चाणक्य नीति के कुछ कारगर वचन

आज हम आप सभी को चाणक्य नीति के कुछ कारगर वचन बताएँगे जिन्हें अगर हम सभी अपने जीवन में इस्तेमाल करें तो बहुत लाभ हो सकता है। तो चलिए इन नीतियों को जानते है।

* जो भी व्यक्ति धन से जुड़े कामों में शर्म करता है उसे धन हानि का सामना करना पड़ता है। यदि किसी व्यक्ति को उधार दिया पैसा वापस लेना है और हम शर्म के कारण मांग नहीं पा रहे हैं तो धन हानि अवश्य होगी।

* यदि कोई व्यक्ति खाना खाने में शर्म करता है तो वह भूखा ही रह जायेगा। कुछ लोग रिश्तेदारों के यहाँ या मित्रों के यहाँ भोजन करते समय शर्म करते हैं तो वे पेट भर खाना नहीं खा पाते और भूखे रह जाते हैं।

* अच्छा विद्यार्थी वही है जो बिना शर्म करे अपने गुरु से सभी प्रश्नों का उत्तर प्राप्त करता है। शिक्षा प्राप्त करने में जो विद्यार्थी शर्म करता है वह अज्ञानी ही रह जाता है।

* एक श्रेष्ठ बात जो शेर से सीखी जा सकती है, वो ये है की व्यक्ति जो कुछ भी करना चाहता है उसे पूरे दिल और जोरदार प्रयास के साथ ही करना चाहिए।

* हमारे लिए संतुलित दिमाग जैसी कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लालच जैसी कोई बीमारी नहीं है और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है।

* जब आप किसी काम की शुरआत करें तो असफलता से डरें नहीं और उस काम को ना छोड़ें। जो लोग ईमानदारी से काम करते हैं वे हमेशा प्रसन्न रहते हैं।

* यदि किसी का स्वभाव अच्छा है तो उसे किसी और गुण की क्या जरुरत है ? यदि आदमी के पास प्रसिद्धि है तो उसे किसी और श्रृंगार की क्या आवश्यकता है।

* श्रेष्ठ व्यक्ति के लिए अपमानित होकर जीने से अच्छा मरना है। मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है।

* हमेशा ध्यान रखें कभी भी ऐसे लोगों से मित्रता नहीं करनी चाहिए जो आपसे कम या ज्यादा प्रतिष्ठित हों। ऐसी मित्रता आपको कभी ख़ुशी नहीं दे सकेगी।

* समुद्र बादलों को अपना जल देता है, बादलों द्वारा लिया गया वह जल मीठा हो जाता है। हमे भी अपना धन उन्ही को देना चाहिए जो योग्य हों, अयोग्य को नहीं।

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