इंसान ने बनाए ये अजूबे, पढकर चौंक जाएंगे आप

1779

वैसे तो प्रकृति मेँ ही इतने अजूबे मौजूद हैँ कि जिनके बारे मेँ जानकर मनुष्य हैरत मेँ पड जाता है। लेकिन मनुष्य का दिमाग भी किसी अजूबे से कम नहीँ है। शायद इसीलिए मनुष्य अपने दिमाग और क्रिएटिविटी का इस्तेमाल करके कुछ ऐसा बनाता है कि देखने वाला बस उसे देखता ही रह जाए। तो आईए जानते हैँ दुनिया के कुछ ऐसे अजूबोँ के बारे मेँ, जिन्हेँ प्रकृति ने नहीँ बल्कि इंसानी दिमाग ने बनाया है।

ईस्टर आईलैंड, पेरू

ईस्टर द्वीप चिली के उत्तर के प्रशांत क्षेत्र मेँ स्थित है। चिली का यह वृक्षहीन द्वीप दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलोँ मेँ से एक है। प्राचीन मूर्तियाँ जिन्हेँ मोइस भी कहा जाता है, वह इस द्वीप का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण है। इन मूर्तियोँ का निर्माण 1250 ईस्वी से 1500 ईस्वी के बीच यहाँ के लोगोँ द्वारा किया गया था। यहाँ की सबसे उंची मोइस को पारो कहा जाता है। जिसकी उंचाई 33 फीट तथा वजन 75 टन है। इस द्वीप को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची मेँ भी सूचीबद्ध किया गया है।

ताजमहल, आगरा

आगरा मेँ स्थित ताजमहल के बारे मेँ तो आपने अवश्य सुना होगा। सफेद संगमरमर की इस विशाल समाधि का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहाँ द्वारा अपनी पत्नी की याद मेँ करवाया गया था। ताजमहल का निर्माण 1632 से 1653 के बीच हुआ था। यह मुगल वास्तुकला का एक उत्कृष्ट नमूना है।

कोलोसियम, रोम

रोम मेँ स्थित कोलोसियम दुनिया की सबसे बडी रंगभूमि है। इसका निर्माण रोमन वास्तुकला के आधार पर 70 एडी मेँ किया गया था। इस कोलोसियम मेँ करीबन 80 प्रवेशद्वार हैँ और यहाँ पर एक बार मेँ 50000 दर्शक साथ बैठकर शो का आनंद ले सकते हैँ। पुराने समय मेँ. कोलोसियम का प्रयोग लोगोँ और जानवरोँ के बीच होने वाली लडाई के लिए प्रयोग किया जाता था। कोलोसियम के निर्माण को पूरा होने मेँ 9 वर्ष से भी अधिक समय लगा। आज दिखने वाला कोलोसियम पहले की अपेक्षा काफी अलग है। दरअसल, इसका कारण समय-समय पर आने वाले भूकम्प हैँ।

क्राइस्ट द रिडीमर, रियो डी जनेरियो, ब्राजील

ब्राजील मेँ स्थित ईसा मसीह का यह स्टैच्यू मनुष्य निर्मित एक आश्चर्य ही है। वास्तव मेँ इस मूर्ति का निर्माण फ्रांस मेँ किया गया। फिर इसके एक-एक टुकडे को रियो डी जनेरियो लाया गया। इसका निर्माण 1931 मेँ पूरा हुआ। इस 98 फीट उंची प्रतिमा को बनाने मेँ करीबन हजारोँ टन कंक्रीट का प्रयोग किया गया। यह पूरी दुनिया मेँ यीशु मसीह की 5वीँ सबसे बडी मूर्ति है।

गीजा के महान पिरामिड, मिस्त्र

मिस्त्र मेँ बने यह पिरामिड मनुष्य द्वारा बनाए गए चमत्कारोँ मेँ से एक है। इनका निर्माण 2589 बीसी से 2504 बीसी के बीच किया गया। दुनिया का सबसे पुराना व सबसे बडा पिरामिड भी मिस्त्र मेँ ही है। इसकी हाइट 146 मीटर है। इसे बनाने मेँ 2300000 पत्थरोँ का प्रयोग किया गया। इस पिरामिड के चेहरे के भीतर वक्रता वास्तव मेँ पृथ्वी की त्रिज्या से मेल खाता है।

चीन की महान दीवार

चीन की महान दीवार मनुष्य द्वारा बनाई गई दुनिया की सबसे लम्बी दीवार है। 8851 किमी लम्बी इस दीवार का निर्माण 2000 साल पहले राजा क़ुइन शी हुआंग द्वारा करवाया गया था। यह मनुष्य द्वारा बनाई गई एकमात्र ऐसी सरंचना है, जिसे चन्द्रमा से भी देखा जा सकता है। इस दीवार को बनाने मेँ एक लाख से भी अधिक लोगोँ की जान चली गई थी। इसे यूनेस्को की विश्व की धरोहर स्थलोँ मेँ सूचीबद्ध किया गया है।

माउंट रशमोर

यह अदभुत व अनोखा माउंट रशमोर दक्षिण डकोटा के ब्लैक हिल्स मेँ रैपिड सिटी से करीबन 25 मील की दूरी पर स्थित है। इसका निर्माण 1927 मेँ शुरू हुआ था। इसे बनाने मेँ करीबन 400 कुशल कारीगरोँ ने 14 साल तक कडी मेहनत की थी। तथा इसे बनाने मेँ लगभग एक लाख डॉलर की लागत आई। यहाँ चट्टानोँ की खुदाई करने के लिए 90 प्रतिशत डायनामाइट का ही सहारा लिया गया। माउंट रूश्मोरे मेँ अमेरिका के चार राष्ट्रपतियोँ जॉर्ज वाशिंगटन, थॉमस जेफरसन, थियोडोर रूजवेल्ट और अब्राहम लिंकन की छवियोँ को उकेरा गया है।

लन्दन आई

जैसा कि इसके नाम से ही व्यक्त होता है, यहाँ से आप पूरे लन्दन को एक नए तरीके से देख सकते हैँ। लन्दन आई एक विशाल फेरिस व्हील है, जो थेम्स नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। वैसे इसे मिलेनियम व्हील के नाम से भी जाना जाता है। यह करीबन 443 फीट लम्बा है तथा इसके व्हील का व्यास 394 फीट है। इसका निर्माण मार्च 2000 मेँ पूरा हुआ था। यह यूरोप की सबसे उंची फेरिस व्हील है। यह यूके का सबसे पॉपुलर टूरिस्ट अट्रेक्शन है तथा सालाना 3.75 लाख से भी अधिक लोग इसे देखने के लिए आते हैँ।

ग्लास ब्रिज, चीन

चीन के हुनान प्रांत मेँ बना ग्लॉस बॉटम ब्रिज दुनिया का सबसे लम्बा ग्लॉस ब्रिज है, जो सितम्बर 2015 मेँ आम लोगोँ के लिए खोला गया। इस बेहद अनोखे व डरावने ब्रिज को नाम दिया गया है हेयोहान क्यूआओ। जिसका अर्थ है ब्रेव मेन ब्रिज। शिनियूजई नेशनल जियोलॉजिकल पार्क से करीबन छह सौ फुट उपर बने इस ब्रिज की लम्बाई करीबन 984 फुट है। यह ब्रिज मात्र 21 कारीगरोँ की मदद से बनाया गया है। हालांकि यह ब्रिज ग्लॉस की मदद से बनाया गया है लेकिन फिर भी यह काफी मजबूत है। ब्रिज को कुछ इस प्रकार डिजाइन किया गया है कि इस पर एक साथ 800 यात्री आसानी से खडे हो सकते हैँ।

अपसाइड डाउन होम, ताइवान

ताइवान के हुआशन क्रिएटिव पार्क मेँ बना हुआ यह घर किसी आम घर की तरह नहीँ है। दरअसल, इस घर की खासियत यह है कि यह सीधा नहीँ बल्कि उल्टा है। साथ ही इस घर को और भी अधिक इफेक्टिव बनाने के लिए घर के अन्दर सभी सामानोँ को उल्टा ही रखा गया है। मतलब, बेड से लेकर सोफा व डाइनिंग टेबल आदि सभी घर की छत से लगे हुए हैँ। इस घर को कला प्रोजेक्ट के तहत हुआशन क्रिएटिव पार्क मेँ वास्तुकारोँ ने बनाया है और इस प्रोजेक्ट को बनाने मेँ करीब 4.12 करोड रूपए खर्च हुए।

“क्या आप वाकई एक बेहतर इंसान हैं ? ऐसे परखिये”
“जानिए मौत से पहले इंसान के दिमाग में क्या विचार आते हैं”
“जीवन में सफल इंसान बनने के लिए सुबह उठकर जरूर करें ये 5 काम”

Add a comment