प्रेरणादायक है अरुंधती भट्टाचार्य का पहली महिला चेयरपर्सन (SBI) तक का सफर

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अरुंधती भट्टाचार्य का सफल जीवन महिलाओं के लिए बहुत ही प्रेरणादायक है. अरुंधती भट्टाचार्य का जन्म कोलकाता में 18 मार्च 1956 को हुआ. इनके पिताजी भिलाई के स्टील प्लांट में कार्यरत थे और माँ होम्योपेथी कंसलटेंट थी. अरुंधती ने अपनी स्कूली पढ़ाई बोकारो से और ग्रेजुएशन कोलकाता से की. अरुंधती का मानना है कि दैनिक जीवन में आने वाली कई चुनौतियां है जो आपकी प्रगति में मदद करती है. उनकी इसी सोच ने आज उन्हें देश की 208 साल पुरानी व सबसे बड़ी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक की पहली महिला चेयरपर्सन तक का मुकाम तय करने में मदद की. उन्होंने यह पद 7 अक्टूबर 2013 को ज्वाइन किया था. उन्होंने अपनी नौकरी की शुरुआत 1977 में PO पद पर स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को ज्वाइन कर के किया था और अपने 38 साल के कार्यकाल में उन्होनें बैंकिंग के कई विभागों फॉरेन एक्सचेंज, ट्रेजरी, रिटेल ऑपरेशन, इनवेस्टमेंट बैंकिंग, कॉरपोरेट डेवलपमेंट आदि में सेवाएं दें चुकी है. अरुंधती स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के न्यूयार्क स्थित ऑफिस में भी काम कर चुकी है. इतना ही नही अरुंधती स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया कैपिटल मार्केट्स में भी मैनेजिंग डायरेक्टर के पद पर रह चुकी है.

भारतीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन की अध्यक्षता में बनी चयन समिति ने अंततः अरुंधती भट्टाचार्य का चयन किया. अरुंधती के अपने हुनर व मुश्किलों से जीतने कि क्षमता नें उन्हें पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्र में सबसे ऊपरी पायदान पर पहुंचाया. फोर्ब्स पत्रिका ने उन्हें 2015 में दुनिया की 100 सबसे शक्तिशाली महिलाओं की सूची में शामिल किया है. अरुंधती भट्टाचार्य भारत की पहली और एकमात्र ऐसी महिला है जो फार्च्यून की फर्स्ट 500 में आने वाली किसी भारतीय कम्पनी का प्रतिनिधित्व करती है. अरुंधती ने मोबाइल बैंकिंग और अन्य बैंकिंग सुविधाओं के सपने को साकार करने में काफी योगदान दिया है. एसबीआई में कई नई सुविधाओं की पहल करने के साथ ही उन्होनें महिला कर्मचारियों की सुविधा व बेहतरी के लिए कई नीतियां बनाई. उनके कार्यकाल में एसबीआई की आर्थिक मजबूती अरुंधती के सफलता की दास्तां बयान करती है. हाल ही में उन्हें आईआईएम संबलपुर का चेयरपर्सन बनाया गया है जो उनकी योग्यता को साबित करता है.

बहुत कम लोग ही जानते है अरुंधती भट्टाचार्य बैंकर नही बल्कि पत्रकार या संग्रहालय विशेषज्ञ बनना चाहती थी. दिखने में वे काफी गंभीर लगती हैं पर है काफी मिलनसार और सहज. उनकी आवाज में इतनी गहराई है कि वे अपने तर्क बड़े दमदार तरीके से रखती हैं. वे तेज रफ्तार से बात करती हैं, लेकिन फिर भी उनकी अभिव्यक्ति बिल्कुल स्पष्ट होती है. वे मीटिंग में हमेशा पूरी तैयारी के साथ आती हैं और दूसरों की बातें सुनने को भी तत्पर रहती हैं. अंग्रेजी साहित्य में ग्रेजुएट 59 वर्षीया अरुंधती भट्टाचार्य अपनी इन सभी योग्यताओं का उपयोग भारत के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक के संचालन के लिए कर रही हैं. जिससे बैंक की ओर से ग्राहकों को अच्छी सेवाएं दी जा सके. इन सुविधाओं को और अच्छा बनाने के लिए बैंक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है ताकि सेवाओं के मामले में निजी बैंकों से मुकाबला कर सके. अरुंधती को जानने वाले लोग उन्हें दमदार लीडर के रूप में मानते है.

अरुंधती भट्टाचार्य कहती है ”सीनियर अधिकारी हमेशा अच्छे जूनियर कर्मचारियों की तलाश में रहते हैं. जब मौका आता है तो वे आपको जिम्मेदारी सौंप देते हैं.” अरुंधती का मानना है कि महिलाओं का जीवन अपने आप में एक चुनौती है, जिसमें आपको बार-बार खुद को साबित करना होता है. वे कहती है अपने काम से ऐसी छवि बनानी चाहिए जिससे दूसरे खुद ब खुद आपकी तारीफ करें. अरुंधती के अनुसार जीवन में सफलता का कोई भी शॉर्टकट नहीं होता बस आपको ईमानदारी और मेहनत के साथ काम करना होता है. आप अपनी नौकरी को कभी भी नार्मल वे में ना लें बल्कि हमेशा कुछ न कुछ क्रिएटिव और नया करने की कोशिश करते रहना चाहिए. कभी भी जीवन में आने वाली चुनौतियों से हार ना माने क्योंकि अगर आपका लक्ष्य बड़ा है तो यह निश्चित है मेहनत भी बड़ी ही करनी होगी. इसलिए कोई अन्य विकल्प तलाशने की बजाय आपको मेहनत और आने वाली चुनौतियों पर ज़्यादा ध्यान देना चाहिए. आप बस अपना बेस्ट दीजिए, आपकी सफलता शिखर पर होगी.

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