15 अगस्त से जुड़े कुछ सवाल जिनके जवाब शायद आपको नहीं पता

आज 15 अगस्त को हम देश का 70वां स्वतंत्रता दिवस मना रहे हैं। हमें अंग्रेजों से आजादी दिलाने वाले हर स्वतंत्रता सेनानियों का जितना नमन किया जाये कम है। आजादी से जुड़े कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब बहुत कम लोग ही जानते हैं। आइये आज आजादी के मौके पर आपको ऐसे ही कुछ सवाल और उनके जवाब बताते हैं जो शायद आप भी नहीं जानते होंगे।

सवाल 1 – 1947 में ही क्यों हुआ भारत आजाद ?

जवाब – 1947 में ब्रिटिश लॉर्ड माउंटबैटन भारत के आखिरी वाइसराय चुने गए थे और उन्ही के कंधे पर भारत को आजाद करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

वैसे तो भारत को 1948 में आजादी देने की योजना थी लेकिन इससे पहले देश में मुस्लिमाें ने अपने लिए देश बनाने की मांग की और इसी के चलते देश में साम्प्रदायिक दंगे भी शुरू हो गए। इस हालात को देखते हुए 1947 में ही भारत और पाकिस्तान को आजाद करने का निर्णय ले लिया गया।

सवाल 2 – भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त की तारीख ही क्यों चुनी गई ?

जवाब – भारत के आखिरी वाइसराय लॉर्ड माउंटबैटन के मुताबिक उनके लिए 15 अगस्त एक दिन लकी था क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के समय लॉर्ड माउंटबैटन अलाइड फोर्सेस के कमांडर थे और उस समय 15 अगस्त, 1945 वाले दिन जापानी आर्मी ने उनके सामने अपना समर्पण किया था। इसी कारण भारत की आजादी के लिए भी 15 अगस्त की तारीख ही चुनी गई।

सवाल 3 – क्या वजह थी जो रात 12 बजे ही भारत की आजादी का समय निर्धारित हुआ ?

जवाब – जब माउंटबैटन ने भारत की आजादी के लिए 15 अगस्त, 1947 की तारीख तय की तो कुछ ज्योतिषियों ने इस तारीख को अशुभ बताया लेकिन माउंटबैटन 15 अगस्त को अपने लिए शुभ मानते थे। तो इससे बचने के लिए 14 अगस्त की रात 12 बजे का समय भारत की आजादी के लिए चुना गया क्योंकि अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार रात 12 बजे के बाद दूसरा दिन शुरू हो जाता है और भारत के मुताबिक सूर्योदय के बाद दूसरे दिन की शुरुआत होती है।

सवाल 4 – भारत की राजधानी के लिए दिल्ली को ही क्यों चुना गया ?

जवाब – दिल्ली को भारत की राजधानी बनाने का निर्णय तो ब्रिटिश काल में 12 दिसंबर, 1911 को ही हो गया था। इसके पीछे एक वजह ये भी थी की दिल्ली देश के बीच में था और यहाँ रहकर अंग्रेजों के लिए भारत पर राज करना आसान हो जाता था। आजादी के बाद नयी भारत सरकार ने निर्णय ना बदलते हुए दिल्ली को ही भारत की राजधानी के तौर पर चुना।

सवाल 5 – किसने गांधीजी को सबसे पहले राष्ट्रपिता कहकर संबोधित किया था ?

जवाब – 4 जून, 1944 के दिन सुभाष चन्द्र बोस रेडियो पर अपना सन्देश जनता को दे रहे थे और इसी बीच इन्होंने महात्मा गांधी को ‘देश का पिता (राष्ट्रपिता) कहकर संबोधित किया था। इसके बाद जब गाँधी जी का स्वर्गवास हुआ था उसके बाद उस समय देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने रेडियों के जरिये जनता को यही मैसेज दिया था की ‘राष्ट्रपिता अब नहीं रहे’।

सवाल 6 – आजादी के समय महात्मा गांधी कहां थे?

जवाब – 15 अगस्त, 1947 को जब पूरा देश आजादी के जश्न में डूबा हुआ था तब महात्मा गांधी वहां मौजूद नहीं थे। दरअसल उस समय बंगाल के नोआखली में हिन्दू और मुसलमानों के बीच हिंसा का माहौल था और गांधी जी उसी हिंसा के विरोध में अनशन पर बैठे थे। जब उन्हें आजादी का खत लिखा गया तो उन्होंने उस खत के जवाब में लिखा की “कलकत्ता में हिंदू-मुस्लिम एक-दूसरे की जान ले रहे हैं, इन हालात में मैं आजादी का जश्न कैसे मना सकता हूं?”

सवाल 7 – राष्ट्रगान के तौर पर जन-गण-मन को ही क्यों चुना गया ?

जवाब – आजादी के तीन साल बाद भी देश का कोई राष्ट्रगान नहीं था तब 1950 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे गए ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान के तौर पर चुना गया।

‘जन गण मन’ को ही राष्ट्रगान बनाने के पीछे कारण ये था की इससे देशवासी एकजुट हो जाते थे।

सवाल 8 – तिरंगा ही क्यों बना राष्ट्रीय ध्वज

जवाब – भारत देश के सबसे पहले बने झंडे में ऊपर लाल और नीचे हरा रंग दिया गया था ये दोनों रंग हिंदू और मुसलमान के प्रतीक माने जाते थे। बाद में इसके लाल रंग को केसरिया रंग में बदल दिया गया और झंडे में इस केसरिया और हरे रंग के बीच में एक सफ़ेद रंग की पट्टी दी गई जिस पर चरखा बनाया गया और इसे ही राष्ट्र ध्वज माना गया।

इसके बाद पिंगली वैंकेया ने तिरंगा झंडा बनाया जिसमे ऊपर केसरिया बीच में सफ़ेद और नीचे हरे रंग की पट्टी बनाई गई और सफ़ेद पट्टी पर चरखे की जगह अशोक चक्र को बनाया गया। इस तिरंगे में किये गए बदलाव का कारण था की इसे किसी भी समुदाय विशेष से जोड़कर कभी ना देखा जाये और अशोक चक्र को धर्म और शासन के प्रतीक होने की वजह से जोड़ा गया था।

22 जुलाई, 1947 को इस तिरंगे झंडे को संविधान सभा में प्रस्तावित किया गया और तभी से ये तिरंगा भारत के राष्ट्रध्वज के रूप में स्थापित हो गया।

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