जिका वायरस के लक्षण, बचाव एवं उपचार

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जिका वायरस न केवल खतरनाक है बल्कि यह पूरी दुनिया में बहुत तेजी से भी फैल रहा है, जो की एक चिंता का विषय है।

यह वायरस इतना खतरनाक है की इससे ग्रस्त होने वालों की संख्या अश्चार्यजनक रूप से 4750 का आंकड़ा पार कर चुकी है। इस वायरस से सबसे ज्यादा गर्भवती महिलाएं प्रभाव में आ रही हैं। जिका वायरस आम तौर पर एक मच्छर के काटने से होता है। इस मच्छर को एडिश एइजिप्टी मच्छर के नाम से जाना जाता है। एक सर्वे के अनुसार यह वायरस अभी तक 24 देशों को अपनी चपेट में ले चूका है, जिसकी रोकथाम के लिए प्रयास व् दवाइयाँ विकसित करनी पढ़ेंगी। इसका दुनिया में सबसे पहला केस 1947 में यूगांडा में पाया गया था। इस वायरस का सबसे ज्यादा असर वेणुजुएला नामक देश पर पड़ रहा है! यहाँ अभी तक लगभग 4650 के ऊपर मामले सामने आये हैं जिनमे से सबसे ज्यादा नवजात शिशु हैं जिनकी संख्या चौंका देने वाली है – लगभग 4500 जो एक गहरी चिंता का विषय है। इस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए चेतावनी भी जारी की है।

सन 1947 के बाद अचानक यह वायरस 2015 में तेजी से ब्राजील नामक देश में पाया गया। एक अनुमान के अनुसार पिछले 6 महीनों में इस वायरस ने लगभग 3500 से अधिक शिशुओं को अपने चपेट में ले लिया है। इस वायरस से ग्रस्त शिशुओं का सिर छोटा व् दिमाग अविकसित होता है। इसके मद्देनजर कुछ देशों ने महिलाओं को 2018 तक गर्भवती ना होने की सलाह दी है। इन देशों में एल सल्वाडोर, कोलंबिया, इक्वेडोर जैसे देश शामिल हैं। इस वायरस के इतने भयानक परिणामों को देखते हुए अमेरिका जैसे बड़े व् विकसित देश ने भी अपने देश की महिलाओं को इस जिका वायरस से प्रभावित जगहों पर जाने के निर्देश दिए हैं। भारत सरकार ने भी आगे बढ़कर सतर्कता बरती हुई है। भारत में इसका इतना प्रभाव पड़ा है की एक कार निर्माण की मशहूर कम्पनी टाटा मोटर ने अपने आने वाली नई हैच बैक कार टाटा जिका का नाम ही बदलने का मन बना रही है।

बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है की इस वायरस से लड़ने की अभी तक कोई दवा विकसित नहीं हुई है फिर भी कुछ देश इसकी दवा व् वैक्सीनेशन (टिके) बना लेने का दम रखते हैं। जिनमे भारत भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चूका है।

जिका वायरस के उपचार : भारत द्वारा इस जिका वायरस के 2 टीके तैयार किये गए हैं, जिन्हें एक भारतीय कम्पनी ने विकसित किया है।

जिका वायरस के लक्षण : इस विषाणु से संक्रमित होने पर तेज बुखार, आँखों में जलन त्वचा पर चकते व् मांशपेशियों, जोड़ों में दर्द होता है। यह लगभग 5 से 7 दिन रहता है।

संक्रमण किस मच्छर से : यह एडिश एइजिप्टी मच्छर के काटने पर होता है! विशेषज्ञों की धारणा के अनुसार यही मच्छर, डेंगू व् चिकनगुनिआ के लिए भी जिम्मेदार होते हैं।

संक्रमण से बचने के उपाय : जैसा की हमे ज्ञात है की यह मच्छर के काटने से होता है तो हमे अपने आसपास सफाई रखनी चाहिए। जितना हो सके अपने आप को ढक के रखें, मच्छरदानी व् मच्छरों से बचाव वाली क्रीम का प्रयाग करें। अधिक से अधिक पानी व् तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए।

सावधानियां व् जागरूकता –

भारत के लिए भी चिंता का विषय है। हालाँकि भारत में इसके परिणाम अभी नहीं दिखे हैं पर आने वाले कुछ समय में इसकी संभावनाएं हो सकती हैं। क्योंकि, जैसा की ज्ञात है की भारत देश में मच्छरों की संख्या बहुतायत में है और इस मादा (एडीज) मच्छर के कारण डेंगू, चिकनगुनिआ, मलेरिया की बीमारी फैल चुकी है और यह वो मच्छर(एडीज) है जिसके काटने पर जिका वायरस का खतरा बनता है। भारत सरकार व् इनके विशेषज्ञों ने यह चिंता व्यक्त की है। हमारे यहाँ भी इस जिका वायरस के भयानक परिणाम हो सकते हैं। जबकि भारत सरकार भी इस बात पर जोर दे रही है की इस वायरस से ग्रस्त देशों से आने वाले लोगों की बारीकी से जांच हो व् निर्देश जारी कर रखा है की ऐसे देशों में व् जगहों पर न जायें।

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