देश की तरक्की में भागीदार कैसे बन सकते हैं?

फरवरी 5, 2016

हम सबको भारतीय होने पर गर्व है मगर क्या हम सही में भारत को गौरवान्वित कर रहे हैं। भारत में बड़ी मात्रा में कुछ ऐसे लोग हैं जिनका मुख्य तौर पर हर समस्या पर एक ही जवाब होता है “मुझे क्या”, “मेरा क्या” – क्या यह कहना सही है। यह बात हम जो हर बार बोलते हैं की नेता क्या करते हैं या उस अधिकारी को यह करना चाहिए, मगर क्या कभी आपने यह सोचा है की क्या हमारी हमारे देश के लिए कोई जिम्मेदारी नहीं है? फिर सब यही सोचते हैं की अगर करें भी तो क्या करें। मगर क्या आप यह जानते हैं की आप भी देश की तरक्की में योगदान दे सकते हैं। चलिए जानते हैं कैसे आप अपने देश की तरक्की में भागीदार बन सकते हैं।

1. हम सब खुद को ही अनुशासित नहीं करते और इसी प्रक्रिया में सबसे पहले आता है कचरा। यह कचरा कौन फैला रहा है? आप और हम ही फैला रहे हैं, तो क्या हम अपने द्वारा फैलाये गए कचरे के ज़िम्मेदार नहीं है ? और अगर आपका जवाब हाँ है तो फिर इस कचरे को कचरा पात्र में डालने में क्या दिक्कत है। अधिकतर लोग बोलते हैं कहाँ डालें कचरा पात्र ही नहीं है ? मगर क्या कचरा पात्र घर में ही नहीं रखा जा सकता जिसे बाद में नगरनिगम के कचरा पात्र में फेंक दिया जाये। जब तक हम ही अनुशासित नहीं होंगे तो हम अपने से सम्बंधित लोगों को क्या सिखाएंगे। विकास का मतलब बड़ी बड़ी बिल्डिंग बनाना ही नहीं होता। विकास का मतलब यह भी है की आप कितने स्वच्छ हैं और कैसे आपने खुद को व्यवस्थित कर रखा है।

2. भीख मांगना भारत की बहुत बड़ी समस्या है मगर भीख देना इस समस्या को और बढ़ाता है। अगर देना है तो इन व्यक्तियों को जो भीख मांग रहे हैं उन्हें इस बात के लिए प्रेरित करें की वो एक अच्छा जीवन व्यतीत करने के लिए शिक्षित बनें। शिक्षा ही ऐसा हथियार है जिसके द्वारा व्यक्ति का बौद्धिक और सामयिक विकास होता है।

3. उन लोगों की मदद करें जिन लोगों को मदद की जरूरत है। ऐसा कई बार होता है की लोग मुसीबत में पड़े लोगों को छोड़ के आगे बढ़ जाते हैं। पर क्या यह एक विकसित समाज की निशानी है ? शायद नहीं। तो ऐसा क्योँ है की लोग आपसी सहभागिता नहीं निभाते। सब पढ़ेंगे तभी विकास होगा और अगर हम लोगों की मदद करने में सक्षम हैं तो हमे जरूर सहभागिता निभानी चाहिए।

4. हम सभी हर काम आसानी से करवाना चाहते हैं और रिश्वत देकर उनलोगों को और लोगों से रिश्वत लेने के लिए प्रेरित करते हैं। मगर ऐसा क्योँ है? क्योँ हम सब प्रक्रिया या कानून का सम्मान नहीं करते। अगर हम किसी कानून का सम्मान नहीं कर सकते तो हमे कोई हक़ नहीं बनता की हम इस बात को बोलें की विकास नहीं हो रहा। क्योँकि उस विकास को रोकने में सबसे बड़ी बाधा हम खुद हैं।

5. भारत विदेशों में अपने कल्चर के लिए जाना जाता है मगर क्या आपने कभी सोचा है की हम अपने कल्चर या अपनी आध्यात्मिक सम्पदा का सम्मान करते हैं? बहुत से ऐसे लोग हैं जो हमारी सभ्यता को खुद ही धूमिल कर रहे हैं। अपने देश के लिए इनका सम्मान तो हमे करना ही पड़ेगा।

अगर हम इस देश को अपना समझते हैं तो इसे साफ भी हमे ही करना पड़ेगा कोई बाहर से इसे साफ करने नहीं आएगा। जब तक हर भारतीय इस व्यवस्था का हिस्सा होने के बाद भी अपनी सहभागिता नहीं निभाएगा तो यह देश आगे कैसे बढ़ेगा।

इस लेख को लिखने के पीछे हमारा मकसद सभी को अपनी ज़िम्मेदारियों के लिए अवगत कराना था। हम यह आशा करते हैं की आप सभी आज से इन सभी कार्यों को करके देश की तरक्की में योगदान देंगे।

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