सेहत के लिए धीमा ज़हर है तम्बाकू

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स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन की कामना हम सभी करते है। हर व्यक्ति में ये क्षमता भी होती है कि स्वयं का अच्छा और बुरा जान सके और उसके अनुसार अपने जीवन को ढाल सके। लेकिन बहुत बार आर्थिक तंगी, निराशा या खराब संगत के चलते लोग तम्बाकू के सेवन जैसी ग़लत राह चुन लेते है जो उनके जीवन को ग़लत दिशा में मोड़ देती है।

तम्बाकू का सेवन पहले के ज़माने में जहाँ हुक्का-चिल्लम के रूप में किया जाता था वहीँ आज इसके अनेक विकल्प मौजूद है जैसे बीड़ी, सिगरेट, गुटका और हुक्का। पहले जहाँ बड़े बुज़ुर्गों के शौक के रूप में इसका चलन था वहीँ आज युवा भी इसमें बहुत अधिक सक्रिय हो गये है। अमीरों के एक शौक से इसकी शुरुआत हुयी और देखते ही देखते इसने अपने पाँव हर तबके में पसार लिए।

तम्बाकू में निकोटिन, कार्बन मोनोऑक्साइड और टार मौजूद होता है। निकोटिन एक जहरीला पदार्थ है जो नशा उत्पन्न करता है । निकोटीन, तंबाकू का सेवन करने वालों के व्यवहार को प्रभावित करता हैं। यह मस्तिष्क में रिसेप्टर्स को बांधता हैं, जहाँ ये मस्तिष्क के चयापचय को प्रभावित करता है और पूरे शरीर में वितरित हो जाता है। वहीँ तम्बाकू में मौजूद कार्बन मोनोऑक्साइड रक्त में ले जाने वाली ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देता हैं। यह सांस लेने में तकलीफ़ का कारण बनता है और तम्बाकू में मौज़ूद टार एक चिपचिपा अवशेष हैं, जिसमें बेन्जोपाइरीन होता है जो घातक कैंसर होने वाले “कारक एजेंटों” के नाम से जाना जाता हैं। इनके अलावा तम्बाकू में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, अमोनिया, हाइड्रोजन साइनाइड और एल्कोहल जैसे कई यौगिक पाए जाते है जो कैंसर का कारण बनते है।

ये तो आप जानते ही है कि तम्बाकू पूरे शरीर के लिए घातक होता है लेकिन ये शरीर के किस अंग को किस प्रकार प्रभवित करता है, ये जानना अभी बाकी है। तो चलिए, आज आपको बताते है तम्बाकू का शरीर के हर अंग पर पड़ने वाला प्रभाव-

मस्तिष्क पर प्रभाव
तम्बाकू का किसी भी रूप में सेवन किये जाने का एक प्रमुख कारण होता है कि यह व्यक्ति को अच्छा महसूस कराता है और कभी कभी उदासी, निराशा या उत्सुकता जैसी स्थिति का अहसास होता है। तम्बाकू का नियमित सेवन सिर दर्द और चक्कर आने जैसी स्थिति भी पैदा करता है। एक शोध के अनुसार, निकोटिन के सेवन का मस्तिष्क के मेटाबोलिज्म से गहरा रिश्ता होता है।

फेफड़ों पर प्रभाव
फेफड़ों में शुद्ध और अशुद्ध रक्त के संचरण में धमनी और शिराएं प्रयुक्त होती है। तम्बाकू में मौजूद निकोटिन महाधमनी को सख्‍त कर देता है। महाधमनी एक बड़ी धमनी होती है जो पूरे शरीर के लिए रक्त की आपूर्ति करती है। तम्बाकू के सेवन से सांस लेने में तकलीफ होती है क्योंकि धूम्रपान फेफड़ों को नुकसान पहुँचाता है और ये नुकसान कई बार फेफड़ों के कैंसर के रूप में भी नज़र आता है।

हृदय पर प्रभाव
तम्बाकू में मौज़ूद रसायन धड़कन को बढ़ा देते है और पूरे शरीर में रक्त वाहिकाओं को कस देती है जिससे हृदय रोग या दौरा पड़ने की सम्भावना बढ़ जाती है।

माँसपेशियों पर प्रभाव
तम्बाकू का नियमित सेवन करने से मांसपेशियों में रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह कम हो जाता है जिसके कारण थकान तो महसूस होती ही है साथ ही खेलकूद या व्यायाम जैसी क्रियाएँ करने पर हल्की सी चोट भी ज्यादा महसूस होती है।

हड्डियों पर प्रभाव
निकोटिन का अधिक सेवन फ्रैक्चर होने का ख़तरा बढ़ा देता है। जो महिलाएं निकोटिन का सेवन करती हैं उनको सबसे अधिक रीढ़ की हड्डी की समस्या रहती हैं। तम्बाकू के सेवन से स्लिप डिस्क और ओस्टीओपोरेसिस जैसी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है।

पाचन तंत्र पर प्रभाव
तम्बाकू का सेवन विशेषकर जब धूम्रपान के रूप में किया जाता है तो पूरा पाचन तंत्र ही क्षतिग्रस्त हो जाता है। नियमित धूम्रपान अग्नाशय के कैंसर और पेप्टिक अल्सर होने की सम्भावना को भी बढ़ा देता है।

मुंह पर प्रभाव
तंबाकू में कार्बन मोनोआक्साइड और निकोटीन पाया जाता है इसलिए तंबाकू का सेवन दांतों पर दाग और सांस की बदबू जैसी समस्‍या उत्पन्न करता है। इसके अलावा तंबाकू का उपयोग गला, मुंह और आहार नली के कैंसर का खतरा भी पैदा करता है।

त्वचा और बालों पर प्रभाव
तंबाकू उत्पादों का उपयोग त्‍वचा पर झुर्रियां ला देता है और त्वचा को शुष्क और पीली बना देता है साथ ही बालों को पतला और कमज़ोर बना देता है।

अब आप जान चुके हैं कि तम्बाकू किस प्रकार शरीर के हर एक अंग को खोखला कर देता है और इसके सेवन से कोई फ़ायदा भी नहीं होता। इसलिए आप इससे दूरी बनाये रखे और अगर आप इसकी गिरफ्त में आ चुके है तो इसे अपनाने की बजाए इससे दूरी बनाना शुरू कीजिये। हर व्यक्ति में सामर्थ है कि अपनी ग़लतियों को सुधार सके। तो फिर देर किस बात की, आज ही से छोटे छोटे प्रयास शुरू कर दीजिये तम्बाकू को अलविदा कहने के लिए और इस तरह अपने जीवन को फिर से सही दिशा में ले आइये।

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