स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़ी बेहद दिलचस्प जानकारियां

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स्वामी विवेकानंद एक ऐसी शख्सियत हैं जो आज सभी के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है। स्वामी विवेकानंद ने भारत के नैतिक और जीवन मूल्यों को दुनिया भर से रूबरू करवाया। स्वामी विवेकानंद के विचारों को अगर हम जीवन में अपना लें तो हम सफलता की सीढ़ी चढ़ सकते हैं। 12 जनवरी को स्वामी विवेकानंद के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है। आइये आज आपको महान शख्सियत वाले स्वामी विवेकानंद से जुड़े कुछ रोचक तथ्य बताते हैं।

1. स्वामी विवेकानंद एक हिन्दू परिवार में जन्मे हैं, इनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था।

2. स्वामी विवेकानंद की माँ ने इनका नाम वीरेश्वर रखा था लेकिन बाद में इनका नाम नरेंद्रनाथ दत्त रखा गया।

3. नरेन्द्रनाथ से विवेकानंद का नाम उन्हें खेत्री के महाराजा अजित सिंह ने दिया था।

4. स्वामी विवेकानंद ने बी.ए. की डिग्री प्राप्त कर ली थी लेकिन फिर भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही थी और इसी कारण उनका भगवान पर से विश्वास उठ गया था और वो नास्तिक बन गए थे।

5. रामकृष्ण परमहंस को स्वामी विवेकानंद अपना गुरु मानते थे लेकिन फिर भी उन्हें अपने गुरु पर विश्वास नहीं रहता था वो हमेशा उनकी बातों पर शक करते थे और उनकी परीक्षा लेते रहते थे जब तक उन्हें अपना उत्तर नहीं मिल जाता था।

6. 1893 में अमेरिका के शिकागो में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व स्वामी विवेकानंद ने ही किया था और उन्होंने अपने भाषण में पहले शब्द कहे थे ‘मेरे अमरीकी भाइयों एवं बहनों’ और उनके इस वाक्य ने वहां सभी को काफी प्रभावित कर दिया था।

7. 11 सितम्बर को “विश्व भाईचारा दिवस” के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन स्वामी विवेकानंद ने शिकागो धर्म संसद में अपना भाषण दिया था।

8. स्वामी विवेकानंद 31 बिमारियों से ग्रसित थे और उनकी सबसे बड़ी समस्या थी अनिद्रा। उन्होंने 29 मई, 1897 को शशि भूषण घोष को लिखे अपने एक खत में भी इसका जिक्र किया था की उन्हें बिस्तर पर लेटते ही कभी नींद नहीं आती।

9. कर्म योग (1896), राज योग (1896), वेदांत शास्त्र (1896), कोलम्बो से अल्मोरा तक के भाषण (1897), भक्ति योग आदि किताबें स्वामी विवेकानंद ने ही लिखी हैं।

10. स्वामी विवेकानंद ने अपनी समाधी की अवस्था में अपने प्राण त्यागे थे। विवेकानंद की मृत्यु तीसरी बार दिल का दौरा पड़ने से हुई थी। स्वामी विवेकानंद ने भविष्यवाणी की थी की वो 40 वर्ष की आयु तक जिन्दा नहीं रहेंगे और उनकी ये भविष्य वाणी तब सही साबित हुई जब उनकी 39 वर्ष की उम्र में 4 जुलाई 1902 को मृत्यु हो गई।

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