बुखार सताये तो इन घरेलू उपाय को आजमाएं

मई 15, 2016

बदलते मौसम में स्वास्थ्य का उतार-चढ़ाव एक सामान्य प्रक्रिया है। कभी बुखार तो कभी खांसी तो कभी पेट की समस्या, इन सब में बुखार का आना एक सामान्य बात है। मौसम के इस बदलाव में बच्चों से लेकर बड़े तक बुखार की चपेट में आ जाते है जिन्हें हम मलेरिया और वायरल फीवर के नाम से पहचानते है। कई बार मामूली सा दिखने वाला बुखार भी कई दिन तक पीछा नही छोड़ता। ऐसी हालत में बड़ों से ज्यादा बच्चे परेशान हो जाते है जिस वजह से शरीर में कमजोरी आ जाती है। लेकिन अब आप निश्चिंत हो जाइये, बुखार को दूर भगाने के कई घरेलू नुस्खे है जिसकी जानकारी हम आपको इस लेख में देंगे। इन उपायों में से सबसे महत्वपूर्ण और अचूक इलाज है भूना नमक। नमक का उपयोग कैसे और कब करें जिससे आप इस गंभीर बुखार से राहत और आराम पा सके। वैसे तो बुखार कोई गंभीर समस्या नही है लेकिन फिर भी थोड़ा सतर्क और सजग रहने की आवश्यकता है। मौसम के कारण बुखार की चपेट में आना एक आम समस्या है जिस कारण अधिकांश लोग सामान्य बुखार में डॉक्टर के पास जाने से बचते है।

बच्चे हो या बड़े, बुखार आते ही हम लोग ज्यादातर घर पर रखी दवाई कि तरफ तुरंत खिचे चले जाते हैं। क्या आप अपने परिवार वालों के लिए इन सब केमिकल्स को सुरक्षित समझते है? जाहिर सी बात है नही! तो क्यों ना बुखार कम करने के कुछ बढ़िया और प्राकृतिक उपायों को अपनाने का प्रयास करें। बुखार से ग्रस्त व्यक्ति को पानी प्रचुर मात्रा में पिलाएं और स्वच्छता रखना ना भूलें। बस थोड़ी सी सावधानी बरतने से साधारण बुखार एक या दो दिन में अपने आप उतर जाता है। बुखार स्वयं में कोई बीमारी नहीं है बल्कि एक लक्षण है जो यह दर्शाता है कि शरीर किसी संक्रमण से ग्रस्त है। दूसरे शब्दों में यह रोग प्रतिरक्षा प्रणाली द्वारा किसी संक्रमण से लड़ने का लक्षण है।

बुखार संक्रमण के खिलाफ शरीर की एक सुरक्षात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है। वैसे तो बुखार के कई गैर-संक्रामक कारण हैं लेकिन वायरल संक्रमण बुखार का एक सामान्‍य लक्षण है। वायरल संक्रमण का कारण कई तरह के वायरस होते है, इसमे इंफ्लूएंजा यानी फ्लू सबसे ज्‍यादा आम है। यह वायरल शरीर के कई अंगों को प्रभावित करता है जैसे – आंत, फेफड़े, श्वास नली, पेट में दर्द, उल्टी-दस्त, गले में सूजन, आवाज बैठना, नाक का बहना, जुखाम-खांसी, मांसपेशियों में दर्द और अन्‍य भी कई अंग बुखार की जकड़न में आ जाते है। यह सारी परेशानी हर बुखार में हो यह जरूरी नही है। यह इस बात पर भी निर्भर करता है कि आपकी रोग-प्रतिरोधक क्षमता कितनी मजबूत है। बुखार आने का मतलब यह होता है कि बीमारी या संक्रमण की प्रतिक्रिया के रूप में आपके शरीर का तापमान बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि बुखार संक्रमण के प्रति शरीर की कुदरती प्रतिरक्षा का हिस्‍सा है। शरीर का तापमान संक्रमण को नष्‍ट करने का कार्य करता है।

आपकी जानकारी के लिए हम आपको यह बताना चाहते है कि एंटी-बायोटिक्‍स का संक्रमण पर कोई असर नहीं पड़ता। ऐसे में आप डॉक्टर के पास जाएं उससे पहले क्यों ना कुछ घरेलू नुस्खे भी आजमा लिए जायें जो बुखार को कम या ठीक करने में सहायक हो। वायरल बुखार के लिए प्राकृतिक उपाय सरल, सुरक्षित और आसानी से उपलब्ध है। नीचे दिए गये कुछ घरेलू नुस्खो को आप उपाय के तौर पर आजमा सकते हैं।

इसलिए आपकी सहायता हेतु जागरूक हर वक्त प्रयत्नशील रहती है कि कैसे और क्या आपकी मदद की जाये, जिसका आप पूरा-पूरा लाभ उठा सकें।

1. नमक का ये कारगर प्रयोग कर देगा हर तरह के बुखार को छू-मंतर-

भोजन में इस्तेमाल होने वाले सादे नमक को तवे पर धीमी आंच में तब तक सेंके, जब तक नमक का रंग कॉफी के रंग जैसा काला भूरा ना हो जाये। फिर इसे उतार कर ठण्डा कर लें और एक शीशी में भरकर रख दें। जब भी आपको यह महसूस होने लगे की आपको बुखार आ सकता है तो बुखार आने से पहले ही एक गिलास गर्म पानी में एक चाय का चम्मच भूना हुआ नमक मिलाकर पी लें। जैसे ही आपका बुखार उतर जाये तो एक चम्मच नमक एक बार फिर एक गिलास गर्म पानी के साथ लें। इस उपाय को करने से बुखार फिर आपको अपनी चपेट में नहीं लेगा।

विशेष ध्यान योग्य-

2. सोंठ, तुलसी, गुड़ एवं काली मिर्च का 50 मि.ली काढ़ा बनाये फिर उसमें स्वादानुसार आधा या 1 नींबू निचोड़कर पीने से सामान्य बुखार चला जाता है। काढ़ा पीने के बाद कुछ देर के लिए पूरा ओढ़ कर सो जायें। इससे शरीर की गर्मी पसीने के रूप में बाहर आ जायेगी।

3. एक कप गर्म पानी में एक नींबू का रस निचोड़ लें। अब इसमें पतले रूई के फोहे भिगो लें। रूई के फोहे का अतिरिक्‍त पानी निचोड़कर जुराबों के जोड़े में डालकर पहन लें और रात भर रखें, इससे बुखार का तापमान कम होता है।

4. एक गिलास पानी में एक बड़ा चम्म्च साबुत धनिया डालकर अच्छे से उबाल लें। फिर इसमें थोड़ा दूध और चीनी मिलाएं और सेवन करें। इस नुस्खे से वायरल बुखार में बहुत राहत मिलती है।

5. 7-8 कड़वे नीम के पत्ते तथा 10-12 तुलसी के पत्ते खायें अथवा पुदीना एवं तुलसी के पत्तों का एक तोला रस लें उसमें तीन ग्राम चीनी मिलाकर पिएं। इससे हल्के बुखार में बेहद लाभ होता है।

6. एक नींबू के दो हिस्से कर लें, फिर इन टुकड़ों से पैरों के तलवों पर मसाज करें। आप चाहें तो नींबू के इन टुकड़ों को जुराबों में डालकर सारी रात पहनकर भी सो सकते हैं।

7. बुखार में ठंडे या गुनगुने पानी का स्नान बहुत फायदेमंद है। अगर आप बुखार में स्नान नही कर पा रहे है तो भीगे साफ कपड़े से शरीर को पोछ सकते है। दिन में शरीर को कई बार पोछे, इस उपाय से शरीर का तापमान कम होता है। भीगे कपड़े की पट्टी माथे पर रखना भी बुखार में फायदा पहुंचाता है।

8. तुलसी के 20-25 ताजे और साफ पत्ते और आधा या एक चम्मच लौंग पाउडर को एक लीटर पानी में डालकर उबाल लें। तब तक उबाले जब तक पानी आधा ना हो जायें। इस काढ़े का हर दो घंटे में सेवन करें।

9. कटुकी, चिरायता एवं इन्द्रजौ सभी की 2-5 ग्राम मात्रा को 100-400 मि.ली. पानी में उबालकर 10-50 मि.ली. कर दें। यह काढ़ा बुखार की रामबाण दवा मानी जाती है।

चिरायता बनाने की विधि-

सूखी तुलसी के पत्ते का चूर्ण, सुखी नीम की पत्तियों का चूर्ण और सूखे चिरायते का चूर्ण सभी को 100 ग्राम की समान मात्रा में लें और अच्छे से मिलाकर एक बड़े डिब्बे में भर कर रख दें। यह तैयार मिश्रित चूर्ण मलेरिया या अन्य बुखार की स्थिति में दिन में तीन बार दूध से सेवन करें। केवल दो दिन में आपको आश्चर्यजनक लाभ मिलेगा। यह एक कारगर एंटीबॉयोटिक है। बुखार ना होने की स्थिति में भी यदि इसका एक चम्मच सेवन प्रतिदिन किया जायें तो यह चूर्ण शरीर को कई बीमारियों से दूर रखता है। इसके सेवन से शरीर के सारे कीटाणु नष्ट हो जाते है। यह रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, खून भी साफ करता है तथा धमनियों में रक्त-संचार को सुचारू रूप से संचालित करता है। चिरायता एक देहाती जड़ी-बूटी है जो बुखार की गोली से अधिक प्रभावशाली है। एक प्रकार का देहाती घरेलू नुस्खा है।

10. बुखार में करेले की सब्जी, मोठ की दाल का सूप और कच्‍चे लहसुन के टुकड़े खायें। लहसुन को शहद में लगाकर भी खा सकते है। इसके अतिरिक्त लहसुन की दो कलियों को दो चम्‍मच ऑलिव ऑयल में गर्म करें और अपने पैरों के तलवों में मसाज करे। मसाज के बाद अपने पैरों को सारी रात लपेटकर रखें, बुखार से राहत मिलेगी।

11. एक कप पानी में दो मध्यम आकार के सूखे अदरक के टुकड़े या सौंठ पाउडर को डालकर उबालें। एक मिनट उबालने के बाद अदरक के साथ थोड़ी हल्दी, काली मिर्च, चीनी को भी उबालें। इस चाय को दिन में चार बार थोड़ा-थोड़ा पिएं। इससे वायरल बुखार में आराम मिलता है।

12. इमली के रस या एलोवेरा जेल या अमरूद की पत्ती के रस का प्रयोग करके शरीर के ताप को तेजी से कम किया जा सकता है। इनमें से किसी एक का रस माथे पर लगायें, सूखने के पश्चात फिर लगायें, जब तक शरीर का तापमान कम ना हो जाये।

सामान्य बुखार में उपवास रखना लाभदायक है। कुछ समय के हल्के उपवास के बाद थोड़े दिन मूँग लें फिर सामान्य खुराक शुरु करें। ऋषि चरक के लिखे अनुसार बुखार में दूध पीना सर्प के विष के समान है अतः दूध का सेवन बुखार के दौरान ना करें। पानी खूब पिएं, ख़ान-पान का पूरा ध्यान रखे और कमरे का तापमान नियंत्रित रखें। रोगी के आस-पास साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखे, जिससे संक्रमण फैलेगा नही। बुखार के दौरान भोजन तरल लें और पूरा आराम करें। आरामदायक हल्के कपड़े पहनें, मोटे कपड़े न पहनें। मोटी कंबल ना लपेटें चाहे ठंड ही क्यों न महसूस हो रही हो, क्योंकि इससे आपके शरीर के तापमान में वृद्धि होगी।

यह केवल घरेलू उपाय हैं जिनका कोई नुकसान तो नही है पर इन्हें चिकित्सा सलाह के स्थान पर प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। यदि आपका बुखार नहीं उतर रहा है तो आप बुखार को हल्के में ना लें। बुखार की वजह से अगर आपको अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है तो तुरंत डॉक्टरी सलाह लें और उनके दिशा निर्देश का पालन करें।

अगर आपको किसी भी तरह की जड़ी-बूटी से प्रॉब्लम या एलर्जी है तो अपने स्वास्थ्य चिकित्सक से तुरंत संपर्क करें, फिर उनकी राय पर उपायों को आजमायें। हमारा उद्देश्य आपका सामान्य ज्ञान बढ़ाना है। सभी तरह की बुखार से संबंधित उपाय, देख-रेख व खानपान की संपूर्ण जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क ज़रूर करे।

“कब्ज को दूर करने के असरदार घरेलू उपाय”

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