आइये जानते हैं वनों का महत्व। जब तपती धूप में हमें किसी पेड़ की छाया मिल जाती है तब हमें पेड़ों का महत्त्व याद आता है लेकिन जब वही पेड़ और जंगल हमारे स्वार्थ के रास्ते में आते दिखाई देते हैं तो हमें अवरोध की तरह दिखाई देने लगते हैं।

एक ही चीज़ के प्रति दो नजरिये हमें वनों से, पेड़ों से दूर कर रहे हैं और बिना पेड़ों के जीवन वैसा ही होगा जैसे पतझड़ के दौरान पेड़ हुआ करते हैं। ऐसे में पेड़ों और वनों के महत्त्व को जानना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है इसलिए आज बात करते हैं वनों और पेड़ों के महत्त्व की।

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वनों का महत्व

प्राचीन समय में जब आधुनिकता की अंधी दौड़ शुरू नहीं हुयी थी तब प्रकृति को विशेष महत्त्व दिया जाता था और वनों को प्रकृति का अनूठा उपहार समझा जाता था। जीव जंतु आहार और औषधि के लिए वनों पर ही निर्भर हुआ करते थे।

हमारे पूर्वज और ऋषि मुनि वनों में ही तपस्या किया करते थे और उनके आश्रम भी वनों के शांत और शीतल वातावरण में ही हुआ करते थे।

सभी तरह के जीव जंतुओं के लिए वन अति आवश्यक होते हैं। ऋतु चक्र को संतुलित रखने वाले वन, प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में भी मददगार होते हैं। आज वनों की तेजी से हो रही कटाई के कारण ही जंतुओं की बहुत सी प्रजातियां लुप्त हो गयी हैं क्योंकि उन्हें वन ही संरक्षण प्रदान करते थे। ऐसा होने पर प्रकृति का संतुलन बिगड़ने लगा है।

वन ना केवल औषिधय महत्त्व के वृक्षों युक्त होते हैं बल्कि इनमें पाए जाने वाले वृक्ष ऑक्सीजन छोड़ते हैं जो जीवन के लिए अति आवश्यक तत्व है।

तेज बारिश के दिनों में मिट्टी के कटाव को रोकने और उसकी उर्वरा शक्ति बनाये रखने में भी वन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इतना ही नहीं, पेड़ – पौधे अपनी जड़ों से पृथ्वी का जल अवशोषित करते हैं जो वाष्पित होकर वायुमंडल में बादल का रुप लेकर बारिश करते हैं और इस तरह ये चक्र लगातार चलता रहता है।

पर्यावरण को शुद्ध बनाये रखने में भी पेड़-पौधों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि वाहनों और कल-कारखानों से निकलने वाली कार्बन डाई ऑक्साइड गैस को पेड़-पौधे अवशोषित कर लेते हैं और वायु प्रदूषण को कम करने में सहयोग करते हैं।

इको सिस्टम की बुनियाद बनाने वाले पेड़-पौधे का हर भाग मानव के लिए उपयोगी साबित होता है। पेड़ों की पत्ती से लेकर जड़ तक हर भाग भोजन, औषधि और सुविधाओं के साजो-सामान उपलब्ध करवाते हैं।

शायद इसलिए हम वनों के प्रति आभारी होने की बजाये उन पर हावी हो गए हैं। इसी का नतीजा है कि आज वन नहीं है क्योंकि उनकी जगह बड़ी-बड़ी बहुमंजिला इमारतों ने ले ली है और उन इमारतों में रहने वाले लोग ये भूल गए हैं कि वनों की जड़ों के बिना उपलब्धि की इस ऊंचाई तक लम्बे समय तक बने रह पाना संभव नहीं है। काश समय रहते हम ये समझ पाते कि वन हैं तो हम हैं।

अगर आज भी हम वनों के महत्व को समझ लें तो आने वाली मुसीबतों यानी प्राकृतिक आपदाओं से कुछ हद तक बचाव संभव है।

उम्मीद है जागरूक पर वनों का महत्व कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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