टेस्ट ट्यूब बेबी क्या है?

टेस्ट ट्यूब बेबी के बारे में थोड़ी जानकारी आपके पास भी जरूर होगी क्योंकि बीते कुछ वक्त में इस तकनीक का इस्तेमाल करने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। ऐसे में टेस्ट ट्यूब बेबी के बारे में जानकारी लेना आपके लिए फायदेमन्द साबित हो सकता है इसलिए आज बात करते हैं इसी तकनीक की।

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टेस्ट ट्यूब बेबी के पैदा होने से जुड़ी तकनीक का नाम IVF होता है जिसमें महिला के गर्भाशय के बाहर लैब में बच्चे का जन्म कराया जाता है। इस तकनीक के जरिये टेस्ट ट्यूब बेबी पैदा करने के लिए-

  • महिला के अंडाशय से अण्डों को अलग कर लिया जाता है।
  • इन अण्डों को शरीर से बाहर लैब में पुरुष के स्पर्म्स के साथ निषेचित किया जाता है।
  • इससे निर्मित भ्रूण को महिला के गर्भाशय में ट्रांसप्लांट किया जाता है।

IVF तकनीक से फर्टिलाइजेशन की ये प्रक्रिया ऐसी दम्पति में इस्तेमाल की जाती है जिनमें पुरुष में स्पर्म्स की मात्रा बहुत कम होती है।

सामान्य रूप से तो महिला के अंडाशय में एक महीने में बनने वाले अण्डों की संख्या केवल एक ही होती है लेकिन इस तकनीक से महिला को ऐसी दवाएं दी जाती है जिससे अंडाशय में एक से ज्यादा अंडे बनने लगते हैं। ऐसा करने से एम्ब्रयो बनने की सम्भावना बढ़ती है।

इसके बाद महिला को 15 मिनट के लिए बेहोश कर दिया जाता है और अल्ट्रासाउंड इमेज के जरिये महिला की योनि मार्ग से एक पतली सीरिंज उसके अंडाशय तक डाली जाती है ताकि वहां से अण्डों को बाहर निकाला जा सके।

अण्डों को महिला के शरीर से बाहर निकाल लेने के बाद, लैब में पुरुष के वीर्य से स्वस्थ शुक्राणु अलग कर लिए जाते हैं और उनका निषेचन महिला के अण्डों से करवाया जाता है और फर्टिलाइजेशन के लिए इसे इन्क्यूबेटर में रखा जाता है। इन्क्यूबेटर में बनने वाले एम्ब्रयो पर पूरी नज़र रखी जाती है।

2 से 3 दिन में निषेचित अंडा 6 से 8 सेल के एम्ब्रयो में बदल जाता है। इन विकसित भ्रूणों में से अच्छी क्वालिटी के 2-3 भ्रूण को ट्रांसप्लांट के लिए चुन लिया जाता है। इन भ्रूणों में से भी 1 या अधिक स्वस्थ भ्रूण चुने जाते हैं। इस स्वस्थ भ्रूण को डॉक्टर द्वारा महिला के गर्भाशय में एक पतली नली के जरिये पहुंचा दिया जाता है।

इसके बाद की प्रक्रिया महिला के गर्भ में सामान्य रूप से होती है यानी प्रत्यारोपित भ्रूण नेचुरल एम्ब्रयो की तरह गर्भ में विकसित होता है।

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