थायराइड क्या होता है और योग के जरिये कैसे करें इसका इलाज

थायराइड आज के समय की आम और गंभीर समस्या बनती जा रही है जिसे हम सभी को गंभीरता से लेना चाहिए क्योंकि आमतौर पर थायराइड के शुरूआती लक्षण पकड़ में नहीं आते और जब तक हमे इसका पता लगता है तब तक ये गंभीर रूप ले लेता है। इसलिए थायराइड के बारे में जानकारी रखना बेहद जरुरी है ताकि इसके शुरआती लक्षण पहचानकर इसका सही समय पर सही इलाज हो सके। महिलाओं को ख़ास तौर पर थायराइड को लेकर ज्यादा सचेत होने की आवश्यकता है क्योंकि आंकड़े ये बताते हैं की थायराइड के हर 10 रोगियों में से 8 महिलाऐं होती हैं।

आम तौर पर हम कोई भी बीमारी होते ही दवाइयों का सहारा लेते हैं लेकिन आपको बता दें की योग के जरिये भी हम बड़ी से बड़ी बिमारियों से दूर रह सकते हैं और उसका उपचार कर सकते हैं। थायराइड से छुटकारा पाने में भी योग बेहद कारगर इलाज है। तो आइये आपको बताते हैं थायराइड क्या होता है, इसके शुरूआती लक्षण क्या होते हैं और इसका योग के जरिये इलाज कैसे संभव है।

थायराइड क्या होता है? – अखरोट जैसे आकार वाली थायराइड ग्रंथि श्वास नली के ऊपर और स्वर यंत्र के दोनों ओर दो भागों में बनी होती है जो थाइराक्सिन नामक हार्मोन बनाने का काम करती है जो शरीर में नींद, पाचन तंत्र, मेटाबोलिज्म, लिवर की कार्यप्रणाली, शरीर का तापमान आदि को नियंत्रित करता है।

थायराइड के लक्षण – थायराइड का सबसे शुरूआती लक्षण है शरीर में कमजोरी होना। थायराइड होने पर रोगी का शरीर हमेशा थका हुआ और सुस्त रहता है साथ ही शरीर में अक्सर आलस रहता है और रोगी डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। इसके अलावा काम में मन ना लगना, सोचने समझने की शक्ति कमजोर हो जाना, याद्दाश्त कमजोर हो जाना, अक्सर मांसपेशियों, गले में सूजन, अचानक वजन कम या ज्यादा होना और जोड़ों में दर्द रहना थायराइड के लक्षण होते हैं। अगर आपको भी अक्सर ऐसी शिकायतें होने लगी हैं तो आपको सावधान होने की आवश्यकता है क्योंकि ये थायराइड के संकेत हो सकते हैं।

योग के जरिये थायराइड का इलाज – योग सदियों से चला आ रहा है जो स्वस्थ रहने का एक सबसे प्राचीन और कारगर तरीका माना गया है। योग की अहमियत आज सिर्फ भारत में भी नहीं बल्कि दुनिया भर में समझी जा रही है और सभी इसे अपना रहे हैं। योग के जरिये थायराइड पर भी काबू पाया जा सकता है। योग के कुछ ऐसे आसन हैं जो थायराइड की समस्या से निजात दिलाने में बेहद सहायक हैं। आइये जानते हैं कौन कौन से हैं वो आसन जिन्हे हर थायराइड रोगी को नियमित करने चाहिए।

मत्स्यासन – मत्‍स्‍यासन में पीठ के बल जमीन पर सीधा लेटकर अपने दोनों पैरों को आपस में सीधा जोड़ लें और अपने दोनों हाथों की हथेली को गर्दन के नीचे सहारा देते हुए गर्दन को ऊपर की ओर उठाएं और फिर वापस धीरे से गर्दन को वापस उसी स्थिति में ले आएं। ध्यान रखें गर्दन उठाते समय और वापस लाते समय पैर सीधे रहें और हवा में ना उठें।

हलासन – हलासन में भी पीठ के बल लेटना होता है और अपने दोनों पैरों को सीधा जोड़कर रखना होता है फिर दोनों पैरों को साथ में उठाकर 90 डिग्री तक ले आएं और धीरे धीरे पैरों को सिर की तरफ झुकाकर जमीन से स्पर्श करें। जब पैर जमीन को छू जाएँ तो अपने दोनो हाथों को क्रॉस कर अपने सिर पर रखें।

धनुरासन – पेट के बल लेटकर सांस छोड़ते हुए अपने दोनों घुटनों को एक साथ मोड़ लें और अपनी एड़ियों को पीठ की तरफ लाएं और अपने दाएं हाथ से दाएं टखने को और बाएं हाथ से दाएं टखने को पकड़ें और सांस रोकें और धीरे धीरे सांस छोड़ते हुए अपने घुटनों को उठाकर दोनों पैर ऊपर की और खींचें और सीने को उठाएं। धनुरासन में अपने शरीर को धनुष जैसी आकृति में लाना होता है। अब अपने सिर को ऊपर की तरफ उठाते हुए पीछे की तरफ लाएं और घुटनों और टखनों को एक दुसरे से सटा लें। 15 सेकंड से 1 मिनट तक इसी स्थिति में रहने के बाद फिर से धीरे धीरे साँस छोड़ते हुआ टखनों को छोड़ते हुए पैर सीधे कर लें और फिर गर्दन सीधी कर लें।

प्राणायाम – पीठ के बल जमीन पर लेटकर अपनी दोनों हथेलियों को पेट पर रखें, ऐसी स्थिति में आपके दोनों हाथों की मध्यमा अंगुली नाभि को छूनी चाहिए। पहले पेट को ढीला छोड़ दें और फिर साँस भरते हुए पेट को फुलाएं। इस क्रिया को बार बार दोहराते हुए 5 मिनट तक करें। इस क्रिया में छाती, पसलियों और पेट में होने वाले बदलाव को महसूस करें।

हमने आपसे सिर्फ ज्ञानवर्धक जानकारी साझा की है। कोई भी प्रयोग आजमाने से पहले अपनी सूझ-बुझ का इस्तेमाल जरूर करे। सदैव खुश रहे और स्वस्थ रहे।

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