Parle-G से जुड़े कुछ तथ्य जो आप नहीं जानते होंगे

बच्चे बूढ़े या फिर जवान भारत में शायद ही कोई इंसान ऐसा होगा जिसने पारले जी बिस्किट नहीं खाया होगा। लेकिन इससे जुड़ी भी कुछ ऐसे रोचक तथ्य हैं जो आप सुनेंगे तो हैरान हो जाएंगे। तो चलिए इन्हें विस्तारपूर्वक जानते हैं।

एक सर्वे के मुताबिक Parle-G बिस्किट भारत का नंबर वन बिस्किट है। बिक्री के मामले में पारले जी से ज्यादा कोई बिस्किट नहीं बिकता, यह देश के हर कोने में उपलब्ध है। ग्लूकोस बिस्किट की श्रेणी में Parle-G नंबर वन है क्योंकि इसका 70% मार्केट पर कब्जा है। इसके बाद Sunfeast का बिस्किट आता है जिसका 8% से 9% प्रतिशत तक का हिस्सा है।

चलिए जानते हैं कि पारले जी बिस्किट का नाम कैसे पड़ा ??

1929 में जब भारत ब्रिटिश हुकूमत के अधीन था उस समय Parle प्रोडक्ट्स के नाम से एक छोटी सी कंपनी का आगाज हुआ था। पार्ले नाम मुंबई की उपनगरीय रेलवे स्टेशन विले पार्ले के नाम से प्रेरित है। यह नाम Parle नामक एक पुराने गांव के नाम पर रखा गया था। आजादी के करीब एक दशक बाद इस बिस्किट का उत्पादन शुरू किया गया और आज के समय में पारले ₹2 से लेकर ₹50 तक के बिस्किट वाले पैकेट्स मुहैया कराती है।

आप यह जानकर हैरान हो जायेंगे कि हर मिनट में लगभग ढाई लाख लोग पारले जी बिस्किट खाते हैं। जिसका अगर सेकंड के हिसाब से अनुमान लगाया जाए तो हर सेकंड करीबन 4.5 हजार लोग पारले जी बिस्किट खाते हैं। Parle-G अकेला ऐसा बिस्किट है जो शहरों से लेकर गांव तक बिकता है और इसकी लोकप्रियता शहरों और गांवों में एक समान है।

अगर 2010 के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो यह बिस्किट बिक्री के मामले में दुनिया में चौथे स्थान पर था। भारत के बाद इस बिस्किट की ज्यादा मांग चीन में है।

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