और एक ही फेज पर सारा भार नहीं पड़ता है। अगर किसी कारण से एक फेज बंद भी हो जाये तो बाकी दो फेज चलते रहने से बिजली पूरी तरह गुल होने की स्थिति से बचाव हो जाता है।

आम तौर पर घर में बिजली का भार 5-7 किलो वाट से ज्यादा होने की स्थिति में विद्युत वितरण कंपनी द्वारा थ्री फेज का कनेक्शन दे दिया जाता है। सिंगल फेज को थ्री फेज कनेक्शन में बदलने के लिए घर की वायरिंग बदलने की जरुरत नहीं पड़ती है और सिंगल से थ्री फेज कनेक्शन करने से बिजली के बिल में ऊर्जा प्रभार भी बढ़ता नहीं है।

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