स्पाइवेयर क्या होता है?

स्पाई यानी जासूस के कामों से तो आप परिचित ही होंगे कि किस तरह एक जासूस किसी व्यक्ति से जुड़ी छोटी से छोटी हर जानकारी का पता लगा लेता है और दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा देता है और जब बात इलेक्ट्रॉनिक वर्ल्ड की हो तो जासूसी के ये तरीके भी अलग हो जाते हैं यानी कंप्यूटर में से पर्सनल इन्फॉर्मेशन को निकालकर किसी दूसरे को देने का काम करने वाला जासूस स्पाइवेयर कहलाता है। ऐसे में इस जासूस के बारे में जानना आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है ताकि आप अपनी कॉन्फिडेंशियल इन्फॉर्मेशन को सुरक्षित रख सकें। तो चलिए, आज जानते हैं कंप्यूटर में छुपे इस स्पाइवेयर के बारे में–

स्पाइवेयर एक ऐसा सॉफ्टवेयर प्रोग्राम है जो आपके कंप्यूटर और मोबाइल से ऐसी गुप्त और पर्सनल इन्फॉर्मेशन चुरा लेता है जो आपके लिए बेहद जरुरी होती है और जिनके चोरी होने पर आप बहुत बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं। इसका इस्तेमाल ऐसे लोगों द्वारा करवाया जाता है जो आपकी जानकारियां लेकर आपको नुकसान पहुँचाना चाहते हैं और इसके लिए स्पाइवेयर जीमेल अकाउंट हैक करने और बैंक अकाउंट डिटेल्स चोरी करने जैसे कई कामों को अंजाम देता है और हैरानी की बात ये है कि यूजर को इसका अंदेशा भी नहीं हो पाता।

ये स्पाइवेयर आता कहाँ से है आप सोच रहे होंगे कि बिना इंस्टॉल किये ये स्पायवेयर कैसे आपके कंप्यूटर या मोबाइल में घुस सकता है तो इसका जवाब ये है कि हम खुद अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते है जिनके कारण स्पाइवेयर की पहुँच हमारे पर्सनल डेटा तक हो जाती है। अक्सर हमसे कहा जाता है कि हमेशा ऑफिशियल साइट ही खोलें लेकिन मूवी, गेम्स जैसी चीज़ों के लिए हम कई छोटी-मोटी साइट भी ओपन कर लेते हैं और टोरेंट्स का यूज भी करते हैं। टोरेंट्स के सॉफ्टवेयर में ऐसी हजारों जरुरी फाइलें होती हैं जो किसी सॉफ्टवेयर को इंस्टॉल करने के लिए जरुरी होती है लेकिन इन फाइल्स के साथ एक छोटा सा स्पाइवेयर भी होता है जो इंस्टॉल हो जाता है और यूजर इसे पहचान भी नहीं पाता।

ये कैसे काम करता है – बहुत सी फाइलों में छुपे स्पाइवेयर को एक सामान्य यूजर डिटेक्ट नहीं कर पाता और जब आपकी डिवाइस इंटरनेट से कनेक्ट होती है और आप उसमें अपने बैंक अकाउंट सम्बन्धी कोई डिटेल भरते हैं या कोई पर्सनल इन्फो चेक करते हैं तो ये स्पाइवेयर आपकी इन गुप्त जानकारियों को चुरा लेता है और इसके जरिये ये सारी जानकारियां उस व्यक्ति तक पहुँच जाती है जिसने आपके सिस्टम में इस जासूस की एंट्री करवाई होती है। इसके बाद उस व्यक्ति के पास आपसे जुड़ी ऐसी इन्फॉर्मेशन पहुँच चुकी होती है जिसका इस्तेमाल करके वो आपको ब्लैकमेल कर सकता है, आपका बैंक अकाउंट खाली कर सकता है और आपके मेल अकाउंट का गलत इस्तेमाल करके आपको भारी मुश्किल में डाल सकता है।

इस जासूस से बचें कैसे – अगर आप अपने कंप्यूटर और मोबाइल में एक अच्छा एंटी-वायरस इस्तेमाल करते हैं तो आप बहुत हद तक इस तरह के जासूसों से बचाव कर सकते हैं। इसे समय-समय पर अपडेट करते रहना भी जरुरी है और अपने पीसी को स्कैन करने से भी इस ख़तरे से काफी हद तक बचाव संभव है। इसके अलावा ये भी ध्यान रखें कि इंटरनेट पर कोई भी जानकारी सर्च करते समय केवल ऑथेंटिक वेबसाइट पर ही सर्च करें।

दोस्तों, अब आप जान चुके हैं कि ये स्पायवेयर कितने खतरनाक सॉफ्टवेयर प्रोग्राम होते हैं और इनसे बचाव के लिए क्या किया जाना चाहिए इसलिए आप भी अपने मोबाइल और पीसी को सुरक्षित कर लीजिये ताकि अचानक हुयी ऐसी चोरी से आपको ठगा सा महसूस ना करना पड़े।

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