स्वास्थ्य बीमा क्या है और हमारे लिए क्यों जरूरी है?

दिसम्बर 27, 2017

अब हम बात करते हैं जिंदगी के उस पहलू की तरफ जहाँ हम सब जानते हुए भी अनजान बनना चाहते हैं। हाँ आप बिल्कुल सही समझ रहे हैं। मैं बात कर रहा हूँ स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी की। स्वास्थ्य बीमा फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा है। हर व्यक्ति को ज़रूर से स्वास्थ्य बीमा लेना चाहिये।

हम जब भी कोई वस्तु क्रय करते हैं तो अपने स्वभाववश मोल भाव करते हैं, केवल एक ही जगह है अस्पताल या डॉक्टर जहाँ पर हम विवश हो जाते हैं और बिना मोल भाव के डॉक्टर्स से केवल बीमारी ठीक होने की प्रार्थना करते हैं।

स्वास्थ्य बीमा एक ऐसा बीमा होता है जो पॉलिसी होल्डर के किसी भी वजह से बीमार होने या दुर्घटना होने पर इलाज में होने वाले खर्चे का भुगतान करता है। आज के भौतिकवादी युग में सारे अच्छे अस्पताल फाइव स्टार होटल हो गये हैं। ज़रा-ज़रा सी बीमारी पर 1-2 लाख रूपया खर्चा आ जाता है, बड़ी बीमारी के खर्चे की तो क्या बात करें। स्वास्थ्य बीमा नहीं होने पर कई व्यक्ति चक्रव्यूह में फँस जाते हैं। कई उचित तरीके से इलाज नहीं करा पाते।

दुर्भाग्य से आज भी हिन्दुस्तान में 11-12% लोगों ने ही उचित स्वास्थ्य बीमा ले रखा है। मतलब या तो स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ले ही नहीं रखी या बहुत कम समय (मात्र 1-2 लाख) की ले रखी है। मेरा निवेदन है कि हर व्यक्ति को उपयुक्त राशि की स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेनी चाहिये। न्यूनतम 3 से 5 लाख की पॉलिसी तो हर व्यक्ति को कम से कम लेनी चाहिये।

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी लेते समय विशेष ध्यान यह रखना चाहिये कि कुछ भी छिपाना नहीं है। अगर कोई पुरानी बीमारी है तो उसे बिना झिझक ज़रूर लिखें – जिससे क्लेम के समय दिक्कत नहीं आये। मेरा व्यक्तिगत मानना है कि क्लेम जो रिजेक्ट होते हैं उनके पीछे मुख्य कारण पॉलिसी होल्डर एसेट का सही बात पर बीमारी छुपाना होता है। हमें प्रपोजल फॉर्म को स्वयं समझकर सही तरीके से भरना चाहिये और कुछ भी छिपाना नहीं चाहिये। ऐसा करने पर सामान्यतः क्लेम के समय कभी भी दिक्कत नहीं आती।

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी कई तरह की आने लगी है। इंडिविजुअल और फैमिली होल्डर का प्रचलन बहुत ज्यादा है। मेरी व्यक्तिगत राय यह है कि 50/55 की आयु तक फ्लोट्स पॉलिसी लेनी चाहिये और इसमें बाद में कोई बीमारी होने पर बड़ी रकम की इंडिविजुअल पॉलिसी ले लेनी चाहिये। कारण 50-55 वर्ष की उम्र के बाद बीमार होने से रिस्क ज्यादा हो जाते हैं।

आजकल विकलांगता में व हार्ट की सर्जरी कराये हुये मरीज भी पॉलिसी ले सकते हैं। पॉलिसी आजकल ताउम्र चलती है। प्राइवेट नौकरी पेशा व्यक्तियों को भी साइड में छोटी पॉलिसी लेकर रखना चाहिये कारण कंपनी की जीवन बीमा पॉलिसी उनके नौकरी जारी रहने तक ही मान्य होती है।

स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में बॉन्ड हमेशा संभालकर रखने चाहिये। इसमें नकद भुगतान कर सकते हैं परन्तु नकद भुगतान करने पर आयकर की छूट नहीं मिलती।

एक और विशेष बात का ध्यान रखना चाहिये कि स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी रिन्यू करते समय ग्रेस पीरियड का कभी भी उपयोग नहीं करना चाहिये। ग्रेस पीरियड में पॉलिसी होल्डर की कोई भी बीमारी कवर नहीं होती। स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी का पॉलिसी होल्डर को अपने घर पर अपने जीवनसाथी को भी बताना चाहिये। कई केस ऐसे देखने में आये हैं कि पॉलिसी होल्डर ने स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ले रखी है और घर पर बता भी नहीं रखा। एक्सीडेंट की वजह से एडमिट हो गया या कोमा में चला गया और फैमिली खर्चा करती रही। अतः अपने फाइनेंशियल एडवाइजर के साथ बैठकर स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ढंग से समझकर लेनी चाहिये।

sodhani-1 स्वास्थ्य बीमा क्या है और हमारे लिए क्यों जरूरी है?ये लेख फाइनेंशियल एडवाइजर श्री राजेश कुमार सोढानी, सोढानी इंवेस्टमेंट्स, जयपुर द्वारा प्रस्तुत है। फाइनेंशियल प्लानिंग पर आधारित ये लेख आपको कैसा लगा? अगर इस लेख से आपको कोई भी मदद मिलती है तो हमें बहुत खुशी होगी। अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे। हमारी शुभकामनाएँ आपके साथ है, हमेशा स्वस्थ रहे और खुश रहे।

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