कहीँ आपके रिश्ते को जला न दे ईर्ष्या

एक रूसी कहावत है कि ईर्ष्या और प्रेम बहनेँ हैँ। इसलिए जहाँ प्रेम होता है वहाँ पर थोडी बहुत जलन भी होती है। हर रिश्ते मेँ थोडी नोंक-झोंक और जलन होना स्वाभाविक है। आखिरकार ईर्ष्या मानव स्वभाव का ही एक हिस्सा है। लेकिन जब जलन अपनी हद पार देती है तो न सिर्फ परेशानी का सबब बन जाती है बल्कि कभी-कभी तो जलन की एक छोटी-सी चिंगारी आपके पूरे रिश्ते को जलाकर रख देती है। ईर्ष्या एक ऐसा भाव है जो मनुष्य के सालोँ के रिश्ते व उसके प्रेम को दाव पर लगा देता है। इसके कारण मनुष्य न सिर्फ खुद को बल्कि सामने वाले व्यक्ति को भी शारीरिक व मानसिक रूप से कष्ट पहुंचाता है। इसलिए जरूरी है कि आप अपने रिश्ते को बिगाडने से पहले ही सम्भाल लेँ-

क्योँ होती है ईर्ष्या – ईर्ष्या मुख्य रूप को किसी व्यक्ति, रिश्ते या पद को खोने के डर से उत्पन्न होती है। जब हम अनिश्चितताओँ के भंवर मेँ फंसे होते हैँ तो जलन जैसी भावनाएँ हमारे मन मेँ अपनी जगह बना लेती हैँ। लेकिन यह किसी भी रिश्ते व आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। बाइबिल मेँ भी कहा गया है कि मन की शांति शरीर को स्वस्थ बनाती है, लेकिन ईर्ष्या एक कैंसर के समान है। इसलिए जितना हो सके, खुद को इस बीमारी से बचाना चाहिए।

बदलेँ अपना नजरिया – अगर आप अपने भाई-बहन या किसी सहयोगी से ईर्ष्या करते हैँ तो उसे नकारात्मक रूप मेँ न लेँ। कोई भी चीज या भाव अच्छा बुरा नहीँ होता। हमारी सोच ही उसे अच्छा या बुरा बनाती है। आखिरकार पानी का गिलास आधा भरा है या खाली, यह तो देखने वाले के नजरिए पर ही निर्भर करता है। ठीक इसी प्रकार, किसी अपने भाई-बहन की तारीफ या सहकर्मी की तरक्की से जलने की बजाय यह सोचेँ कि उसमेँ ऐसा क्या खास है या उसने ऐसा क्या किया है, जिससे वह प्रशंसा का पात्र बना है। जब आपको जवाब मिल जाएगा तो आप खुद को भी बेहतर बनाने का भरपूर प्रयास करेँ। याद रखेँ कि मेहनत का फल अवश्य मिलता है।

यूँ बचाएँ रिश्ते – किसी भी रिश्ते मेँ गलतफहमी को दूर करने का एकमात्र रास्ता बातचीत ही है। और इसके लिए सामने वाले व्यक्ति से ही शुरूआत की अपेक्षा नहीँ करनी चाहिए। रिश्तोँ को बचाने के लिए आप स्वयँ भी पहल करेँ। मसलन, अगर आपके पार्टनर ने आपको जलाने के लिए किसी के साथ फलर्टिंग की हो तो बात करके समस्या को सुलझा सकते हैँ। साथ ही एक-दूसरे को यह भी बताएँ कि उनकी आपके जीवन मेँ कितनी अहमियत है और उनका यह रवैया आपको दुख पहुंचाता है। रिश्ता चाहे जो भी हो उसे ईर्ष्या से नहीँ बल्कि प्रेम से संजोए। एक महान विचारक ने भी कहा था कि ईर्ष्या हमेशा प्यार के साथ पैदा होता है लेकिन हमेशा इसके साथ मरता नहीँ है। इसलिए अपने रिश्तोँ मेँ प्रेम को जीवित रखेँ, ईर्ष्या को नहीँ।

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