सुंदर पिचई के जीवन से जुड़े कुछ अहम तथ्य

मई 14, 2016

दुनिया की दिग्गज कंपनी गूगल के CEO चुने जाने के बाद सुंदर पिचाई का नाम विश्व विख्यात है. गूगल तक के सफर को सुंदर पिचाई ने अपनी मेहनत और लगन से तय किया है. बहुत ही कम लोगों को यह जानकारी होगी कि अपनी पूरी शिक्षा के दौरान सभी इन्हें पी. सुंदरराजन के नाम से जानते थे. गूगल कंपनी में CEO तक का सफर तय करने वाले सुंदर पिचाई का जीवन बेहद दिलचस्प और रोमांचक है. सुंदर की कामयाबी की कहानी किसी परिकथा से कम नहीं. चेन्नई के रहने वाले सुंदर पिचाई बेहद साधारण परिवार से आते है. आइये आज हम आपको उनके जिंदगी से जुड़े कुछ अहम पहलुओं से रूबरू करवाते है.

सुंदर पिचाई का जन्म 12 जुलाई 1972 में तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में एक तमिल परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम रघुनाथ पिचाई और माता का नाम लक्ष्मी है. रघुनाथ पिचाई ने ब्रिटिश इंडिया में अपनी पढ़ाई की थी. फिर ब्रिटिश कंपनी जी ई सी में वरिष्ठ इलेक्ट्रिकल इंजिनियर के पद पर कार्यरत्त थे. वर्तमान में इनकी इलेक्ट्रिकल कॉम्पोनेन्ट की फेक्ट्री हैं. एक मध्यम वर्गीय परिवार के होशियार बेटे हैं सुंदर. इनके पास एक बड़ा सा ब्लू स्कूटर था. लेकिन अधिकतर यह लोकल वेहिकल से ट्रेवल करना पसंद करते थे. सुंदर स्कूल में सभी कार्यो में अव्वल थे. यह स्कूल कैप्टन के साथ-साथ अपनी क्रिकेट टीम के कैप्टन भी थे. कई मैडल और ट्रॉफी जीतकर इन्होने अपने माता-पिता को गोरवान्वित किया. सुंदर पिचाई का परिवार दो कमरों के घर में रहता था. जिसमें सुंदर पिचाई की पढ़ाई के लिए अलग से कोई कमरा नहीं था. सुंदर अपने छोटे भाई के साथ बैठक वाले कमरे में फर्श पर सोते थे. घर में टेलीविज़न या कार जैसी कोई सुविधा भी नही थी. इसी से उनकी आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है. लेकिन सुंदर पिचाई ने बचपन के अपने इस अभाव को अभाव के रूप में नहीं बल्कि अवसर के रूप में लिया. क्योंकि पिचाई के इंजीनियर पिता ने बचपन में ही अपने बेटे के मन में तकनीक के बीज बो दिए थे. जिस कारण तमाम अभाव भी सुंदर की कामयाबी की राह में बाधा नही बन पायें. महज 17 साल की उम्र में ही उन्होंने IIT प्रवेश परीक्षा पास की और खड़गपुर में दाखिला लिया. आई आई टी की पढ़ाई के दौरान सुंदर हमेशा अपने बैच के टॉपर रहे.

पिचाई अपने दोस्तों के बीच “सुंदी ” के नाम से मशहूर थे. उनके दोस्त सुंदर पिचाई के बारे में बताते है कि कॉलेज के दिनों में वो बहुत ही शर्मीले स्वभाव के थे. हमेशा छोटे ग्रुप में रहने वाले पिचाई के दोस्तों को कभी इस बात का अंदाजा नहीं था कि एक दिन वो इतने बड़े कंपनी के सीइओ बनेंगे. आई आई टी में सुंदर को पढ़ा चुके प्रोफेसर सनत कुमार राय बताते है, ‘ मेटलर्जिकल एंड मैटेरियल साइंस की पढ़ाई के दौरान भी सुंदर इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में विभिन्न विषयों पर कार्य कर रहे थे. वो भी उस दौर में जब आई आई टी के कॉर्स में इलेक्ट्रॉनिक्स था ही नहीं.’ लेकिन फिर भी सुंदर पिचाई का पहला प्यार इलेक्ट्रॉनिक्स ही था.

1993, में सुंदर ने अपनी बीटेक की डिग्री आई.आई.टी. खड़गपुर से पूरी की, जिसमें वह अपनी बैच के टॉपर रहें. रजत पदक हासिल करने के साथ-साथ उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए स्कॉलरसीप भी मिली. अपने गुरुजनों की सलाह पर स्टैंडफोर्ड यूनिवर्सिटी चले गये और वहाँ से विज्ञान विषय में PHD की डिग्री हासिल की. लेकिन सुंदर पिचाई का रुझान शुरू से ही एम बी ए में था. इसलिए उन्होनें पेन्सील्वानिया यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री प्राप्त की. आई आई टी से निकलने के बाद उन्होंने कभी भी अपने जीवन में पीछे मुड़कर नहीं देखा. फर्श से अर्श तक का सफर उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत, लगन और दृढ़ निश्चय शक्ति के बल पर तय किया.

गूगल ज्वाइन करने से पहले सुंदर पिचाई मैकेंजी एंड कंपनी के मैनेजमेंट कंसल्टिंग सेल में काम किया करते थे. इस कंपनी में उन्होंने अप्लाईड मैटेरियल में इंजिनियरिंग और प्रोडक्ट मैनेजमेंट के लिए भी काम किया. इस तरह विभिन्न कंपनियों में काम करते हुए उन्होंने साल 2004 में सर्च टूलबार के टीम मेंबर के रूप में गूगल ज्वाइन किया. इनकी कार्यशैली से गूगल के शीर्ष अधिकारी बहुत ही प्रभावित थे. पिचाई के सुझाव पर ही गूगल ने खुद का ब्राउज़र लाने का निश्चय किया. गूगल क्रोम ओएस और क्रोम ब्राउजर को लोगों तक पहुँचाने का श्रेय सुंदर पिचाई को ही जाता है. गूगल प्रोडक्ट में आज क्रोम सबसे लोकप्रिय ब्राउजर है. गूगल मेप में भी सुंदर का विशेष योगदान हैं. इन्होने खासतौर पर गूगल ड्राइव के लिए काम किया. 2008 में सुंदर पिचाई को गूगल ने प्रोडक्ट डिजाइनिंग का वाइस प्रेसिडेंट नियुक्त किया.

2013, में सुंदर पिचाई नें गूगल की Android परियोजना की कमान संभाली और अपना उत्कृष्ट योगदान दिया. सुंदर पिचाई की योग्यता को देखते हुए लैरी पेज नें इन्हें गूगल के सभी बड़े प्रोजेक्ट का इंचार्ज घोषित किया. जिसमें Google Search, Google Plus, Google Map, Google Commerce, Google Advertising जैसे क्षेत्र शामिल थे. पिचाई ने अपनी निष्ठा के बल पर इन सभी कार्यभार को सफलतापूर्वक निभाकर अपना सर्वश्रेष्ट योगदान दिया. गूगल में 11 सालों से अपना अद्भुत योगदान देने के पश्चात 10 अगस्त, 2015 में सुंदर पिचाई गूगल के सर्वोच्च पद CEO के लिए चुने गये. सुंदर पिचाई नें CEO की कामयाबी तक का सफर खुद के हुनर के दम पर हासिल किया. बहुत ही कम उम्र में उन्होंने सफलता के शिखर को छुआ है.

गूगल के लिए काम कर रहे पिचाई एक वक्त गूगल छोड़ने का मन बना लिये थे. लेकिन गूगल ने उन्हें 305 करोड़ रुपये देकर नौकरी ना छोड़ने को राजी कर लिया. वर्तमान में 12 सालों से पिचाई अपना बहुमूल्य योगदान दे रहें है और दुनिया को आधुनिक टेक्नोलॉजी से जोड़ने का प्रयास कर रहें है. पिचाई के कामयाबी की सबसे बड़ी वजह गूगल क्रोम की खोज है. गूगल क्रोम ने उन्हें रातों-रात लोकप्रिय बना दिया. पिचाई के सहयोगियों के अनुसार सुंदर पिचाई एक स्किल्ड डिप्लोमेट हैं. गूगल के एक अधिकारी का तो यह भी कहना है कि कंपनी में उन्हें एक भी ऐसा कर्मचारी नहीं मिलेगा जो पिचाई को पसंद नहीं करता हो.

सुंदर पिचाई नें गूगल ज्वाइन करने से पहले कई बड़े ऑफर्स छोड़ दिए थे. इन्हें हायर स्टडी के लिए भी अच्छे ऑफर मिले पर इन्होंने सभी को छोड़ दिया. सभी अच्छी जॉब्स को छोड़ कर पिचाई नें उस समय तो अपने परिवार वालो को चौका दिया था. फिर पिचाई ने स्टेनफोर्ड में एक इंजिनियर एवम एप्लाइड मेनेजर की जॉब को भी छोड़ा. फिर इन्होंने सिलिकॉन वैली में सेमीकंडकटर मेकर की जॉब को भी छोड़ दिया. अमेरिका जाने का खर्चा उठाने के लिए पिचाई के पिता ने कर्ज के लिए बैंक में आवेदन दिया था. लेकिन उन्हें लोन नहीं मिल पाया तो पिचाई के पिता को अपनी सेविंग खर्च करनी पड़ी. कहा जाता है सुंदर पिचाई को बचपन से ही नये-नये टेक्नोलॉजी से बहुत प्यार था. पिचाई जब छोटे थे तो उनके घर में टेलीफोन कनेक्शन आया था. फोन पर वे जो भी नंबर डायल करते थे. उन्हें हर वो फोन नम्बर याद रहते थे.

पिचाई अपनी काबिलियत के दम पर भारतीय मूल के उन लोगों में शामिल हो गये, जो 400 अरब डॉलर व्यापार करने वाली International Companies के शीर्ष अधिकारी है. सुंदर पिचाई का जीवन परिचय लिखने के बाद यही समझ आता हैं कि जरुरी नहीं व्यक्ति के पास धन-दौलत जैसी अपार सुविधा हो तब ही वो अच्छी पढ़ाई या कामयाबी हासिल कर सकते हैं. कई व्यक्तियों की यह धारणा होती हैं स्कूल की दूसरी गतिविधियों जैसे खेल-कूद आदि में स्टूडेंट का ध्यान जाने से वो भविष्य में अपना अच्छा करियर नहीं बना सकते. सुंदर पिचाई के जीवन परिचय को पढने के बाद यह दोनों ही बाते गलत सिद्ध होती हैं. छोटे से घर और अनेक संघर्षो से निकल कर दुनिया की सबसे प्रमुख तकनीकी कंपनी के CEO तक का सुंदर पिचाई का सफर किसी परिकथा से कम आकर्षक नहीं. अब हाल ही में उन्होंने चेन्नई में अपने माता-पिता के लिए करोड़ों की लागत पर एक मकान खरीदा है. सुंदर पिचाई की पत्नी का नाम अंजलि है. निश्चय ही सुंदर पिचाई भारतीयों के लिए नये रोल-मॉडल है और यह आने वाले दिनों में उनके लिए ऐसे ही प्रेरणा का काम करते रहेंगे. हम सभी भारतीयों की तरफ से सुंदर पिचई को बहुत सारी शुभकामनायें.

शेयर करें