वसीयत क्या है और जायदाद की वसीयत कैसे बनवाएं?

जनवरी 25, 2018

मौत के बाद अपनी जायदाद का इस्तेमाल करने का हक किसी को सौंपने का फैसला जीते जी लेना वसीयत कहलाता है। वसीयत करने वाला ये बताता है कि उसकी मृत्यु के बाद उसकी जायदाद का कितना हिस्सा किस-किस को मिलेगा। वैध तरीके से बनायी गयी वसीयत के ज़रिये ही अपनी जायदाद पर उन लोगों को अधिकार दिया जा सकता है जिनके लिए ये जायदाद बनायी गयी थी।

किस-किस सामान की वसीयत होती है – स्वयं द्वारा कमाई गयी चल संपत्ति जैसे कैश, गहने, बैंक में जमा पूंजी, पीएफ, शेयर्स, किसी कंपनी की हिस्सेदारी के अलावा खुद की कमाई हुयी अचल संपत्ति जैसे जमीन, मकान, खेत, दुकान और पुरखों से मिली चल-अचल संपत्ति की वसीयत बनाई जा सकती है।

वसीयत करने का सही समय – रिटायरमेंट के बाद वसीयत करना सही होता है। 60 साल की उम्र में वसीयत बनवाना अच्छा रहता है और अगर कम उम्र में किसी गंभीर बीमारी से ग्रस्त हों तो वसीयत पहले भी बनवायी जा सकती है ।

वसीयत करने का प्रारूप – वसीयत करने के लिए कोई निश्चित फॉर्म नहीं होता है। इसे सादे कागज़ पर भी बनाया जा सकता है और खुद के हाथ से जायदाद लिखना सही होता है। इस पर खुद के हस्ताक्षर के साथ दोनों गवाहों के भी हस्ताक्षर और अंगूठे लगवाने चाहिए।

वसीयत करने के दौरान जायदाद को जिस व्यक्ति के नाम किया जाए उसका पूरा नाम, पिता का नाम, पता और उससे रिश्ता ज़रूर लिखना चाहिए। पार्टनर के साथ जॉइंट अकाउंट होने की स्थिति में वसीयत करने वाला केवल अपने हिस्से की वसीयत ही बना सकता है।

वसीयत को किसी भी भाषा में लिखा जा सकता है और इसके लिए स्टाम्प ड्यूटी अनिवार्य नहीं होती है। हो सके तो वसीयत को छोटा बनाना चाहिए जैसे एक पेज में। ऐसा करने से बार-बार विटनेस की जरुरत नहीं पड़ती है लेकिन अगर वसीयत एक पेज से ज़्यादा की हो तो हर पेज पर दोनों गवाहों के हस्ताक्षर करवाएं।

वसीयत में कभी भी और कितनी ही बार बदलाव किये जा सकते हैं । अपनी वसीयत में बेटियों की हिस्सेदारी को भी ध्यान में रखें।

वसीयत को बना लेने के बाद सब रजिस्ट्रार ऑफिस जाकर इसे रजिस्टर्ड भी करवाएं और रजिस्ट्रार के रजिस्टर में इसकी एंट्री भी करवाएं।

गवाह का चुनाव कैसे करें-

इन स्थितियों में क्या किया जाये-

वसीयत करने के दौरान की जाने वाली ये आम गलतियां करने से बचें–

दोस्तों, जीवन से जुड़ा हर फैसला अहम होता है तो वसीयत करने से जुड़े इस अहम फैसले को नज़रअंदाज़ कैसे किया जा सकता है। वसीयत बनाने के सही समय का चुनाव करें और सोच-समझकर अपनी जायदाद सुरक्षित हाथों में सौंपें। इस सम्बन्ध में आप किसी योग्य वकील से सलाह भी ले सकते हैं।

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“इच्छा मृत्यु क्या है? क्या ये क़ानूनी तौर पर जायज है?”

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