स्पॉन्डिलाइटिस क्‍या है?

मई 19, 2018

मॉडर्न लाइफस्टाइल ने हमें बहुत सी सुविधाएँ दी हैं और इन सुविधाओं का आनंद उठाते-उठाते हम कब बीमारियों की गिरफ्त में आते चले गए, इसका हमें अन्दाज़ा भी नहीं हो सका। स्पॉन्डिलाइटिस जैसी बीमारियां इस आरामपसंद लाइफस्टाइल की ही देन है। ऐसे में आपके लिए ये जानना बेहतर होगा कि स्पॉन्डिलाइटिस क्या है और क्यों होता है। तो चलिए, आज बात करते हैं स्पॉन्डिलाइटिस के बारे में-

स्पोंडियलोसिस को स्पॉन्डिलाइटिस के नाम से भी जाना जाता है। ये दो शब्दों से मिलकर बना है जिसमें स्पोंडिल का अर्थ है वर्टिब्रा और आइटिस का अर्थ है सूजन यानि स्पॉन्डिलाइटिस ऐसा रोग है जिसमें रीढ़ की हड्डी में सूजन आने लगती है। हमारी रीढ़ की हड्डियां जब असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं या अपने स्थान से खिसकने लगती हैं तो बैक बोन में दर्द की शिकायत रहना शुरू हो जाता है।

आमतौर पर 40 साल की उम्र पार कर लेने वाले महिला और पुरुषों को ये शिकायत हुआ करती थी लेकिन अब युवाओं की कम्फर्टेबल लाइफस्टाइल के चलते ये बीमारी बहुत कम उम्र में भी होने लग गयी है। ग़लत पॉश्चर में बैठना इस रोग का सबसे बड़ा कारण है और कैल्शियम की कमी के कारण भी ये तकलीफ बढ़ती जाती है।

आज के इस इलेक्ट्रॉनिक वर्ल्ड में लम्बे समय तक कंप्यूटर के सामने बैठे रहने के कारण युवाओं में स्पॉन्डिलाइटिस की प्रॉब्लम काफी बढ़ गयी है।

स्पॉन्डिलाइटिस के प्रकार-

1. सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस – स्पॉन्डिलाइटिस के इस प्रकार में गर्दन के निचले हिस्सों, दोनों कन्धों, कॉलर बोन और कन्धों के जोड़ में दर्द रहता है। इससे गर्दन घुमाने में तकलीफ होती है और मांसपेशियों के कमजोर हो जाने के कारण बाँहों को हिलाने में भी कठिनाई अनुभव होती है।

2. लम्बर स्पॉन्डिलाइटिस – इसमें स्पाइन के कमर के निचले हिस्से में दर्द होता है।

3. एन्कायलूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस – स्पॉन्डिलाइटिस के इस प्रकार में रीढ़ की हड्डी के अलावा कन्धों और कूल्हों के जोड़ों में दर्द रहता है। इसमें रीढ़ की हड्डी, एड़ियां, कूल्हे, घुटने, कंधे, गर्दन और जबड़े कड़े हो जाते हैं।

स्पॉन्डिलाइटिस होने के कारण-

स्पॉन्डिलाइटिस के लक्षण-

स्पॉन्डिलाइटिस में राहत पाने के लिए क्या करे-

दोस्तों, अब आप स्पॉन्डिलाइटिस से परिचित हो चुके हैं और ये भी जान चुके हैं कि ये गंभीर समस्या आज एक आम बात हो गयी है और इसका कारण है हमारी अव्यवस्थित लाइफस्टाइल। ऐसे में बेहतर तो यही होगा कि हम अपनी आरामपसंद जिंदगी को थोड़ा व्यवस्थित बना लें और सुस्त और निष्क्रिय दिनचर्या को थोड़ा एक्टिव बनाने के लिए प्रयास करें। ऐसी कोशिश हमें सामान्य सी दिखने वाली इस बड़ी तकलीफ से राहत दिला सकेगी। उम्मीद है कि आपको ये जानकारी पसंद आयी होगी और आप भी अपनी लाइफ को एक्टिव और एनर्जेटिक बनाने का प्रयास जरूर करेंगे।

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